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वीरप्पन
फिल्मी वीरप्पन


























Movie Review
वीरप्पन:दमदार किरदार पटकथा लाचार



कलाकार- संदीप भारद्वाज, सचिन जोशी, लीजा रे, ऊषा जाधव  
निर्देशक- राम गोपाल वर्मा
निर्माता - रैना सचिन जोशी

रामू का वीरप्पन जब पर्दे एक पुलिसवाले को बेरहमी से मारता है तब एक मिनट के लिए थिएटर में पसरा सन्नाटा उस वीरप्पन की याद दिलाता है जो कर्नाटक और तमिलनाडु के जंगलों का बेताज बादशाह था। जिसने 2000 से अधिक हाथियों का शिकार किया था और कमोबेश इतने ही पुलिसवालों को अपनी गोलियों का निशाना बनाया था। कहते हैं इस वीरप्पन को पकड़ने में सरकार ने 20 करोड़ रुपए खर्च किए थे और भी एक संयोग ही है कि रामगोपाल वर्मा ने भी अपने वीरप्पन को पर्दे पर उतारने के लिए 20 करोड़ रुपये ही खर्च किए हैं। पर जिस वीरप्पन को रामू ने पर पर्दे पर उतारा है वह कुछ देर तक तो वास्तविक वीरप्पन की याद दिलाता है पर जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है फिल्म वीरप्पन के बजाय स्पेशल टास्क फोर्स की प्लानिंग को अपने केंद्र में ले लेती है।

फिल्म की कहानी जंगलों से शुरू होती है। दो राज्यों के बीच बसे इस जंगल में वीरप्पन की दहशत है और अत्याधुनिक हथियारों से लैस स्पेशल टास्क फोर्स कई टुकड़ियाँ। इन दोनों के अलावा जंगल में कभी-कभी हाथी भी नजर आते हैं। पर वीरप्पन को पकड़ने की नाकाम पुलिसिया कोशिश के बीच जानवर या चन्दन की लकड़ी दिखाई नहीं देती। पुलिस के एक खास अफसर (सचिन जोशी) वीरप्पन को पकड़ने की ज़िम्मेदारी मिलती है। पर पुलिस का हर प्लान वीरप्पन को पकड़ने में नाकामयाब साबित होता है। तब पुलिस एक शहीद पुलिस अफसर की पत्नी प्रिया (लीजा रे) की मदद से वीरप्पन की पत्नी मुत्तुलक्ष्मी (उषा जाधव) से जानकारी हासिल करने का प्लान बनाती है। दोनों की दोस्ती से पुलिस को जानकारी मिलने लगती है और कई ट्विस्ट और टर्न के बाद कहानी अपने अंजाम तक पहुँचती है।

         कुल 2 घंटा 05 मिनट  के इस सफर की शुरुआत जिस रोमांचक अंदाज में होती है वह अंत तक बरकरार नहीं रह पाती। कहानी बहुत तेजी से भागती है बावजूद इसके फिल्म का फस्ट हाफ लंबा लगाने लगता है। पटकथा कई बार लड़खड़ाने-सी लगती है। कहानी की सबसे बड़ी समस्या वीरप्पन की डिटेलिंग को लेकर है। सूत्रधार वीरप्पन को एक बालक से दावन और फिर महादानव बना देता है पर यह बात पर्दे पर खुल कर सामने नहीं आ पाती। पुलिस का वीरप्पन को पकड़ने के लिए प्लान बनाती है और फिर असफल हो जाती है। ऐसा क्यों होता है इसका जवाब स्पष्ट नहीं हो पाता। अपने मुट्ठीभर साथियों और थ्री नॉट थ्री जैसे हथियारों के साथ वीरप्पन अत्याधुनिक संचार और हथियार वाले स्पेशल टास्क फोर्स को बार-बार कैसे पटखनी देता है, हाथी दांत और चन्दन की तस्करी को जंगल में बैठ कर वह कैसे अंजाम देता है ? इन सब बातों का कोई ठोस जवाब नहीं मिल पाता। अगर जवाब मिलता भी है तो टुकड़ों में या आधा अधूरा। मसलन फिल्म के एक दृश्य में जब वीरप्पन की पत्नी मुत्तुलक्ष्मी पैसे के लिए उससे संपर्क करने की कोशिश करती है तब वह एक टेप में अपनी बात रिकॉर्ड कर देती है और एक बालक उसे वीरप्पन तक पहुंचा देता है। लगभग 20 सालों तक इतने बड़े जंगल में राज करने वाले वीरप्पन की संचार व्यवस्था ऐसी ही रही होगी ! कहने का आशय यह है कि वास्तविक वीरप्पन को पर्दे पर उतारने के लिए जिस शोध और डिटेलिंग की जरूरत थी वह कहीं भी नजर नहीं आती है। फिल्म टुकड़ों-टुकड़ों में दर्शकों को पसंद आती है। रामू ने पुलिस और वीरप्पन के मुठभेड़ के कई दृश्य फिल्माएं हैं। कई जगह पर ये दृश दर्शकों को बांधने में कामयाब हो जाते हैं, खासकर फिल्म के अंतिम 25 मिनट। पर पूरी फिल्म में कहीं भी वह अंदाज या स्पेशल बात नजर नहीं आती जिसने वीरप्पन को वीरप्पन बनाया। फिल्म खत्म होने बाद भी यह अधूरापन मन को कचोटता है कि रामू का ये विरप्पन इतना फिल्मी क्यों है। इसमें सत्या और कंपनी जैसी वास्तविकता और गहराई क्यों नहीं है!   

फिल्म के बैकग्राउंड म्यूजिक और कैमरा के साथ रामू ने जम कर प्रयोग किया किया है। लेकिन कहानी के मिजाज के हिसाब से यह प्रयोग कई जगह बेतुका-सा लगता है। सौरभ भारद्वाज ने वीरप्पन के किरदार को बखूबी जिया है। न तो सौरभ की मूंछे किसी बनावटीपन का अहसास दिलाती हैं न ही उनकी लंबाई। पुलिस ऑफिसर की भूमिका में सचिन जोशी फिल्म के हर फ्रेम में पर्दे पर मौजूद हैं। कमजोर अभिनय के बावजूद कई दृश्यों में उनकी अनावश्यक मौजूदगी इस बात की तरफ इशारा कर देती है सचिन ही फिल्म के निर्माता हैं। बड़े दिनों बाद पर्दे पर लौटीं उषा जाधव और लिजा रे का अभिनय बहुत दमदार है। दोनों ने दो किनारे पर बैठी औरतों की भूमिका निभाई है। 

                                                   



   Rudra Bhanu

रूद्र भानु दैनिक भास्कर सहित कई प्रतिष्ठित पत्रिकाओं और चैनलों में पत्रकारिता करने के बाद आजकल मुंबई में फिल्म लेखन और निर्देशन में सक्रिय हैं।.

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