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International Daroga
लोकल कहानी


























Film Review
इंटरनेशनल दरोग:लोकल कहानी


भोजपुरी फिल्म

इंटरनेशनल दरोगा
लोकल कहानी

 

कथा : नवाब आरजू

पटकथा : तन्मय सेनगुप्ता

संवाद : तेजेश अखौरी

गीत : नवाब आरजू, विनय बिहारी और विपिन बहार

निर्देशक : तेजेश अखौरी

निर्माता : तन्मय सेनगुप्ता

कलाकार : शत्रुघ्न सिन्हा, शीबा, मनोज तिवारी, श्रद्धा शर्मा, शीला शर्मा, हरिशरण, शक्ति

कपूर, खरबंदा, दिलीप सिन्हा आदि

 

मुंबई में इस सप्ताह ‘इंटरनेशनल दरोगा’ नाम की भोजपुरी फिल्म रिलीज हुई है. हमारे देश में दारोगा तो राज्य स्तर का ही होता है, लेकिन इस फिल्म में दारोगा इंटरनेशनल स्तर का है. कैसे..? यह तो कथाकार नवाब आरजू ही बता सकते हैं. नवाब आरजू हिन्दी फिल्मों के अच्छे गीतकार हैं. कई हिन्दी फिल्मों की स्क्रिप्ट भी लिखी है, लेकिन इस फिल्म की कहानी लिखते वक्त उन्होंने बिल्कुल ही अपने स्किल का इस्तेमाल नहीं किया है. इसलिए कहानी में कोई नयापन नहीं है. कहानी चालू और पूरी तरह फिल्मी है. धरातल से जरा भी वास्ता नहीं है.

मनोज तिवारी के बड़े भाई एक्जीक्यूटिव इंजीनियर हैं, ईमानदार है, इसलिए ठेकेदार उनकी हत्या करवा देता है और मनोज तिवारी पर ही हत्या का इल्जाम मढ़वा देता है. भाभी शीला पागल हो जाती है. मनोज अपराधी बन जाता है, इंटरनेशनल दरोगा यानी शत्रुघ्न सिन्हा की उस इलाके में पोस्टिंग होती है. दरोगा को मनोज तिवारी के बारे में हकीकत एक डॉक्टर महिला बताती है और फिर विलेन ठेकेदार को उसके किए की सजा मिलती है.

इस बासी और अनमने मन से बनाई गई कहानी पर पटकथा तन्मय सेनगुप्ता ने लिखी है. तन्मय ने अपना समय कहानी पर कम विलेन के मजे के लिए अधनंगी लड़कियों का नाच दिखाने में ज्यादा खर्च किया है. हीरो के साथ इतनी बड़ी साजिश होती है, उसके भाई की हत्या कर दी जाती है, भाभी के साथ उसके अनैतिक संबंध का आरोप लगाया जाता है, गबन के आरोप में उसकी नौकरी छीन ली जाती है (सब एक ही सीन में हो जाता है), मगर हीरो बदला के लिए क्लाइमेक्स का इंतजार करता है. उसमें भी उसका साथ देने के लिए खरबंदा और इंटरनेशनल दरोगा शत्रुघ्न सिन्हा हैं. पटकथा में एक नहीं, अनेक झोल हैं. कोई भी दृश्य विश्वसनीयता को छू नहीं पाया है. इसलिए फिल्म में न गुस्सा उभर पाया है, न इमोशन, न रोमांस और न ही नाच गाना. फिल्म के संवाद निर्देशक तेजेश अखौरी ने ही लिखे हैं, मगर निष्प्रभावी है. भर्ती के संवाद हैं. अब चरित्र हैं, तो कुछ तो बोलेंगे ही.

इस फिल्म के रिलीज होने में कई साल लग गए. इसका भी फिल्म पर बुरा असर पड़ा है. शत्रुघ्न सिन्हा और मनोज तिवारी, दोनों स्टारों की आवाज अपनी नहीं है, डबिंग आर्टिस्ट ने डब की है. फिल्म पर इसका भी दुष्प्रभाव है.

गीत नवाब आरजू, विनय बिहारी और बिपिन बहार ने लिखे हैं. अश्लील नहीं हैं, लेकिन याद रखने लायक भी नहीं हैं. गीतों को दुर्गा नटराज ने संगीतबद्ध किया है. भोजपुरी के कुछ हिट गानों की धुनें चुराकर हिट गीत बनाने की कोशिश की है, मगर....

कोई भी अभिनेता अपना प्रभाव नहीं छोड़ पाते. समझ में नहीं आता शत्रुघ्न सिन्हा जैसे मंजे हुए अभिनेता ने ऎसा रोल क्यों स्वीकार किया? खरबंदा का किरदार तो समझ में भी नहीं आता है कि कौन है, कहाँ से आया, क्यों आया? श्रद्धा शर्मा के जिम्मे भी कोई काम नहीं है, बस नाम की हीरोइन है. शीबा पर सेंसुअस गीत फिल्माया जाना भी गन्दा लगता है. कुल मिलाकर निर्देशक तेजेश अखौरी अपनी योग्यता दिखाने में पूरी तरह असफल रहे हैं.

धनंजय कुमार  

 

 



   धनंजय कुमार

Dhananjay Kumar is a Writer of Bhojpuri & Hindi (Films and TV Show).

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