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Wedding Pullav
पुलाव कम खिचड़ी ज्यादा


बिनोद प्रधान
निर्देशक


पूजा वर्मा
लेखिका


























Film Review
Wedding Pullav:पुलाव कम खिचड़ी ज्यादा


 वेडिंग पुलाव
पुलाव कम खिचड़ी ज्यादा

कलाकार: अनुष्का रंजन, दिगनाथ मछाले, सोनाली सहगल, करन ग्रोवर, ऋषि कपूर, सतीश कौशिक, उपासना सिंह, परमीत सेठी, किटु गिडवानी, हिमानी शिवपुरी

निर्देशन : बिनोद प्रधान

निर्माता : शशि रंजन

लेखक : पूजा वर्मा

संगीत : सलीम-सुलेमान

गीत : इरफान सिद्दिकी

‘मुन्नाभाई’, ‘एमबीबीएस', 'रंग दे बसंती', 'देवदास', '2 स्टेट्स', 'भाग मिल्खा भाग' जैसी फिल्मों को अपने सिनेमेटोग्राफी के जरिये परदे पर उतारने के बाद फिल्म इंडस्ट्री मशहूर सिनेमॅटोग्राफर्स बिनोद प्रधान ने पहली बार निर्देशक में हाथ आजमाया है। फिल्म वेडिंग फुलवा में विनोद ने निर्देशन का जायका डालने की पूरी कोशिश की है। मगर कहानी पर पकड़ पुख्ता नहीं है। कभी लगता है कि कहानी का सेंट्रल आइडिया प्यार है... नहीं दोस्ती है....नहीं... कभी दोस्ती तो कभी प्यार... शायद दोनों ही है... बस इसी उलझन में पूरी फिल्म उलझ कर रह जाती है। फिल्म देखने पर एक बात तो साफ हो जाती है कि यह फिल्म अनुष्का रंजन को लॉन्च करने के लिए बनाई गई है। इसलिए फिल्म के हर हिस्से में सिर्फ और सिर्फ अनुष्का ही नजर आती हैं। कई मर्तबा यह लगने लगता है कि कहीं इस फिल्म के जरिये अनुष्का का पोर्टफोलियो तो नहीं तैयार किया जा रहा है। कहानी से लेकर स्क्रिप्ट का हर मोड अनुष्का के इर्द-गिर्द ही घूमता है। मजे की बात यह है कि निर्माता लांचिंग में कोई रिस्क नहीं लेना चाहता इसलिए अनुष्का का नाम भी नहीं बदला गया है। इसका असर यह है कि दिगंत, मनचले, सोनाली सहगल और करण ग्रोवर के किरदार अनुष्का के सामने सेकेन्डरी नजर आते हैं।

  इस पुलाव की रेसिपी यानि कहानी कुछ यूं है फिल्म का हीरो आदि (दिगनाथ मछाले) की सगाई रिया (सोनाली सहगल) से होने वाली होती है। लेकिन आदि और उसके दोस्तों को इंतजार है लंबू का। अनुष्का उर्फ लंबू (अनुष्का रंजन) लंदन से आदि की सगाई में शिरकत करने आयी है, जिसके आते ही पार्टी में रौनक आ जाती है। पर दोनों कि लाइफ में केमिकल लोचा शुरू हो जाता है। यहीं दोनों को इस बात का अहसास होता है कि दोनों सिर्फ दोस्त नहीं हैं। फिर शादी की रश्मों के बीच प्यार परवान चढ़ता है और ऐसा कुछ भी नया नहीं होता जिसे दर्शक सोच नहीं सकते। आदि और अनुष्का के बीच प्रेम का अंकुर जिस ढंग से फूटता है वो काफी हास्यास्पद लगता है और ये मुश्किल जिस ढंग से सुलझती है, उससे झुंझलाहट और हंसी दोनों आती है।

 फिल्म में पारंपरिक भारतीय यानी हिंदू विवाह-पद्धति के कई दृश्य हैं। लेकिन यह बात नहीं पचती की शादी थाईलैंड में हो रही है आदि और अनुष्का गाने गाते-गाते दुबई चले जाते हैं। शायद सिनेमोटोग्राफी के चक्कर में बिनोद प्रधान लोकेशन का व्याकरण भूल गए हैं। फिल्म में कहानी के स्तर में कोई नयापन नहीं है। इसलिए दर्शक थाईलैंड नजारों से अपना मनोरंजन करने कि कोशिश करते हैं। अभिनय के स्तर पर अनुष्का को जितना मौका मिला है उसके अनुरूप वह अपने आप को साबित नहीं कर पाई हैं। हां स्‍क्रीन पर वह अच्‍छी लगती हैं और अपनी लंबाई और अभिनय के साथ तालमेल बैठना उन्हें आता है। छोटे– से रोल में ऋषि कपूर ने अहम किरदार निभाया है। साथ ही हिमानी शिवपुरी, सोनाली सहगल, परमीत सेठी और बाकी कलाकारों ने भी अच्छा काम किया है। फिल्म के अंत में दर्शक को यह बात समझ में आ जाती है कि यह सिर्फ नाम का पुलाव है न तो इसमें पुलाव का जायका है न मसालों की सोंधी खुशबू... यानि यह पुलाव कम खिचड़ी ज्यादा नजर आता है...  

   

 

    



   रुद्रभानु प्रताप स

रूद्र भानु दैनिक भास्कर में कुछ साल पत्रकार और समीक्षक रह चुके हैं और आजकल मुंबई के प्रिंट media में सक्रीय हैं .

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