1
 


Latkhor
गड़बड़ टाइटिल


Ajay Srivastava
Writer - Director


Santosh Mishra
Writer


























Film Review
Latkhor (Bhojpuri):कुली नं वन से प्रेरित


भोजपुरी फिल्म समीक्षा

लतखोर  : गड़बड़ टाइटिल

कथा         :     अजय श्रीवास्तव

पटकथा      :     अजय श्रीवास्तव, नन्हें यादव और संतोष मिश्रा

संवाद        :     संतोष मिश्रा

गीत         :     प्यारेलाल यादव

निर्देशक      :     अजय श्रीवास्तव

निर्माता            :     अभिषेक कुमार

कलाकार : खेसारी लाल यादव, मोनालिसा, गौरीशंकर, अनूप अरोड़ा, राजप्रेमी आदि

 

टाइटिल जितना गड़बड़ है, फिल्म उतनी बुरी नहीं है. शुरुआती तीन गानों के बोल हालाँकि आम भोजपुरी फिल्मी गानों की तरह ही द्विअर्थी हैं और पिक्चराइजेशन फूहड़ हैं, मगर बाद के तीन गाने अच्छे हैं. गीतकार प्यारेलाल यादव ने ही गंदे गाने भी लिखे हैं और अच्छे गाने भी. राजेश रजनीश ने हालाँकि धुनें हिन्दी के हिट गानों से उठाकर बनाई हैं, लेकिन फिल्म में अच्छे लगते हैं, पिक्चराइजेशन भी बढ़िया है.. पहले के तीन गानों को निर्देशक अजय श्रीवास्तव अश्लील होने से बचा लेते, तो फिल्म घरेलु दर्शकों के देखने लायक भी बन जाती.

फिल्म की कथा स्वयं निर्देशक अजय श्रीवास्तव ने लिखी है. मौलिक नहीं है, गोविन्दा-डेविड धवन की अलग-अलग फिल्मों से उड़ाई गई है. मूलकथा १९९५ में रिलीज़ हुयी हिट फ़िल्म कुली नं. वन* से प्रेरित है और फिर उसी तरह की और फिल्मो से मसाला उठाकर पटकथा मसालेदार बन गई है. पटकथा में अजय श्रीवास्तव ने दो और लेखकों- संतोष मिश्रा और नन्हें पांडेय का साथ लिया है. पटकथा कमाल की तो नहीं है, लेकिन आम भोजपुरी फिल्मों की तुलना में बेहतर है. मगर तीनों पटकथा लेखक कैरेक्टराइजेशन करने में चूक गए हैं... खासकर हीरोइनों के पिता भिखारी सिंह (गौरीशंकर) और विलेन प्रीतम-प्यारे के कैरेक्टर में बड़ा कंफ्यूजन है, वे कॉमेडियन हैं या सीरियस कुछ स्पष्ट नहीं हो पाया है...तीनों चरित्र हास्यास्पद लगते हैं....

संतोष मिश्रा के संवाद याद रखने लायक तो नहीं, मगर फिल्म देखे जाने वक्त सुने जाने लायक जरूर हैं. फूहड़ संवाद नहीं लिखने के लिए संतोष मिश्रा को बधाई!

कथा कुछ इस तरह है कि सन्नी (खेसारी लाल) और बॉबी (नाम नहीं मालूम) दोनों ठग हैं, लतखोर हैं. इसी दौरान दोनों की मुलाकात चुटिया पांडे (अनूप अरोड़ा) से होती है. चुटिया पांडे दो जवान लड़कियों के बाप भिखारी सिंह से थप्पड़ का बदला लेने के लिए इन दोनों लतखोरों को हथुआ हाउस के राजकुमार के तौर पर मिलवा देता है... पहले दोनों लड़कियाँ दोनों को भगाने के उपाय आजमाती हैं, लेकिन हर बार मात मिलने के बाद दोनों लतखोरों से प्यार करने लगती हैं. इस बीच, पिता को पता चलता है कि ये दोनों राजकुमार नहीं, लतखोर हैं, तो उनसे पीछा छुड़ाने के लिए वह दो बदमाश से बेटियों का रिश्ता तय कर देते हैं. क्यों..? यह तो कहानी लिखने वाले ही जानें, मुझे समझ में नहीं आया. दूसरी तरफ सन्नी-बॉबी को बहन के दिल के ऑपरेशन के लिए 50 लाख रुपए की जरूरत होती है. (50 लाख बहुत ज्यादा है यार) वे मेहनत करके रुपए जमा करने का प्रयास करते हैं, लेकिन जल्द ही समझ में आ जाता है, असंभव काम है. और उन्हें आइडिया आता है कि हीरोइन के बाप से माँग लिया जाय. हीरोइन का बाप तुरंत सौदा कर लेता है कि बेटियों के जीवन से दूर चला जाय, फिर कीमत के तौर पर 50 लाख दे देंगे. (पटकथा में यहाँ बड़ा झोल है) खैर, 50 लाख लेते हुए प्रेमिकाएँ देख लेती हैं और गुस्से में तमाचा मार देती हैं. बहन को पता चलता है कि भाइयों ने उसकी खातिर अपने प्यार का बलिदान किया है, इसलिए बहन भाई की प्रेमिकाओं के घर आती है और उसके पिता से प्यार वापस देने के लिए निहोरा करती है. यह बात प्रेमिकाएँ सुन लेती हैं और फिर वह प्यार के लिए पिता से बगावत कर देती हैं...

खेसारीलाल यादव बिल्कुल ही अभिनेता नहीं है, गोविन्दा की नकल करने की कोशिश में वह पूरा ही गुड़ गोबर कर देता है. फिर भी स्टार बना है, इसलिए निर्देशक के नियंत्रण से पूरी तरह बाहर दिखता है. दूसरा लड़का तो और नीम पर चढ़ा करैला है. मोनालिसा में कोई नयापन नहीं बचा है. दूसरी लड़की फ्रेश लगती है, मगर मोनालिसा की कॉपी करती नजर आई है पूरी फिल्म में. हालाँकि उसे अलग मौका भी नहीं मिला.

 

धनंजय कुमार       

 

कुली नं वन भी १९९३ की हिट तमिल फ़िल्म Chinna Mapillai की रीमेक थी.



   Dhananjay Kumar

Dhananjay Kumar is a Writer of Bhojpuri & Hindi (Films and TV Show).

Click here to Top