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पटना से पाकिस्तान
टा टा बाय बाय


संतोष मिश्रा
Writer - Director


























Film Review
पटना से पाकिस्तान :टा टा बाय बाय


पटना से पाकिस्तान
नाम बड़े और दर्शन छोटे

लेखक-निर्देशक  : संतोष मिश्रा

गीत : प्यारेलाल यादव

संगीत : राजेश - रजनीश

निर्माता : अनंजय रघुराज

कलाकार :    दिनेश लाल यादव, काजल रागवानी, आम्रपाली, सुशील सिंह, संजय पांडे,

मनोज टाइगर, दीपक सिन्हा, प्रकाश जैस, गोपाल राय, ब्रजेश त्रिपाठी आदि

“पटना से पाकिस्तान” का ट्रेलर देखकर अंदाजा हुआ था कि यह आम भोजपुरी फिल्मों से अलग है, लेकिन आज पूरी फिल्म देखने पर पता चला कि यह तो वैसी ही है, जैसी फिल्मों के चलते भोजपुरी फिल्में अक्सर चर्चा में रहती हैं. संतोष मिश्रा भोजपुरी फिल्मों के बड़े लेखक के तौर पर जाने जाते हैं, लेकिन इस फिल्म में उनका कोई बड़प्पन नहीं दिखता.  टाइटिल अच्छा है, ‘पटना से पाकिस्तान’. लेकिन फिल्म की कहानी में कोई ऎसी बात या मोड़ नहीं है, जिसके चलते यह फिल्म विशेष कहलाए. कहानी संतोष मिश्रा ने लिखी है. फिल्म की शुरुआत में तो कहानी भी नहीं है, बस जैसे-तैसे भोजपुरी फिल्मों के कुख्यात मसालों के सहारे फिल्म आगे बढ़ती है और बढ़ते-बढ़ते इंटरवल आ जाता है. इंटरवल के बाद कहानी पाकिस्तान चली जाती है. बस संवाद के सहारे ही पाकिस्तान जाती है, और फिर बेहद फिल्मी तरीके से फिल्म बदले की परिणति तक पहुँचती है.  

नायिका काजल, दिनेश लाल यादव से प्यार करती है. मगर आतंकवादियों द्वारा किए गए बम धमाकों में उसका और दोनों के परिवार की दर्दनाक मौत हो जाती है. नायक दिनेश को पता चलता है यह बम धमाका पाकिस्तानी आतंकवादियों द्वारा किया गया था, वह बदला लेने के लिए पाकिस्तान जा पहुँचता है. उसके साथ, उसके दो दोस्त और एक बाल कलाकार भी जाते हैं. वहाँ आतंकवादियों से भिड़ंत के दौरान पाकिस्तानी लड़की से उसका प्यार हो जाता है और फिर सारे आतंकवादियों को मार नायक नायिका और बाल कलाकार के साथ भारत आ जाता है. उसके साथी इस दौरान मारे जाते हैं.

फिल्म की कहानी जितनी बचकानी है, पटकथा उससे भी अधिक बचकानी है. इस बात का अन्दाजा इसी दृश्य से लगा लीजिए कि श्रृंखलाबद्ध बम धमाके हुए और थाने में आराम करते दारोगा के पास बाल कलाकार इसकी रिपोर्ट लिखवाने आता है उसपर से दारोगा यह कहकर रिपोर्ट लिखने से इंकार करता है कि पाकिस्तानी आतंकवादियों ने बम धमाके किए हैं इसलिए पुलिस इसमें कुछ नहीं करेगी. तब वह बाल कलाकार थाने में सबके सामने सुसु कर देता है कि यह थाना नहीं पेशाबखाना है. फिल्म में ऎसे ही ऊलजलूल दृश्यों की भरमार है. कथा में न तो कोई तथ्यपरक घटना और मोड़ है और न ही पटकथा में सिनेमा का कोई प्रभावी शिल्प. संवाद में भी कोई गंभीरता नहीं है. पाकिस्तान के खिलाफ जो बेमतलब के भावनात्मक संवाद हैं, उन्हें हटा दिए जायँ, तो यह आम बदले वाली भोजपुरिया फिल्म है. संवाद में ओछी शब्दावली का खूब इस्तेमाल है. पाकिस्तानी चरित्रों के साथ फिल्म के संवाद भोजपुरी के बजाय उर्दू में हैं. और उन दृश्यों में हिन्दी फिल्म ‘गदर’ का सतही असर है. (कॉपी नहीं है). एक्शन खूब है, दिनेश लाल यादव को सन्नी देओल से भी ज्यादा ताकतवर दिखाया गया है. 

सारे गीत प्यारेलाल यादव ने लिखे हैं. आइटम साँग भी हैं और रोमांटिक साँग भी. फिल्म की शुरुआत का देशभक्ति गीत अच्छा है. संगीतकार राजेश रजनीश के गीतों पर हिट हिन्दी गानों का असर है, मगर आम भोजपुरी से अलग हैं. कानों को अच्छे लगते हैं.

कलाकारों में दिनेश लाल यादव हों या मनोज टाइगर या सुशील सिंह, सब अपने ही चरित्र में हैं. संजय पांडे इस बार अलग हैं. प्रकाश जैस ने भी छोटे से रोल में प्रभावित किया है. दोनों हीरोइनें अच्छी लगती हैं. ताजगी है.

निर्देशक संतोष मिश्रा प्रभावित करते हैं. टेकिंग-मेकिंग में भोजपुरी फिल्मों के स्तर को ऊपर उठाया है. अगर स्क्रिप्ट अच्छी होती, तो बेशक यह फिल्म भोजपुरी की उल्लेखनीय फिल्मों में शामिल होती.

धनंजय कुमार



   Dhananjay Kumar

Dhananjay Kumar is a Writer of Bhojpuri & Hindi (Films and TV Show).

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