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हुकूमत
पूछिये मत ...!!


























Film Review
हुकूमत:पूछिये मत .... :(


भोजपुरी फिल्म समीक्षा

हुकूमत : पूछिये मत !!!  sad

लेखक : एस के चौहान

गीतकार : प्यारेलाल यादव, मनोज मतलबी एवं आजाद सिंह

संगीत : अविनाश झा (घुंघरू)

निर्देशक : अरविन्द चौबे

निर्माता : प्रेम राय

कलाकार : पवन सिंह, अरविन्द अकेला ‘कल्लु’, काजल राघवानी, तनुश्री, संजय पांडे, माया यादव, विनोद मिश्र, सलिल सुधाकर आदि.

मुंबई के सिनेमाघरों में इस सप्ताह भोजपुरी फिल्मों की कड़ी में ‘हुकूमत’ नामक फिल्म रिलीज हुई है. बिल्कुल आप सही सोच रहे हैं हुकूमत भोजपुरी टाइटिल नहीं है, अगर हुकूमत ही रखना था तो भोजपुरी में इसे ‘जागीर’ टाइटिल दिया जा सकता था.  भोजपुर इलाके में बोला जानेवाला शब्द है यह.  बहरहाल, सालों पहले 1987 में आई अनिल शर्मा की हिन्दी फिल्म ‘हुकूमत’ से इसका कोई संबंध नहीं है. फिल्म की कहानी 1995 में रिलीज हुई राकेश रोशन की सुपरहिट हिन्दी फिल्म ‘करण-अर्जुन’ से जरूर इसका संबंध है. लेखक ने इस फिल्म की कथा करण-अर्जुन देखकर ही लिखी है ऐसा लगता है. किंतु करण-अर्जुन जैसी रोचक फिल्म नहीं बन पाई है.

पटकथा में करण-अर्जुन जैसा शिल्प नहीं है. करण- अर्जुन में माँ की भूमिका बेहद अहम थी, लेकिन यहाँ माँ गौण कर दी गई है. लिहाजा फिल्म की गति और दिशा ही बदल गई है. करण-अर्जुन में माँ के एंगल से कहानी है. विलेन ने उसके पति और बेटों की क्रूरतापूर्ण हत्या कर दी है. माँ कमजोर है, वह बदला नहीं ले सकती, मगर उसे यकीन है कि उसके बेटे जरूर बदला लेने आएंगे, और वे आते भी हैं. हालाँकि इस फिल्म के लेखक एस के चौहान ने पुनर्जन्म का ट्रैक छोड़ दिया है, लेकिन साथ ही जाने-अनजाने माँ के बदले की कहानी की वो आक्रोश भरी इमोशनल डोर भी छूट गई है, जो डोर करण-अर्जुन को बाँधे रखती है. कहानी के विस्तार में लेखक उतने गहरे नहीं उतर पाए हैं, जितनी गहराई करण-अर्जुन के लेखकों ने दी थी. लेखक एस के चौहान ने पटकथा पर बिल्कुल ही मेहनत नहीं की है. इस वजह से पटकथा बेहद सपाट तरीके से चलती है. दृश्य दर दृश्य फिल्म आगे बढ़ती जाती है, लेकिन कोई जिज्ञासा, तनाव और लगाव प्रकट नहीं कर पाती. अच्छा यह जरूर है कि फिल्म में फूहड़ता नहीं है. हालाँकि हीरोइनें सिर्फ रोमांस करने और बिना सिचुएशन के भी गीत गाने के लिए हैं, लेकिन उसकी देह से पैसा दुहने की कोशिश नहीं है, जैसा कि आमतौर पर इस दौर की भोजपुरी फिल्मों में दिखा करती है. एस के चौहान ने संवाद पटकथा से बेहतर लिखे हैं. लिखने की कोशिश दिखती है.

भोजपुरी फिल्मों की बड़ी दिक्कत यह है कि इसके लेखक मौलिक कहानी गढ़ने की कोशिश तो नहीं ही करते हैं, पटकथा के स्तर पर भी वह भोजपुरी परिवेश और पृष्ठभूमि को पिरो नहीं पाते हैं, लिहाजा भोजपुरी दर्शकों के साथ उनका अपनापन वाला संबंध नहीं बन पाता. फिल्म या तो सी ग्रेड हिन्दी फिल्म बन जाती है या फिर हीरोइन की देह के इर्द-गिर्द घूमती फूहड़ फिल्म. भोजपुरी लेखकों को यह घेरा तोड़ना होगा, तभी भोजपुरी फिल्में अपने वजूद को बनाए रख सकेंगी. एस के चौहान में बतौर लेखक वह संभावनाएँ दिखती हैं.   

करण अर्जुन की गुणवत्ता में गीत-संगीत का बड़ा भारी योगदान था, लेकिन यहाँ यह भी निष्प्रभावी है. ठीक-ठीक कहें, तो बोरियत और चिढ़ पैदा करते हैं. गीत प्यारेलाल यादव, मनोज मतलबी और आजाद सिंह ने लिखे हैं. एक रोमांटिक गीत को छोड़कर गीतकारों की मंशा द्विअर्थी बोलों वाले गीत लिखकर दर्शकों को खुश करने की ही कोशिश है, लेकिन फिल्म की पटकथा चूँकि हीरोइन की देह के आसपास घूमने के बजाय बदले की कहानी को कहती है, इसलिए ऎसे गीत अच्छे नहीं लगते. गीतकार अच्छे गीत लिख सकते थे, उनके लिए बेहतर अवसर भी था, लेकिन नहीं लिखे. अविनाश झा घुंघरू का संगीत दोहरावों से भरा और बेहद चलताऊ है. करण अर्जुन में गीत-संगीत फिल्म के बेहद प्रभावी और मजबूत पक्ष थे, लेकिन इस फिल्म में सबसे कमजोर कड़ी हैं. क्लाइमेक्स से ठीक पहले डाले गए कल्लु और तनुश्री के रोमांटिक गीत ने तो और भी मजा किरकिरा कर दिया है.

अरविन्द अकेला को जरा भी अभिनय नहीं आता और न ही बेहतर करने की कोई ललक दिखती है उसमें. न तो चेहरे के भाव बदलते हैं और न ही संवाद की अदायगी में उतार-चढ़ाव आ पाते हैं. पवन सिंह बेहतर कर सकते थे, मगर वह अपनी सफलता से इतने आत्ममुग्ध हो गए हैं कि और बेहतर करने की कोशिश तक नहीं करते. सलमान की तरह दिखने और वैसा ही एक्शन सीन करने की उनकी चाहत अगर इसी तरह बनी रही, तो बहुत जल्द वह भी निबट जाएँगे. फिल्म दर फिल्म बेहतर करने के बजाय वह अपने आपको रिपीट कर रहे हैं. हीरोइनें नई है, लेकिन दोनों में आगे बढ़ने की संभावनाएँ हैं. सलिल सुधाकर छोटे से रोल में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा देते हैं. संजय पांडे संवाद बोलने के अलावा कहीं और जौहर दिखाने की जगह पटकथा में नहीं थी, लेकिन संवाद अदायगी भी दोहराव से भरी है.

धनंजय कुमार



   धनंजय कुमार

Dhananjay Kumar is a Writer of Bhojpuri & Hindi (Films and TV Show).

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