1
 


महायोद्धा राम
रावण का रामायण


रोहित वैद
निर्देशक


जावेद अख़्तर
पटकथा


























Movie Review
महायोद्धा राम :रावण के POV से


निर्देशक: रोहित वैद

कहानीकार: अशोक बैंकर

पटकथा: जावेद अख़्तर, अशोक बैंकर

भारत में सदियों से लोगों ने रामायण को राम के नजरिए से ही सुना और पढ़ा था। पर बदलते वक्त के साथ रामायण को देखने और समझने का नजरिया भी बदला है। इस परंपरा की शुरुआत का श्रेय रामकथा सुनाने वाले कथावाचकों को ही जाता है। अपने ज्ञान और अध्ययन के आधार पर कथावाचकों ने रामायण के कई अनछुए पहलुओं और किरदारों को सामने लाया है। यही वजह है अलग-अलग कथावाचकों की कथाओं और व्याख्याओं में भी अंतर मिलता है। अब यह परंपरा टीवी और सिनेमा के पर्दे पर भी देखने को मिल रही है। पिछेले दिनों स्टार प्लस पर प्रसारित धारावाहिक सिया के राम में रामायण की कथा सीता के दृष्टिकोण से कहने की कोशिश की गई और इस बार निर्देशक रोहित वैद और कहानीकार अशोक बैंकर ने रामायण की कहानी को रावण के नजरिए से कहने की कोशिश की है। इसलिए फिल्म महायोद्धा राम को रावण की रामायण कहना ही ज्यादा बेहतर होगा।

फिल्म के अनुसार राम के जीवन में घटने वाली हर घटना के लिए रावण ही जिम्मेदार है। राम के जन्म से पहले ही रावण को यह पता होता है कि विष्णु का अवतार राम ही उसका संहार करेगा। इसलिए वह जन्म के समय से ही राम को मारने की कोशिश करता है। रावण की यह कोशिश महाभारत के कंस जैसी दिखाई देती है। वहीं कई दूसरी घटनाएँ भी हैं जो आम दर्शकों के कल्पना से बिलकुल परे हैं। जैसे सीता स्वयंवर के वक़्त रावण के शिव धनुष को छूने और उठाने में असफल होने से पहले ही राम का धनुष उठाना। इस बात से चिढ़ कर रावण का राम के खिलाफ साजिश करना। उसके बाद मंथरा और कैकयी को अपने वश में कर के राम को बनवास भेजना, सीता का राम और लक्ष्मण के साथ मिल कर राक्षसों को मारना और सबसे दिलचस्प सीता का शूर्पनखा के साथ युद्ध करना। यही नहीं लेखक ने राम-रावण के युद्ध कारण को भी अपने तरीके से परिभाषित किया है। फिल्म में दिखाया गया है कि रावण राम के खिलाफ युद्ध के लिए पूरी लंका को अपने साथ लाना चाहता है पर उसके पास ऐसी कोई वजह नहीं है। इसलिए वह छल पूर्वक अपनी बहन शूर्पनखा का उपयोग करता है। वह जानबूझ कर उसे राम के पास अपमानित होने के लिए भेजता है और फिर इस अपमान को पूरे लंका का अपमान बता कर लंकावासियों का समर्थन हासिल कर लेता है। इसके अलावा फिल्म का सबसे आकर्षक पहलू रावण के दसों सिरों का भेद है। लेखक ने रावण के दसों सिरों के गुण और और दोष को बताया है। रावण के कुछ सर हमेशा उसे अच्छे कर्म करने की सलाह देते हैं तो कुछ उसे यह अहसास दिलाते हैं कि वह महाशक्तिशाली है और कुछ भी कर सकता है। इसके बहाने लेखन ने रावण की अच्छाइयों पर भी प्रकाश डालने की कोशिश की है। क्योंकि महापुराणों में रावण को महापंडित भी कहा गया है और यह रावण के जीवन का दूसरा पहलू है।

रावण के दस सिरों का उपयोग निर्देशक ने फिल्म में ह्यूमर लाने के लिए किया है और वह काफी हद तक सफल भी रहे हैं। रावण का एक सिर प्रसिद्ध रेडियों संचालक यूनिस खान की आवाज में उड़ती-उड़ती खबर सुनता है। इसी तरह रावण के दूसरे सिर भी अपने खास अंदाज में लोगों हंसाने की कोशिश करते हैं।  

 कुल मिलकर इस फिल्म ऐसा बहुत कुछ है जिसे पहले कहीं और देखा या सुना नहीं गया है।  शायद इसी वजह से दर्शकों को ये चीजें हजम नहीं हो पाती। फिल्म का निर्देशन अच्छा है पर अगर आप फिल्म के एनीमेशन की तुलना हॉलीवुड के फिल्मों से करेंगे एक बार और निराशा होगी।  लेकिन अगर इसे भारतीय मापदंडो पर मापें तो आपको फिल्म के एनीमेशन से कोई शिकायत नहीं होगी।

फिल्म में इंडस्ट्री के कुछ बड़े कलाकारों ने अपनी आवाज़ें दी हैं। रावण के किरदार में गुलशन ग्रोवर ने अपनी दमदार आवाज़ से जान फूक दी है। ऐसा पहली बार दिखाया गया है कि रावण के दसों सरों को अलग-अलग कलाकारों ने आवाज़ दी हो। रावण के एक सर को जहां स्वर्गीय सदाशिव अमरापुरकर ने अपनी आवाज़ दी वहीँ दूसरे सर को रोशन अब्बास ने अपनी आवाज़ से जीवंत किया। कुल मिलाकर रावण का किरदार ठीक-ठाक रहा। एक्टर कुणाल कपूर ने राम के किरदार को, जिम्मी शेरगिल ने लक्ष्मण और टेलीविज़न की मशहूर अदाकारा मौनी रॉय ने सीता के किरदारों को अपनी अपनी आवाज़ों से सजाया है। रज़ा मुराद की भारी भरकम आवाज़ ने गुरु विश्वामित्र के किरदार को और प्रभावशाली बनाया।  

महायोद्धा राम बच्चों के साथ लाइट मूड में देखी जा सकती है.



   रुद्र भानु

रूद्र भानु दैनिक भास्कर सहित कई प्रतिष्ठित पत्रिकाओं और चैनलों में पत्रकारिता करने के बाद आजकल मुंबई में फिल्म लेखन और निर्देशन में सक्रिय हैं। .

Click here to Top