1
 


बाग़ी
बॉक्स ऑफिस के


सब्बीर खान
निर्देशक


संजीव दत्ता
लेखक


























Movie Review
बाग़ी:बॉक्स ऑफिस के लिए बग़ावत


 बाग़ी            

बॉक्स ऑफिस से प्यार के लिए बगावत

 आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रेम को पाने के लिए बागी होना ही सबसे बड़ा मकसद है। इस सोच के साथ गढी गई फिल्म बागी को लेकर लेखक संजीव दत्ता और निर्देशक साबिर खान इस शुक्रवार को हाजिर हुए हैं ।

 व्यावसायिक सिनेमा के लिहाज से निर्देशक साबिर खान ने बहुत अच्छा प्रस्तुतिकरण दिया है, वहीं लेखक संजीव दत्ता ने कोई खास कहानी ना होने पर भी संवादों से फिल्म को कस दिया है। फिल्म में नायक रॉनी के संवाद , अभी तो मैंने स्टार्ट किया है,  गधों को सीखने में टाइम लगता है घोड़ों को नहीं.. .. आदि दर्शकों को तालियां बजाने को मजबूर कर देते हैं।

फिल्म की कहानी है रॉनी (टाइगर श्राफ) और सिया (श्रद्धा कपूर) की। ये जोड़ा केरल में रहता है, दरअसल नायक रॉनी केरल की खास लड़ाई को सीखने के लिए केरल आया हुआ है। ट्रेन यात्रा के दौरान दोनों करीब आते हैं और किस्मत से एक बार फिर टकराते हैं। नायिका को बारिश में भीगना बहुत पसंद है।खासकर जब भी ऱॉनी उससे मिलता है तो बारिश होती है । दौनों तय करते हैं कि अगर इस बार बारिश में टकराए तो समझ लेगें कि वे एक दूसरे के लिए बने हैं। अगली बार भी ऐसा ही होता है और दौनों में प्यार हो जाता है । लेकिन इसी दौरान बैंकॉक में रहने वाले युवा खलनायक राघव (सुधीर बाबू) का आना केरल में होता है । उसे भी एक नजर में सिया भा जाती है और वह सिया के साथ शादी के सपने देखने लग जाता है। । वह सिया के धनलोभी पिता पी पी खुराना (सुनील ग्रोवर ) को मोटी रकम देकर फंसा लेता है। पैसे के मोह में फसंकर पी पी खुराना दौनों की बीच गलतफहमी पैदा कर देता है,  और दौनों युवा प्रेमी बिछुड़ जाते हैं। लेकिन जब सिया राघव से शादी के लिए इंकार कर देती हैं तो राघव उसे उठाकर बैंकॉक ले जाता हैं। यहां एक बार फिर सिया का पिता रॉनी से मदद की गुहार करता हैं। इस पर रॉनी अपने प्यार को लौटाके लाने की खातिर बैंकॉक जाता हैं और लंबी मारधाड़ के बाद फिल्म का सुखांत होता है। 

फिल्म को फ्रेम दर फ्रेम साबिर खान ने इस तरह प्रस्तुत किया कि दर्शक चमत्कृत होते हैं।  फिल्म देखते समय दर्शक, सिया और रॉनी के प्रेम में मिले रामायण के प्रेमरस से खुद को सना हुआ पाते हैं । लेकिन फिल्म देखने के बाद बुद्धिजीवी दर्शकों के मन में कई सवाल खड़े होने लगेंगे ।

मसलन जब नायिका का पिता उसे खलनायक राघव को सौंपना ही चाहता है तो खलनायक द्वारा अपहरण करने के बाद फिर वो नायक के पास दोबारा क्यों पहुंचता है।  फिल्म की शुरुआत में दिखाया जाता है कि एक बच्चा जो गूंगा है उसके इलाज के लिए पैसे की खातिर नायिका के पिता से नायक सौदा करता है लेकिन लंबे लंबे एक्शन सींस को सेट करने में निर्देशक इस बच्चे किरदार को भूल जाते हैं। जबकि टाइगर श्राफ की बच्चा फैन फोलोइंग को देखते हुए ये किरदार अंत में दिखता तो फिल्म का संपूर्ण प्रभाव और असरदार होता ।  

कई कारणों की वजह से लेखक- निर्देशक की नीति साफ हो जाती है कि उन्हें सिर्फ अपने निर्माता के लिए बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन करने वाली एक फिल्म बनानी है।  फिल्म में कई संगीतकार हैं जिन्होंने अपने ट्रैक पेश किए हैं। फिल्म के दो गाने इन दिनों विभिन्न काउंटडाउन की रेस में हैं।  खासकर गीत, सब तेरा की लोकप्रियता तो इतनी हो गई हैं कि गाने के आते हीं दर्शक झूमने लगते हैं।

पर्दे पर मारधाड़ और एक्शन सींस में टाइगर खूब फबते हैं पर जहां भावप्रवण अभिनय की बात आती है वहां बेहद कमजोर साबित होते हैं। अभिनय के लिहाज से श्रद्धा कपूर ठीक ठाक हैं।

बागी के सामने कोई बड़ी फिल्म नहींं होने के कारण और युवापीढ़ी के लिए खूब मसाला होने की वजह से फिल्म की सफलता में दोराय नहींं है।

अगर आप बॉलीवुड मसाला मूवी देखने के शौकीन हैं तो ये फिल्म आपको निराश नहींं करेगी। बेखटके आप इस सप्ताह प्यार के लिए बागी हो सकते हैं।

            धर्मेंद्र उपाध्याय



   धर्मेन्द्र उपाध्य

पिछले सात साल से पिंकसिटी जयपुर के पत्रकारिता जगत के साथ रंगमंच और राजस्थानी सिनेमा में सक्रिय रहे युवा पत्रकार धर्मेंद्र उपाध्याय बतौर फिल्म पत्रकार काम करते हुए कई डॉक्यूमेंट्री फिल्मों का लेखन-निर्देशन कर चुके हैं। धर्मेंद्र उपाध्याय इन दिनों मुंबई स्क्रीन राइटर के रूप में सक्रिय हैं। .

Click here to Top