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राम मीरचंदानी


विक्रमादित्य मोटवानी



श्रीधर राघवन

Questions & Answers:
अपनी कहानी को कैसे पिच करें
-पिचिंग से जुड़े अहम सवालों पर चर्चा सत्र


नोट - ये कार्यशाला अंग्रेज़ी में हुई थी जिसका विडियो और ट्रांसक्रिप्ट निम्न लिंक पर क्लिक करके देखा जा सकता है. ये हिंदी अनुवाद हमारे सदस्यों की मांग पर उनकी सुविधा के लिया किया गया है. हमे खेद है विडियो footage का हिंदी अनुवाद नहीं किया जा सकता है |

http://www.fwa.co.in/qnatemplate.php?get=FWAqna2

२३ मार्च २०१५ को FWA के ऑफिस में कहानी कैसे pitch करें इस विषय पर एक प्रश्न – उत्तर स्वरुप कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमे काफ़ी तादाद में सदस्यों ने हिस्सा लिया.

लेखक गणों का मार्गदर्शन किया फ़िल्म और टीवी जगत के तीन मशहूर हस्तियों ने..

 

श्री राम मीरचंदानी – आप आजकल एंडेमोल में बतौर COO कार्यभार संभाल रहे हैं और पहले भी बड़ी बड़ी स्टूडियोज के लिए फ़िल्म निर्माण का काम देख चुके हैं | आप कई वर्षों से लेखकों और निर्देशकों के pitches सुनते-परखते आ रहे हैं और इस कार्यशाला में पिचिंग को लेकर एक निर्माता का क्या दृष्टिकोण होता है इस पर प्रकाश डालेंगे|

श्री श्रीधर राघवन – पिचिंग कैसे की जाती है इस विषय पर इंडस्ट्री में किसी से पूछे तो वो आपको शायद श्रीधरजी का ही नाम बताएगा| फ़िल्मों और टीवी में लम्बे अनुभव से लैस पिचिंग के जानेमाने उस्ताद श्रीधरजी ऐसे शख्स जो शायद आपकी कहानी को आपसे भी बेहतर pitch करके बताये.

श्री विक्रमादित्य मोटवानी – विक्रमजी ने अपना करियर एक लेखक निर्देशक के रूप में शुरू किया जब वो खुद अपनी स्क्रिप्ट्स pitch किया करते थे और आज वो स्वयं एक निर्माता भी है जो औरों के pitches को सुनते परखते है| इतनी कम समय में उन्होंने मेज़ के दोनों और कम करने का पुख्ता तजुर्बा हासिल किया है जो वो आज हमारे सदस्यों के साथ साँझा करेगें|

 

FWA के महासचिव श्री कमलेश पाण्डेयजी की प्रस्तावना -

एक अच्छी कहानी या स्क्रिप्ट लिखने के बाद हमारा अगला कदम क्या होना चाहिए?इसे कैसे सही हाथों तक पहुंचाया जाय।लेखकों के लिए यह बेहद अहम सवाल बन जाता है। 80 और 90 के शुरुआती दशकों में मैंने खुद इस बात का अनुभव किया है। उस समय मैंने सिर्फ तीन फिल्में ही की थीं और एक वरिष्ठ लेखक से साथ काम करता था। स्क्रिप्ट लिखने के लिए हम लोग जुहू होटल में बैठते थे। स्क्रिप्ट लिखने के लिए जैसे आजकल आप लोग मीटिंग करते हैं वैसे ही उन दिनों हम स्क्रिप्ट पर बैठा करते थे। आपको सुनते हुए अजीब लग रहा होगा ‘स्क्रिप्ट पर बैठना’ पर उन दिनों यही कहा जाता था. खैर, एक दिन एक बड़ा ही दिलचस्प वाकया हुआ जब हम बाथरूम गए तो हमने देखा कि एक बड़े मशहूर निर्देशक वहां फ्रेश हो रहे थे। हाल ही में इस निर्देशक की एक सुपर हिट फिल्म रिलीज हुई थी। मेरे दोस्त ने सोचा की यही अच्छा मौका है और वह उनके बगल में जा कर निवृत होने खड़े हो गए। जब तक की निर्देशक अपना bladder हल्का करते मेरे दोस्त ने अपना दिल हल्का कर लिया,केवल दो मिनट में तीन कहानियां सुनाकर। मैं तो अचंभित रह गया क्योंकि मेरे लिए तो ऐसा करना बिल्कुल असंभव था। ये हालत और ये होड़।

हां मगर यह भी सही है कि प्रतिस्पर्धा के इस दौर में सफलता के लिए अपने काम और अपने व्यक्तित्व की मार्केटिंग करना बहुत जरूरी है। इसीलिए हमने इस महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया है ताकि हमारे सदस्य स्टोरी पिचिंग के गूढ़ रहस्यों को समझ सकें।

मुझे लगता है कि इसके लिए सबसे महत्वपूर्ण आपका आत्मविश्वास है। जब आप किसी को पिच करने के लिए जा रहे हैं तो उससे डरने की बिलकुल भी जरूरत नहीं है। हमें हमेशा इस बात का ध्यान रखना चाहिए वे वहां सिर्फ और सिर्फ हमारी वजह से हैं। अगर आप नहीं लिखेंगे तो उन्हें कोई नहीं पूछेगा। इसलिए यह कभी मत भूलिए किआप बहुत महत्वपूर्ण हैं। क्योंकि एक साइलेंट फिल्म बनाने के लिए भी उन्हें एक स्क्रिप्ट की जरूरत पड़ेगी।          

आज हर तरह केलोग लेखकबनाना चाहते हैं। अभिनेता और निर्माता भी इसका हिस्सा बनाना चाहते हैं। जब ये लोग सदस्य बनने के लिए आवेदन करते हैं तो मुझे आश्चर्य होता है। यह सब सिर्फ इसलिए है क्योंकि लेखकों के पास लेखन की विशेष योग्यता है और यही हमारे सम्मान की वजह भी है। इसलिए पूरे आत्मविश्वास के साथ जाइए। यह सोच कर नर्वस होने कि जरूरत नहीं है कि सामने वाला कैसा है। क्योंकि उसकी नौकरी भी हमारे ऊपर ही टिकी है। अगर वे किसी गलत फिल्म या प्रोजेक्ट पर दाव लगाते हैं तो उन्हें बड़ा नुकसान हो सकता है। उन्हें पूरी तरह से इस बात का खयाल रखना पड़ता है कि जिस स्क्रिप्ट को वे चयन कर रहे हैं वो उनके कंपनी के लिए फायदेमंद हो। बेशक, किसी के काम का परीक्षण करना बहुत कठिन है पर जब आपको अपने काम पर पूरा भरोसा है तो फिर चिंता किस बात की।

यकीन मानिए मैंने औसत दर्जे के लेखकों को और कभी-कभी तो बुरे बुरे  लेखकों को बड़े अच्छे ढंग से बुरी कहानियों को बेचते देखा है।पर दुर्भाग्य से यह बात भी सही है कि अधिकांश अच्छे लेखक अच्छे पिचर नहीं होते हैं। उन्हें इस बात का जरा भी इल्म नहीं होता है कि कहानी को कैसे बेचा जाता है। यदि अच्छे लेखकों को अच्छे पिचर के रूप में प्रशिक्षित किया जाय तो इससे बेहतर और क्या हो सकता है। इसलिए मुझे पूरी उम्मीद है कि आपलोग इस सेशन को पसंद करेंगे।

सबसे पहले मैं आप लोगों को पैनल का परिचय करा दूँ।हमारे पहले पैनलिस्ट राम मीरचंदानी जी है। इनके पास इरोज तथा यूटीवी जैसे नामी स्टुडियो में काम करने का व्यापक अनुभव है। हमारे दूसरे पैनलिस्ट हैं जाने-माने लेखक और पिचिंग कौशल के लिए प्रख्यात श्रीधर राघवन। ये आपको बताएंगे कि कैसे आप अपनी पिच को ज्यादा प्रभावी बना सकते हैं । और तीसरे है विक्रमादित्य मोटवानी। इनका नाम आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है। इनकी फ़िल्में हमारे दिलों में बसती हैं। ये पिचिंग टेबेल के दोनों तरफ रह चुके हैं। पहले येबतौर एक लेखक - निर्देशक की तरह ही अपनी स्क्रिप्ट पिच करते रहे हैं और आजकल खुद निर्माता बनने के बाद table की दूसरी तरफ बैठकर लेखकों के पिचिंग को सुनते हैं। मैं अपने कुशल तथा अनुभवी पैनल के सदस्यों का अभिवादन और स्वागत करता हूं।

 

श्रीधर:पहला प्रश्न लेते हैं.....जैसे जब आप पिचिंग के लिए जाते हैं तो आपके मन में सबसे बड़ी क्या आशंका या चिंता होती है ?

प्रश्न-1 : सिर्फ 10 मिनट में आप पूरी कहानी किसी को कैसे समझा सकते हैं?

विक्रमादित्य : आप कह रहें है कि 10 मिनट काफी नहीं है?लेकिन मै कहता हूं कि 10 मिनट मे आप सिर्फ अपनी एक कहानी नहीं बल्कि कई और काहनियों को भी पिच कर सकते हैं। अगर आपको अपना पिच प्रभावी ढंग से कहना है तो उसके लिए सिर्फ 2 मिनट ही काफ़ी है। अगर आपको अपनी कहानी पर भरोसा है तो पूरे आत्मविश्वास के साथ जाइये और दो मिनट ही सामने वाले को पूरी बात बता दीजिए क्योंकि टेबेल के उस तरफ बैठे व्यक्तियों को यह तय करने में दो मिनट से ज्यादा का समय नहीं लगतावो इस कहानी को आगे बढ़ा रहें है या  नहीं। अपनी पिचको बेमतलब लंबा खिचने की जरूरत ही नहीं हैं।स्टोरी की लॉगलाइन सिर्फ एक लाइन की होनी चाहिए। लेकिन यह ऐसी लाइन होनी चाहिए कि सुनने वालों को तुरंत अपनी तरफ आकर्षित कर ले। जब तक सामने वाला आपके लॉगलाइन से आकर्षित नहीं होता तब तक वह आपके आगे की को कहानी पूरे मन से नहीं सुनेगा। पर अगर आपकी लॉगलाइन उसे अच्छी लगी तो आपकी बात बन सकती है। 

श्रीधर: मान लीजिये की आप किसी डीवीडी या किताब की दुकान पर जाते हैं और किसी किताब या फिल्म को देखते हैं पर आप उसके किरदार या लेखक को नहीं जानते हैं। फिर आप कैसे तय करेंगे कि आप को क्या खरीदना है? कौन-सी डीवीडी या कौन से लेखक की किताब लेनी है? अमूमन लोग किताब या डीवीडी के पीछे देखते हैं जहां उसका सार लिखा होता है। इसे पढ़ने से आपको एक रफ आइडिया तो हो ही जाता है कि आप जो खरीदने वाले हैं,वह क्या है। ठीक यही पिचिंग के संदर्भ में भी होता है। पिच एक तरीका है जिससे आप पढ़ने वाले को बांध कर रख सकते हैं। 10 मिनट में पूरी कहानी सुनाना ही सिर्फ पिच नहीं है बल्कि सामने वाले को अपनी कहानी के लिए आकर्षित करनावही पिच है ।

विक्रमादित्य –पिच के तीन महत्वपूर्ण पहलु होते है. किसी भी कहानी का सबसे अहम हिस्सा होता है कहानी की विषयवस्तु। यही पूरे कहानी का आधार होती है। इससे यह सवाल पैदा होता है कि आपने इसे पहले क्यों लिखा ? आगे चलकर यही कारण आपको कहानी या स्क्रिप्ट लिखने के लिए प्रेरित करती है।  इसके बाद सबसे महत्वपूर्ण होते हैं आपके किरदार। किरदार की भूमिका और प्रभावी उपस्थिति की वजह से हम कहानी में रुचि लेते हैं।इसलिए कई बार ऐसा भी होता है कि सामने वाले को आपके किरदार तो पसंद आते हैं पर कहानी पसंद नहीं आती और कई बार उसे कहानी पसंद आ जाती है पर पात्र पसंद नहीं आते। तीसरा और सबसे अहम चीज है होता है आपका आत्मविश्वास। जब आप किसी के सामने पिचिंग के लिए जाएं तो बिना नर्वस हुए, अपने आप को संयमित रखते हुए पूरे आत्मविश्वास के साथ जाएं। अपनी कहानी और चरित्रों को अच्छी तरह से समझ लें, साथ ही सामने वाले की आलोचना के लिए भी अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर लें और हां अगर आप के पास पिचिंग के लिए 10 मिनट हैं और आपने 5 या साढ़े पांच मिनट में अपनी बात खत्म कर ली हो तो सामने वाले को धन्यवाद दीजिये और चले जाइए। समय बर्बाद मत कीजिए क्योंकि पिचिंग करना क्लास में परीक्षा देने जैसा नहीं है जहां हम कोशिश करते हैं कि अंतिम सेकंड तक डटें रहें। 

 

श्रीधर : चलिए इस बात पर चर्चा करते हैं कि पिचिंग के दौरान आपका आत्मविश्वास कैसा हो?

आपमें से कितने लोग ऐसे हैं जिन्होंने अपनी कहानी को अपने दोस्तों या परिजनों को सुनाने की कोशिश की है? आपमें से कितने लोगों ने ये गौर किया है कि आप कहानी तो अच्छा लिखते हैं पर जब किसी को सुनाना होता है तो आप इसे प्रभावी तरीके से नहीं कहपाते। इसका सबसे अच्छा तरीका है कि आप यह जानने की कोशिश करें कि दिक्कत कहां है? आपके लेखन में या आप में?इसे समझने के लिए आप एक हिट फिल्म को पिच करने की कोशिश कीजिए। अगर आप इसे सही ढंग से पिच नहीं कर पा रहें है तो दिक्कत आपमें है। इस दिक्कत को दूर करने का सबसे बढ़िया तरीका है कि अपनी कहानी को बार-बार बोल के पढ़िए। ऐसा करने से आप बड़ी आसानी से इसे किसी के सामने भी बोल सकते हैं और इससे आपमें में आत्मविश्वास भी आयेगा।

वही अगर आप बोल अच्छा रहे हो तो फिर कमी आपकी कहानी में है उसपर ध्यान दीजिये|

 

प्रश्न-2 :  एनडीए फॉर्म पर साइन करते समय अक्सर एक क्लाज होता है, जिसमें लिखा होता है कि निर्माता हमारी स्क्रिप्ट से मिलते जुलते आइडिया पर काम कर रहे हो सकते हैंऔर यदि वे हमारी स्क्रिप्ट जैसी ही कोई फिल्म भी बना लें तब भी हमउनके ऊपर कोई अदालती कार्रवाई नहीं कर सकते?

कमलेश पांडे : आप इस विषय में कुछ नहीं कर सकते हैं। बस जाइए और कांट्रैक्ट साइन कीजिये। इसमें कोई दिक्कत नहीं है और न ही कोई कानूनी मुद्दा बनता है।किसी को भी अदालत में घसीटना यह हर नागरिक का हक है जिसे कोई छीन नहीं सकता। भले ही आप अपराधी क्यों ना हों।

श्रीधर : ऐसा भी हो सकता है कि वो सच में उस विषय के बारे में पहले से कुछ सुन चुकेहों तथा आपके विषय से मिलते जुलते आइडिया को विकसित कर रहें हों। इससे बचने का सबसे अच्छा तरीका है कि आपके पास आपका स्क्रीनप्ले होऔर वो रजिस्टर्ड भी हो| उस बिनाह पर आप अपनी शिकायत दर्ज करा सकते है| और हां हमेशा सिर्फ कहानी को ही पिच करने की कोशिश करें न की आइडिया को। क्योंकि आइडिया का कॉपीराइट नहीं कराया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर अख़बार में छपी हुई किसी खबर को लीजिए। 5000 तरीके होतें है उसकी व्यख्या समझने के। एक idea से पचासों लोग हजारों कहानियाँ बना सकते हैं| ये हमेशा याद रखें कि रॉ मटेरियल को आसानी से कॉपी किया जा सकता है। इसीलिए अगर आपके पास सिर्फ आइडिया है तो उसे पिच करने के लिए ज्यादा उत्साहित होने की जरूरत नहीं है। इसलिए जब भी आपके पास पिच करेने का मौका हो आपनी पूरी कहानी ही पिच करें।

प्रश्न 3 : क्यासामने वाले से यह पूछना सही है कि वह किस तरह की कहानी पसंद करते हैं ?

श्रीधर : आपको इस बात की चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है कि सामने वाला किस तरह की कहानी तलाश रहा है।आपको ये चिंता करनी चाहिए कि आप उनके सामने क्या पेश करने वाले हैं और ये फिल्म लोगों को क्यों पसंद आएगी। ये भूल जाये कि वो क्या चाह रहें है बल्कि ये सोचें की आप अपनी तरफ से क्या बेस्ट दे रहें हैं। यही काम करने का सही तरीका होता है। आप वही बेचिए जो आप सबसे अच्छा बेच सकते हैं

राम मिरचंदानी : मुझे ऐसा नहीं लगता है कि कोई प्रोड्यूसर किसी विशेष जौनर पर फिल्म बनाना चहाता है। किसी भी प्रोड्यूसर के लिए सबसे अहम यह होता है कि उसकी फिल्म चले। आप विक्की डोनर का उदाहरण ले सकते हैं। रियलिस्टिक होने के बावजूद यह बहुत ही मनोरंजक फिल्म थी। ये किसी जोनर की फिल्म नहीं थी, लेकिन एक सोच थी जो कि बहुत कामयाब रही ।

प्रश्न 4: कई बार ऐसा होता है कि कहानी सुनने वाले प्रोड्यूसरों में सिनेमेटिक अनुभव की कमी होती है। मैंने खुद कई बार ऐसा महसूस किया है। ऐसे में क्या करना सही होगा ?

प्रश्न 5 : यह कैसे पता चले कि आगे वाला मेरे कहानी को जज करने के लायक है भी या नही ?

श्रीधर : वे अपनी बेहतरीन प्रतिभा के साथ अपनी कंपनी का प्रतिनिधित्व कर रहे होते हैं इसलिए आप उनकी चिंता छोड़िए और अपने काम को उम्दा तरीके से पेश करने की कोशिश कीजिए।

विक्रमादित्य : मैं खुद एक लेखक हूं और एक लेखक की हताशा समझ सकता हूं। फिर भी मै यही कहूंगा कि आप इस एटिट्यूड के साथ न जाएं। सोचिए अगर आप पिचिंग के लिए जाते हैं और कहते हैं कि मैं सबसे अच्छा हूं और आप लोग कुछ भी नहीं जानते तो वो आपको वो बोलेगा कि आप घर जाओ।क्योंकि उनके पास बहुत से विकल्प हैं।

श्रीधर: चलिए आप लोग हाल ही में प्रदर्शित किसी फिल्मको पिच करने की कोशिश कीजिए। इससे अच्छा अभ्यास हो जाएगा। बिलकुल भी नर्वस न हों और खुले दिमाग से सोचिए की आप कैसे बेहतर पिच कर सकते हैं। हम क्वीन फिल्म का उदाहरण लेते हैं। आप इसे पिच करके बताइये।   

सदस्य 1 : एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने अस्तित्व की खोज में है। 

श्रीधर: - आपके पास पूरे10 मिनट था पर आपनेसिर्फ 10 सेकंड में ही समाप्त कर दिया? कल्पना कीजिए कि आप पहली बार इसे पिच कर रहे हैं और सामने वाले को इसके बारे में कुछ भी पता नहीं है। तो क्या आपने जो बताया उससे कहानी की विशेष खूबियों का पता चलता है?

सदस्य-2:  यह एक ऐसी मिडिल क्लास लड़की की कहानी है जी दिल्ली के रजौरी गार्डेन में काम करती है। कुछ ही दिनों में उसकी शादी होने वाली है। वह अपने होने वाले पति से पागलों की तरह प्यार करती है। अपनी शादी को लेकर उसने बहुत सारे सपने देखे होते हैं। पर शादी के ठीक एक दिन पहले लड़का उससे शादी तोड़ देता है। इसके बाद वह एक ऐसा निर्णय लेती है जिसके बारे में दिल्ली की मिडिल क्लास लड़की सोच भी नहीं सकती है। वह अकेले ही अपना हनीमून मनाए के लिए विदेश निकाल जाती है। कैसे वह अकेली लड़की विदेशों में नए दोस्त बनाती है और जब वह लौटती है तो सबकुछ बदला-बदला सा होता है। अब वह स्वतंत्र और आत्मनिर्भर बन जाती है और जब वही लड़का दुबारा उसे प्रपोज करता है तो वह इनकार कर देती है।    

सदस्य-3:  यह एक ऐसी लड़की की कहानी है जिसकी शादी होने वाली है पर किसी कारण से शादी नहीं हो पाती। इसलिए वह अकेले ही हनीमून पर चली जाती है। हनीमून के दौरान क्या होता है ? उसका बॉयफ्रेंड उसे क्यों छोड़ देता है? और इस यात्रा के दौरान वह अपने आप से और दुनिया से क्या सिखती है ? वापस लौटने की बाद उसमें क्या बदलाव आते हैं?पूरी कहानी इन्हीं सवालों के इर्दगिर्द घूमती है।     

सदस्य-4:   एक ऐसी लड़की की कहानी जिसका कोई सपना नहीं है पर अचानक एक दिन उसे उसका बॉयफ्रेंड डंप कर देता है। इसके बाद वह अकेले अपना हनीमून मनाने इंडिया से बाहर जाती है। इस बाहरी दुनिया में वह अपने आप को खोजती है और जब वापस आती है तो पूरे आत्मविश्वास से लबरेज होती है।    

सदस्य-5: एक ऐसी लड़की जो अपने जिंदगी में कभी बड़ा नहीं बनना चाहती... उसका सपना बस इतना ही है कि जिस लड़के से वह प्यार करती है उससे उसकी शादी हो और दोनों अपने पसंदीदा जगह पर हनीमून मनाने जाएं। लेकिन ऐसा नहीं हो पाता। लड़की का एक मात्र सपना भी पूरा नहीं हो पाता तब वह तय करती है कि वह अकेले ही अपने हनीमून पर जाएगी। अपनी इस यात्रा में वह क्या महसूस करती है, कैसे अपनी खुशियां तलाशती है? बस यही है कहानी।        

 

श्रीधर: मैंने महसूस किया कि अंतिम के दोनों पिचिंग में काफी उलझने थी। कल्पना कीजिए की इस कमरे में किसी भी आदमी को इस कहानी के बारे में कुछ भी पता नहीं है। फिर आप इसे कैसे पिच करेंगे? अभी हम सभी लोग यही सोच रहे हैं कि सबको इस कहानी के बारे में पता है। इसलिए यह मान लीजिए कि मैं एक जापानी हूं। आप मुझे एक फिल्म की कहानी सुना रहे हैं जिसे मुझे खरीदना है। अब आप फिर से मुझे यही कहानी सुनाइए क्योंकि अभी आपने जो बताया वह सिर्फ थीम था।  कहानी का पिच क्या है ? कोशिश कीजिए ..... 

विक्रमादित्य मोटवानी:जब आप यह कहते हैं कि ‘कोई जाता है और अपने आप को खोजता है’ यह बहुत कलात्मक हो जाता है।’ प्लीज अपनी पहली लाइन में इसे मत कहिए। इसे अंत के लिए रखिये। जब आप ऐसे कहेंगे कि लड़की अकेले हनीमून के के लिए जाती है तो सामने वाले को इसमें दलचस्पी होगी। वह आपसे खूद पूछेगा कि ऐसा क्यों होता है? क्यों वह अकेले जाती है? तब आप उनको बताइये रजौरी गर्ल जिसका बस यही सपना होता है कि वह अपने बॉयफ्रेंड के साथ हनीमून पर जाए। उसे उसका बॉयफ्रेंड डंप कर देता है तब वह अकेले हनीमून पर निकाल जाती है। एक अंजान दुनिया में वह नए दोस्त बनती है और अपने जीवन को खोजती है। यही आपकी अंतिम लाइन होनी चाहिए। और इस तरह आप अपने पिच को खत्म करेंगे। जब आप वहां से शुरू करते हैं तो वह बिल्कुल किसी कलात्मक फिल्म की तरह हो जाता है। इसलिए आप एक समान्य फिल्म कि तरह पिच करेंगे तो ज्यादा बेहतर होगा   

श्रीधर: - वैसे तो यह तरीका सिर्फ क्वीन फिल्म के लिए है लेकिन फिर भी यह आपकी सभी कहानियों के लिए व्यापक तौर से लागू होता है।

किसी भी कहानी के लिए सबसे पहले आप एक दुनिया बनाते हैं। फिर उस दुनिया में अपने किरदार डालते हैं। हमारी इस कहानी में एक मिडिल क्लास लड़की शादी करना चाहती है। वह किसी लड़के को काफी समय से डेट कर रही है। उसकी जिंदगी में उसने यही कुछ साधारण से सपने संजोये हैं। पर शादी से ठीक पहले उसका बॉयफ्रेंड उसे डंप कर देता है और उसकी दुनिया बर्बाद हो जाती है। हम इस किरदार को क्यों पसंद करते हैं? क्योंकि इतना होने के बावजूद यह लड़की दूसरे लोगों तरह निराश नहीं होती बल्कि हालात का सामना करती है। आगे बढ़कर बढ़कर वह हमारी कहानी की हीरो बन जाती है। वह कहती है ‘मैंने इस हनीमून के लिए अपना पैसा और समय दोनों खर्च किया है। क्या हुआ अगर वह शख्स मेरे साथ नहीं है, मैं अकेले ही इस हनीमून पर जाऊंगी।‘  इस रोमांचक यात्रा से वह बहुत कुछ सिखती है। एक ऐसी दुनिया में जिसके बारे में उसे पहले कोई कल्पना नहीं थी, जहां वह हमेशा अपने बॉयफ्रेंड के साथ जाना चाहती थी पर नहीं जा पायी... पर अब वह बिना किसी आदमी के अकेले निकल पड़ती है और इसी सफ़र में अपने आप को भी खोजती है। इस अजनबी जगह पर वह कई ऐसे लोगों से भी मिलती है जो उसके जीने का नजरिया बदल देते हैं। आपके 2 मिनट के पिच में इस तरह की बातें होनी चाहिए।

मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं पिचिंग के समय अपनी पूरी कहानी में आप सबसे पहले यह बताइये क्या हो रहा है फिर दूसरी चीजों के आउटलाइन के बारे में बताइये। इस दौरान कृपया आप नायक, खलनायक, प्लॉट प्वाइंट और ट्विस्ट जैसे जारगंस का प्रयोग न करें। इस तरह के शब्दों को सामनेवाले के लिए झेलना बहुत मुश्किल होता है।     

सबसे पहले आप उन्हें अपनी कहानी के आइडिया के बारे में बताइये। फिर किरदारों से परिचय कराइए। फिर ये बताइये की आपके किरदार के सामने किस तरह की समस्या आती है और वह इनसे कैसे निपटता है। इतना सुनने के बाद जब वे आपकी कहानी में दिलचस्पी लेते हैं और आगे जानने के लिए उत्सुकता दिखाते हैं तब आप और आगे बढ़िए। यही पिचिंग का सही तरीका है। आप चाहें किसी किताब के लिए पिचिंग कर रहे हैं या फिर किसी फिल्म के लिए। इससे ज्यादा कुछ भी मत कीजिए। यह बताने की तो बिलकुल भी कोशिश मत कीजिए कि हमारा इंटरवल ऐसा होगा, अंत ऐसा होगा और गाने के लिए आपने क्या शानदार परिस्थिति बनाई है। इन सब चीजों की बिलकुल भी जरूरत नहीं है।  आपका आइडिया उन्हें किरदार और कहानी के बारे में सोंचने के लिए प्रेरित करता है। इसके अलावा आप सामने वाले पर ऐसी छाप छोड़िए जिससे उसको लगे कि संबन्धित विषय पर आपकी पकड़ काफी मजबूत है और इसे करने के लिए पूरी तरह से सक्षम हैं। मुझे लगता है यही इस सेशन का मकसद था जो हासिल हो चूका है इसलिए अब टाटा टाटा बाय बाय फिर मिलेगे। (हंसते हुए)  

श्रीधर -चलिए एक और उदाहरण लेते हैं।आप मुझे एक अच्छी फिल्म का नाम बताइये।

श्रोता - इटरनल सनसाइन।

 कमलेश: - जिन लोगों ने यह फिल्म देखि है मैं उन लोगों से इसके बारे में जानना चाहूंगा।

सदस्य- यह एक प्रेम कहानी हैजो दो बार होती है। हर बार पहली बार जैसा अनुभव होता है। इसमें दो किरदार होते हैं।दोनों एक-दूसरे से मिलते हैं और प्यार करने लगते हैं।कुछ समय बाद वे अलग होजाते हैं। पर दुबारा वे एक दूसरे के प्यार मेंपड़ जाते हैं।

सदस्य - दो लोगों एक दूसरे से प्यार करते हैं। वे हर उस अनुभव से गुजरते हैं जो आमतौर पर एक प्रेमी युगल करते हैं। लेकिन अंततः उनका ब्रेकअप हो जाता हैं और दुर्घटनावशदोनों की यादास्त चली जाती है।इसके बाद संयोग से वे फिर मिलते हैं और एक बार फिर एक दूसरे के प्यार में पड़ जाते हैं। लेकिन उन्हें एक-दूसरे के बारे में कुछ भी पता नहीं होता है। 

सदस्य -इस कहानी का सेंट्रल आइडिया यह है कि जब आप अपने जीवन को दुबारा से जीना चाहते हैं तो वही पुरानी चीजें आपके सामने आती हैं। कहानी में एक ऐसा डाक्टर है जो दिमाग से बुरी और कड़वाहट भरी यादों को मिटा देता है। इसके बाद ये यादें जीवन में फिर कभी वापस नहीं आती हैं। एक जोड़ा उनके पास जाता है और डाक्टर की मदद से अपनी यादों को मिटा देते हैं। लेकिन जब वे दुबारा मिलते हैं तो फिर एक दूसरे के प्यार में पड़ जाते हैं। इसके बाद उन्हें इस बात का आभास होता है कि उनकी मिटी हुई स्मृति वापस आ गई हैं। इसमें एक सब प्लॉट आता है डॉक्टर खुद अपनी स्मृति को कुछसमय के लिए मिटा चूका होता है।  

सदस्य–एक प्रेमी जोड़ा है जो एक-दूसरे से बहुत प्यारा करता है। इसके बाद वे अपनी स्मृतियों को मिटा देते हैं। इसके बाद वे एक-दूसरे से बिलकुल अजनबी की तरह मिलते हैं। और फिर वही होता है जो पहले हुआ होता है। दोनों फिर से प्रेम के बंधन में बंधजाते हैं और एक-दूसरे के बिना नहीं रह पाते। 

श्रीधर: मैं आप लोगों से बिलकुल स्टूडियों वाला बन कर एक प्रश्न करता हूं अगर वे दोनों एक दूसरे से इतना प्यार करते हैं तो फिर वे अपनी स्मृतियों को क्यों मिटाते हैं। 

सदस्य: उन दोनों के बीच कुछ ऐसा होता जिसकी वजह से उन्हें यह कदम उठाना पड़ता है।  

सदस्य:  यह एक प्रेमी जोड़े की कहानी है जो एक दूसरे से प्यार करते हैं। लेकिन कुछ गलतफहमियों के कारण दोनों में लड़ाई होने लगती है। तंग आकार दोनों एक दूसरे अलग हो जाते हैं और कभी एक-दूसरे का चेहरा न देखने का वादा करते हैं। इसके बाद एक क्लीनिक में जाकर वे अपनी स्मृतियों को मिटा देते हैं। कुछ दिनों के बादवे फिर से अजनबी के रूप में मिलते हैं और एक बार फिर एक-दूसरे के प्यार में पड़ जाते हैं।धीरे-धीरे उनकी यदास्त वापस आती है और उन्हें इस बात का अहसास होता है कि यादास्त जाने से पहले भी वे एक-दूसरे से प्यार करते थे।

प्रश्न 6 :मेरा सवाल अपनी सबसे पसंदीदा फिल्म उड़ान के संदर्भ में है। अगर आप उड़ान की कहानी और लॉगलाइन को लेकर किसी व्यावसायिक या गैर व्यावसायिक निर्माता के पास जाते हो तो मैं इस बात की गारंटी लेता हूं कि पक्का यह फिल्म उतने प्रभावशाली ढंग से हमारे सामने नहीं आ पाती जितनी की यह वाकई में है। ऐसी परिस्थिति में आप अपना पिचिंग कैसे करेंगे जब पूरी कहानी केपूरे आइडिया को एक लाइन में नहीं बताया जा सकता हो।

विक्रमादित्य मोटवानी: - अपने पिच में आप सुनने वाले को एक ऐसी दुनिया में ले जाते हैं जो उसके लिए बिल्कुल नई होती है। बिल्कुल इटरनल सनसाइन के उस डॉक्टर की तरह जो आपसे आपकी स्मृति को अलग कर देता है। यह एक नई दुनिया की कहानी है, जिसके बारे में मैं कुछ भी नहीं जानता। अपनी जिंदगी से तंग आ चुका एक प्रेमी जोड़ा इस डॉक्टर के पास जाता है और डॉक्टर की मदद से अपनी कड़वाहट भरी यादों को मिटा देते हैं। इसके बाद वे फिर अजनबी की तरह मिलते हैं और एक-दूसरे के प्यार में पड़ जाते हैं। इसे सुनकर अचानक मैं भी बोल देता हूं कि हां यह कांसेप्ट मुझे यह बहुत पसंद आया। कहानी जिस तरह से आगे बढ़ती है उससे पिचिंग काफी रोमांचक बन जाता है। कहानी सुनकर आप जिस दुनिया में पहुंच जाते हैं उस दुनिया के लिए आप बिल्कुल भी अंजान हैं। स्क्रीनराइटिंग भी बिलकुल यही है यहां लोगों को हम एक ऐसी दुनिया से मिलाते हैं जो उनके लिए बिलकुल नई होती है। क्वीन की कहानी में भी बिल्कुल ऐसा ही है। एक लड़की अकेले हनीमून पर चली जाती है। मैंने इससे पहले कभी भी ऐसा नहीं सुना था। इस कहानी का आइडिया मेरी लिए बिलकुल नया था। आपको अपना स्क्रीनप्ले ऐसे तैयार करना चाहिए जिसके बारे में पहले किसी ने सुना नहीं हो। अगर मैं एक ही कहानी पर आधारित अलग-अलग फिल्में देखता हूँ तो शायद उन्हें पसंद नहीं करता। यही चीज यहां भी हुई। अगर एक निर्माता यह देखता है कि आपका पिच दूसरे लेखक से मिलता जुलता है तो वह उसे कभी पसंद नहीं करेगा । अगर आपकी कहानी अलग है तो निर्माता जरूर इसके बारे में सोंचेगा। 

मेरी फिल्म उड़ान की कहानी का पिच कुछ इसी तरह का था,‘एक लड़का आठ साल बाद बोर्डिंग से अपने घर आता है और अपने घर में एक ऐसे सौतेले भाई से मिलता है, जिसके बारे में उसने पहले कभी कुछ भी नहीं सुना। यह एक अच्छा पिच बनता है और आपको तुरंत आकर्षित करता है, क्योंकि अपने ऐसा पहले कभी नहीं सुना|

प्रश्न 7 –उडान के बनाने में आपकी व्यक्तिगत पहचान का भी कोई असर था? मान लीजिए आप फ़िल्म Industry में बिलकुल नए होते और जान पहचान के नाम पर आपके पास कुछ भी नहीं होता तो क्या तब भी इस पिच के आधार पर आप फ़िल्म बना पाते?

विक्रमादित्य मोटवानी: –आज चीजें बदल चुकी हैं। उन दिनों लोग छोटे बजट की फिल्मों के आइडिया भी नहीं सुनना चाहते थे। इस  फिल्म को बनाने के लिए मैंने बहुत कोशिश की। दो बार मैं फिल्म बनाने के काफी करीब पहुंच गया था पर  फिल्म बना नहीं पाया।  खुद अनुराग कश्यप को भी 2003 में अपनी फिल्म बनाते समय पैसों के लिए संघर्ष करना पड़ा था और उड़ान 2005 में बनी थी। आज 2015 है। अब इंडस्ट्री काफी बदल चुकी है। अब हर तरह के आइडियाजके लिए लोग हैं। उस समय भी ऐसे लोग थे जो उड़ान में दिलचस्पी ले रहे थे। उन्हें उड़ान की कहानी पसंद थी।

प्रश्न 8-ओए लकी लकी ओए के बारे में आप क्या कहेंगे जहां कहानी दमदार नहीं थी लेकिन उसका ट्रीटमेंट काफी शानदार था।

सदस्य- मैं इनसे सहमत नहीं हूं। क्योंकि ओए लकी लकी ओए एक चोर की बहुत खूबसूरत-सी कहानी है। यह सिर्फ एक ट्रीटमेंट नहीं है।   

राम मीरचंदानी: - क्या मैं बीच में रोक सकता हूं? जब मैं यूटीवी में था तब यह फिल्म रिलीज हुई थी। मेरी पूरी टीम ने सिर्फ 10 मिनट के पिच में इस फिल्म को काफी सराहा था। उस समय तो इसकी स्क्रिप्ट भी तैयार नहीं हुई थी यह सिर्फ एक कहानी थी लेकिन उन 10 मिनट की स्टोरी लाइन में दिवाकर ने अभय के उस किरदार को इस तरह से हमारे सामने पेश किया की हम तुरंत राजी ही गए।

प्रश्न 9- जब बतौर एक निर्देशक के हम किसी स्क्रिप्ट की बात करते हैं तो क्या हमे Production को लेकर भी बात करनी चाहिए? मसलन कितना बजट होगा, कौन stars होंगे वगैरह। 

राम मीरचंदानी: – एक लेखक को इस बारे में चिंता नहीं करनी चाहिए.

प्रश्न –यदि मैं एक लेखक निर्देशक के तौर पर pitch कर रहा हूँ तब?
विक्रम – फ़िलहाल यहाँ हम लेखक की बात कर रहे है. वैसे कहानी अच्छी हो तो बजट इत्यादि बातें गौण हो जाती है.

प्रश्न - पिचिंग में कहानी के कथानक (narrative) का कितना महत्वहोताहै। मसलन पल्प फिक्शन जैसी कोई स्क्रिप्ट हो जिसकी खासियत उसका  कथानक ही हो तब कैसे pitch करें?

श्रीधर- यदि आप पल्प फिक्शनको पिच कर रहे हैं तो आपको तीन कहानियों को अलग-अलग पिच करना होगा। इसके आप बताएंगे कैसे आप इन तीनों कहानियों को एकसाथ मिलाते हैं। इसके लिए सबसे जरूरी  है कि सामने वाले को हर कहानी पसंद आए। इसलिए अपनी कहानी के स्ट्रक्चर, सीन, बीट्स और प्लॉट को लेकर चिंतित होनेकीकोई जरूरत नहीं है। यह कोई बहुत विशेष नहीं है बिलकुल समान्य चीजें हैं। कहानी का आधार, किरदार और हुक पिचिंग के लिए ज्यादा मायने रखते हैं और जैसा की हम सब ने देखा यहां जीतने भी लोगों ने पिच किया किसी ने भी एक मिनट से ज्यादा का समय नहीं लिया। इसका मतलब यही है कि 10 मिनट काफी लंबा समय है। इसलिए कभी भी बहुत विस्तार में किसी सीन के बारे में मत बताइये। यह पिचिंग में सबसे बुरा माना जाता है। सिर्फ उन्हे कहानी के आकर्षक मोड़ के बारे में बताइये। यह बताने की कोशिश कीजिए कि कैसे आपकी कहानी और किरदार दूसरों से बिलकुल अलग है और ऐसी कहानी वे पहली बार सुन रहे हैं। एक बार पूरी सौम्यता और आत्मविश्वास के साथ आपने इन तीनों सवालों के जवाब दे दिए तो समझिए आपने अपना काम बहुत अच्छे से पूरा किया है|

विक्रमादित्य मोटवानी: - इससे सुनने वाले की प्रतिक्रिया समझने में भी मदद मिलती है। यह जरूरी है कि आप उनके हाव-भाव को भी देखते रहें। उसकी प्रतिक्रिया को देख कर ही आप आगे बढ़ें। उसे देखकर आप यह जान जाएंगे कि सामने वाला आपकी बातों में रुचि ले रहा है कि नहीं। आप कब क्या कहते हैं और कैसे कहते हैं यह पिचिंग का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। अगर आपको लगे कि सुनने वाला आपकी कहानी में दिलचस्पी नहीं ले रहा है तो आप बीच में ही अपनी पिचिंग बंद कर सकते हैं और अपनी सुझबुझ का इस्तेमाल करते हुए किसी दूसरे विषय पर जा सकते हैं जिस पर शायद अच्छी प्रतिक्रिया मिल जाए। 

कमलेश पांडे: - आपकी जानकारीके लिए मैं बताना चाहता हूं कि बहुत दिनों से हम अपना खुद का पिचिंग सेशन का आयोजन करने की योजना बना रहे हैं। जल्दी ही हम इसे बड़े पैमाने पर आयोजित करने जा रहे हैं। हम इस पर काम भी कर रहे हैं। इसके लिए हम कुछ ऐसे बड़े प्रोडक्शनहाउसकीतलाशकररहेहैंजोहमारेसाथजुड़ने केलिएइच्छुकहों।हमेंकुछऐसेलोगमिलेभीहैंजोहमारेसाथकामकरनेकेलिएतैयारहैंलेकिनहमकुछऔरलोगोंकोसाथमेंजोड़नेकीकोशिशकररहेहैं।एकबारहम एक अच्छा ग्रुप तयार कर लें फिर जल्द ही हम FWA का अपना पिचिंग सत्र आयोजित करेंगे। 

श्रीधर: - परिणाम अंत मेंअच्छा या बुराहीहोगा।इसलिएइसेकभीभीइसे सफलता या विफलता के रूप में नहीं देखें। किसी भी तरह आपको अपनी पिच को अच्छे से मैनेज करना होगा। आप इसे एक अनुभव मानिए, इससे सीखिए और आगे बढ़िए। आपको यह समझना होगा कि लोग आपके पिचिंग के दौरान किस तरह की प्रतिक्रिया देते हैं। हो सकता है वे जंभाई ले रहे हों या फिर मोबाइल से एसएमएस कर रहे हों या इसी तरह के कुछ और काम कर रहे हों। इस 10 मिनट में कुछ भी हो सकता है। ये भी हो सकता है कि वे बोर हो जाएं या आपको बीच में कट कर दें, कोई आपसे नाराज भी हो सकता है। कोई यह भी कह सकता है कि क्या बकवास सुना रहे हो। यदी ऐसा होता भी है तो कोई बात नहीं। इसकी वजह से कम से कम यह तो समझ आएगा कि यहां काम कैसे होता है। यही अनुभव आपको अगली बार काम आएगा। यह कोई 10 वीं की परीक्षा नहीं है। यहां पास और फेल जैसा कुछ भी नहीं है। यह सिर्फ एक कोशिश है जिसमें आप जितना अच्छा करें उतना ही बेहतर है। यह किसी तरह की कमजोरी या आलसीपन का लक्षण नहीं है बल्कि एक ऐसा माध्यम है जिससे पता चलता है कि आपकी कहानी में क्या कमी है। इससे आप अपने आप को और ज्यादा मजबूत कर सकते हैं और भविष्य ने बेहतर काम कर सकते हैं। ये चीजें होती हैं क्योंकि ये हमारे काम का हिस्सा हैं।                

प्रश्न-11 क्या हम कहानी को सुनने की बजाय पढ़ सकते हैं?

श्रीधर – पढ़ना... बिल्कुल भी नहीं। किसी भी कीमत पर आपको पढ़ने से बचना चाहिए। कहानी सुनाना सदियों पुरानी लोकपरंपरा है।आप कहानी नहीं सुना सकते... तो यह बहुत बुरी बात है। यह आपकी अपनी कहानी है और इसे आपको पूरे आत्मविश्वास के साथ सुनाने में सक्षम होना चाहिए।   

प्रश्न12  - अपने कहानी के किरदारों को प्रस्तुत करने के लिए सॉफ्ट बोर्ड का प्रयोग करना कैसा रहेगा?

 श्रीधर-  कुछ लोग पीपीटी और ऑडियो-विजुवल प्रजेंटेशन के साथ पिचिंग करना पसंद करते हैं। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। तय समय में अगर आप अपने कहानी का विजुवल प्रजेंटेशन देना चाहते हैं तो कोई समस्या नहीं है। आपको देखना है कि जिस दौरान पिचिंग कर रहे हो सुननेवाले का ध्यान बिल्कुल भी नहीं भटके| तो यह आपके ऊपर निर्भर करता है कि आप इसे कैसे करते हैं।  अगर आपको लगता है कि किसी  तरीके से आप ज्यादा अच्छा कर पाएंगे तो बेशक कीजिए। 

प्रश्न 13- हम व्यावसायिक बातों को कैसे बताएं ?

श्रीधर- लेकिन आप व्यावसायिक बातें क्यों बताना चाहते हैं?  यह लेखक का काम नहीं है।    

प्रश्न13- लेकिन अगर वे हमसे कहानी के व्यावसायिक पक्ष के बारे में पूछते हैं तब ?

 

श्रीधर: - नहीं, आमतौर पर एक लेखक को व्यावसायिक पहलू के बारे में नहीं पूछा जाता है।इस बात का कोई तर्क नहीं बनाता हैकि कोई  कहानी 3 करोड़ रुपये तक के बजट में ठीक है पर 4 करोड़ में ठीक नहीं है। अगर कहानी अच्छी है तो बजट बनानेवालों के लिए मायने नहीं रखता। इसलिए मैं कहूंगा कि आप इन सबकी चिंता न करें। ये सब  बाहर की बात है इसमें और भी कई मानक शामिल हैं। तो आप सिर्फ अपनी कहानी की चिंता कीजिए। यह व्यावसायिक रूप से काम करती है कि नहीं यह स्टूडियो को तय करने दीजिए। अगर एक निर्देशक के रूप में आपको अपनी क्षमता पर पूरा भरोसा है तब आप स्टूडियोया निर्माता को आश्वस्त कर सकते हैं।  

कमलेश- मुझे लगता है ये सब चीजें हमें स्टूडियो में ही छोड़ देनी चाहिए। इससे परेशान होने की जरूरत नहीं है। यह उनका काम है कि वे इसकी कितनी कीमत लगाते हैं।  अगर एक साधारण कहानी में वे एक सुपर स्टार चाहते हैं तो बजट अपने आप बढ़ जायेगा।   

श्रीधर- अगर आपके पास एक अच्छी स्क्रिप्ट है तो चिंता की कोई बात है। कोई न कोई स्टूडियो इसे प्रोड्यूस करेगा ही। अगर एक नहीं करता है तो इसका विकल्प मौजूद है। सिर्फ आपको अपनी स्क्रिप्ट में भरोसा होना चाहिए।       

प्रश्न-14 वास्तविकता और लोक कथाओं पर आधारित स्क्रिप्ट को कैसे पिच करना चाहिए?

श्रीधर : - बिलकुल ऐसे ही पिच कीजिए जैसे की आप करते हैं। सिर्फ यह बता दीजिए कि आपने जो कहानी लिखी है वह किस घटना, किताब या किसी और लेखक के काम पर आधारित है। अगर यह अच्छी कहानी है तो इसमें सुननेवालों की रुचि बढ़ जाती हैं।      

प्रश्न 15 –विशुद्ध कलात्मकफिल्म को कैसे pitch करेंगे वो भी तब जबकि वास्तव में उसमें कोई कहानी ही नहीं हो?

विक्रम- अच्छा मुझे कोई एक ऐसी विशुद्ध कलात्मकफिल्म बताइये जिसमें कहानी नहीं है या जो पिच न की जा सके। शिप ऑफ़थेसियस ,कोर्ट या फिर कोई भी फिल्म हो, मुझे नहीं लगता कि ऐसी कोई फिल्म जिसके पीछे गहरा दर्शन हो उसको पिच नहीं कर सकते। हर फ़िल्म की स्टोरी लाइन होती ही है बस आपको उसे समझने की देर है। 

प्रश्न-16 समान्य परिस्थिति में एक पिच 3-5 मिनट में खत्म हो जाती है। लेकिन अगर मेरे पास कई आइडिया हों और वक़्त भी हो तो क्या मैं कुछ और कहानियाँ सुना सकता हूँ शायद कोई ना कोई पसंद आ जाये?

प्रश्न-क्या हम एक से अधिक कहानी भी पिच कर सकते हैं?

श्रीधर : - मैंने पहले भी कहा कि कभी भी समय की चिंता मत कीजिये। ये मत सोचिए की आप 10 मिनट में सबकुछ बेच लेंगे। मैं हमेशा आपसे कहता हूं कि अगर आपने अपना काम 10 मिनट से पहले कर लिया है तो यह बहुत अच्छी बात है, ज्यादा ओवरडोज़ करके आप क्यों अपनी पिचिंग को बोझिल बनाना चाहते हैं। यह बिलकुल भी जरूरी नहीं है कि एक-एक सेकेंड का उपयोग किया जाय। आप उनसे अपने बारे में बात कीजिए अपनी कहानी के बारे में बताइये। इसके बाद अगर आपको लगता है कि सामने वाला आपकी बातों में दिलचस्पी ले रहा है और कुछ और बताने की गुंजाइश दिखाई देती है तब आप उनसे कुछ और सुनने का निवेदन कीजिए। वो सुनते है तो अच्छा है उन्हें आपकी वैरायटी समझ आयेगी और आपकी योग्यता को परख सकेगे। लेकिन अगर उधर से कोई दिलचस्पी नहीं दिख रही है तो धन्यवाद देकर चले जाइए। 

राम मीरचंदानी: -मैं आपको ऐसा करने की सलाह बिलकुल भी नहीं दूंगा। मैं केवल एक ही मजबूत और प्रभावी आइडिया को पिच करने की सलाह दूंगा। ज्यादा से ज्यादा आप दो आइडिया पर बात कर सकते हैं लेकिन इससे ज्यादा नहीं। क्योंकि आप वहां कोई प्रोजेक्ट बनाने नहीं जा रहे हैं। आप वहां एक फिल्म के लिए हैं। जब आप दो या तीन आइडिया की बात करते हैं तो ऐसा लगता है जैसे आप कोई प्रपोज़ल बना रहे हैं। इसलिए सिर्फ एक बेहतर और प्रभावी आइडिया ही काफी है बशर्ते कि आपने उसकी अच्छे से तैयारी की है और उस विषय पर आपकी पकड़ हो।   

प्रश्न 17- क्या हमें सामने वाले को अपनी स्क्रिप्ट की कॉपी देनी चाहिए?

विक्रमादित्य-अगर वे आपके पिच को पसंद करते हैं तो हो सकता है आपको सिनोप्सिस मेल करने के लिए बोलें। लेकिन फिर भी आपको अपने स्क्रिप्ट की पर्याप्त हार्ड कॉपीज ले जानी चाहिए।

कमलेश- राम क्या आप मुझे बुरी पिचिंग का कोई उदाहरण बता सकते हैं बिना किसी का नाम लिए.... 

राम मीरचंदानी: मैं आपको 2004 के एक पिच के बारे में बताता हूं। इस फिल्म का नाम था ‘मैं मेरी पत्नी और वो’। चन्दन अरोरा इसके निर्देशक और राघव यादव लेखक थे। उनके पास अपनी कहानी को पिच करने के लिए सिर्फ 2 मिनट का समय था। यह कहानी एक छोटे कद के आदमी की है जिसकी शादी एक बड़ी और सुंदर लड़की से हुई होती है। ये लोग जिस मकान में रहते हैं उसी मकान में एक लंबा और स्मार्ट युवक बतौर पेइंग गेस्ट रहता है। पूरी कहानी उस छोटे कद वाले आदमी के इर्दगिर्द घूमती है। कैसे वह आदमी लंबे कद वाले युवक के सामने अपने को कमतर और असुरक्षित महसूस करता है। कहानी सुनने के बाद सिर्फ दो मिनट में ही हमने इस फिल्म को फाइनल कर लिया। 2 मिनट का यह पिच इतना शानदार था कि हमने इस पर अच्छे बजट की फिल्म बनाई और फिल्म 6 महीने में रिलीज भी हो गई। यह पिचिंग का सबसे शानदार उदाहरण है।   

प्रश्न- बुरी पिच कैसे होती है...? प्लीज .... 

राम मीरचंदानी: - जब मेरे पास कोई बिना लॉगलाइन, या सिनोप्सिस 200 पन्नों की एक स्क्रिप्ट लेकर आए और बोले कि राम ये मेरा स्क्रिप्ट है, देखो क्या कमाल की स्क्रिप्ट है। तो इससे बड़ा इरिटेटिंग कुछ भी नहीं होता है। शायद यही बुरे पिच का सबसे सटीक उदाहरण भी है। क्योंकि सबसे पहले मैं लॉगलाइन और एक या दो पेज की सिनोप्सिस को समझना चाहता हूं। ज्यादा से ज्यादा पाँच पेज में हो सकता है पर इससे ज्यादा नहीं। सिनोप्सिस से हमें कहानी के आइडिया के बारे में पता चलता है और अगर मुझे यह पसंद आता है तभी मैं 100 या 200 पन्नों की स्क्रिप्ट पढ़ूँगा। इसलिए कभी बिना सिनोप्सिस के अपनी स्क्रिप्ट या स्क्रीन प्ले किस को मत भेजिए। यही सबसे बुरे पिचिंग का उदाहरण है।          

प्रश्न18 क्या छोटी फिल्म के लिए हम बड़े स्टूडियो को पिच कर सकते हैं या फिर अपनी स्क्रिप्ट के अनुसार स्टूडियो चुने?

विराट: -इससे आपको सही स्टूडियो को पिच करने में मदद मिलेगी। क्योंकि यह जानना बहुत जरूरी है कि कौन सा स्टूडियो किस तरह की फिल्में बनाता है। जैसे आपकी स्क्रिप्ट अगर कल्पना पर आधारित है और इसके लिए Disneyस्टूडियो ज्यादा बेहतर है तो मैं कभी इस फिल्म के लिए Phantomको पिच करने की सलाह नहीं दूंगा। 

श्रीधर: - अगर कोई प्रोडक्शन हाउस आपकी कहानी को पसंद नहीं करता तो इसका यह मतलब ये कतई नहीं हुआ कि आपकी कहानी बुरी है या फिर आपके आइडिया में कोई दोष है। इसलिए निराश होने की जरूरत नहीं है। इसका मतलब यह भी हो सकता है कि इस समय इसे किसी सही आदमी ने देखा ही नहीं। दूसरा स्टूडियो इस पर काम करने के लिए राजी हो सकता है या फिर यह भी हो सकता है कि वही स्टूडियो भविष्य में इस पर काम करे। ऐसा कुछ नहीं है कि बड़े स्टूडियो सिर्फ बड़ी फिल्मों की तरफ ही देखते हैं। इस मिथ से आगे निकलिए। क्योंकि यह जरूरी नहीं है कि कोई फिल्म सिर्फ एक भाषा या रीज़न के लिए ही बनती है इसलिए आप दूसरी भाषा और माध्यम में भी कोशिश कर सकते हैं।अगर आपको लगता है कि आपकी कहानी दमदार है तो आप इसे कहीं भी पिच कर सकते हैं।    

राम मीरचंदानी - हर बड़े स्टूडियो के पास एक स्लेट होती है जिसकी योजना वे साल से शुरुवात से ही कर लेते हैं। इसमें बड़े-बड़े स्टार्स की फिल्में, मिडिल रेंज की फिल्मों के अलावा छोटी फिल्मों के साथ ब्रेक भी होते हैं। आज के समय स्टूडियोज को इस तरह के आइडियाज़ की जरूरत पड़ती है। ‘दम लगाके हइसा’ और एनएच 10 जैसी फिल्मों ने इसे साबित भी किया है। बड़े स्टार और बजट ही मायने नहीं रखते कहानी का कंटेंट भी काफी मायने रखता है। इसलिए मुझे लगता है कि सभी स्टूडियो छोटे आइडिया पर काम करते हैं।    

प्रश्न-19 अपनी कहानी या किरदार कि व्याख्या करने के लिए हम किसी फिल्म का रिफरेंस दे सकते हैं?

श्रीधर: - मुझे नहीं लगता कि इसमें कोई दिक्कत है। लेकिन हर लाइन को बताने के लिए रिफरेंस देने की कोई जरूरत नहीं है। इससे सुनने वाला यह ना सोचे कि आपके पास कुछ ओरिजनल है भी या सारा माल यहाँ वहाँ से प्रेरित ही हैं।लेकिन अगर आप अपने शब्दों को कल्पना का रूप देने के लिए 2-3 रिफरेंस देते हैं ठीक है। आप ऐसा कह सकते हैं कि यह एक एक्शन फिल्म है पर Die Hardसे बिलकुल अलग है। 

 

प्रश्न20-क्या क्लाइमेक्स बताना चाहिए या नहीं बताना ज्यादा अच्छा है?जिससे कहानी में आगे क्या होने वाला है इसकी जिज्ञासा बनी रहे?

श्रीधर - नहीं, मैंकहूँगा आप सिर्फ अंक 1 /ACT 1 तक ही बताइए । और अगर आपकी कहानी ‘घायल’कीतरहहै तब अधिकतम आप इंटरवल तक जा सकते है पर उसके आगे कतई नहीं कभी नहीं।  क्लाइमेक्स तो बहुत दूर की बात है। अगर मुझे पहला ही पेज पसंद नहीं आएगा तो जाहीर-सी बात है मैं अंतिम पन्ना नहीं पढ़ना चाहूंगा। उदाहरण के लिए आप जब विकिपीडिया पर किसी फिल्म की कहानी खोजते हैं तो 200 शब्दों में लिखी सम्पूर्ण कहानी आपको मिलती है। इसमें फिल्म के बारें सबकुछ लिखा होता है कि क्या होता है, कब होता है कैसे होता है वगैरह| पर इससे आपकी फ़िल्म के विषय की दिलचस्पी ख़त्म हो जाती है| मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि ऐसे बोरिंग सिनोप्सिस को पढ़कर आप ये फिल्म नहीं खरीदेंगे। इसलिए ज़रूरी है आप केवल खास जानकारी दें। सबसे पहले अपना संक्षिप्त परिचय फिर ऐसा लॉगलाइन लिखें जो सिर्फ एक लाइन में आपकी पूरी कहानी कह दे। इसके बाद कहानी का ऐसा सिनोप्सिस दें जिससे की सामने वाले की रुचि कहानी में बनी रहे। आपको पूरी कहानी लिखने की कोई जरूरत नहीं है। लेकिन अगर सामने वाले को कहानी पसंद आती है तो पूरी कहानी सुनाने में कोई दिक्कत नहीं है। इसके लिए जरूरी है कि आपके पास पूरी स्क्रिप्ट तैयार हो ताकि मौका मिलने पर आप जा कर कहानी सुना सकें या फिर एक अच्छा-सा सिनोप्सिस भेज सकें। मुझे लगता है इतना काफी है। इसके बाद आपको क्लाइमेक्स सुनने की कोई आवश्यकता नहीं रहती है।

विक्रमादित्य- अगर आपकी पिच सफल नहीं होता तो इसका मतलब यह कतई नहीं कि आपके लिए सभी रास्ते बंद हो गए। यही दुनिया का अंत नहीं है। इससे हमें एक अनुभव मिलता है कि अगली बार कैसे हम इससे भी अच्छा करें। इसलिए पिचिंग के समय फीडबैक के साथ आलोचना के लिए भी हमेशा तैयार रहना चाहिए। इससे कम से कम आपको यह तो पता चल जाएगा कि इंडस्ट्री कैसे काम करती है और अगली बार जब आप पिचिंग के लिए जाएंगे तो पूरी तैयारी के साथ जाएंगे और बड़ी आसानी से पिचिंग कर पाएंगे। सबसे पहले आप अपनी कहानी को रोचक बनाइये फिर इसके लिए बार-बार कोशिश कीजिए। पहली बार में अगर बात नहीं बनती है तो दूसरी बार कोशिश कीजिए…तीसरी बार कोशिश कीजिए और हर बार इस तरह से पिच कीजिए जैसे आपकी कहानी के बारे में कोई जानता ही नहीं है और वो सबसे अलग है। मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि इसके बाद खुद निर्माता आपके पास आएगा और बोलेगा कि हां भाई मुझे यह फिल्म करनी है।  

प्रश्न 21 – हमारा पिच सामने वाले को पसंद आया कि नहीं क्या इस बात का फीडबैक हमें अंत में मिलता है?

विक्रमादित्य - हो सकता है और नहीं हो सकता । लेकिन दोनों सूरतों में आपको पता चल ही जाएगा। अगर उन्हें आपकी कहानी पसंद आती है वे आपसे सीनोप्सिस की कॉपी या कुछ और मांग सकते हैं। इस तरह आपको पता चल जाएगा कि वे आपकी कहानी में दिलचस्पी ले रहे हैं। कभी भी आप एक ही पल में जवाब की उम्मीद मत कीजिए। इसमें समय लग सकता है हो सकता है वे आपके आइडिया को भूल जाएं या फिर आपस में उसपर चर्चा कर रहे हों। यह भी हो सकता है कि इस पर वे अपने सीनियर की राय लें। इसलिए आप इसे अनुभव हासिल करने के शानदार मौका के रूप में देखिए और अच्छी तरह से अपने आप को प्रस्तुत कीजिए। 

श्रीधर – अगर वे आपको बाद में कुछ बताते भी नहीं है तो भी feedback तो आपको अपने मिल जायेगा ..

कमलेश: - हां जैसे की विक्रम ने कहा बिलकुल इसे एक अवसर के रूप में लीजिए। इसी बहाने आपको उनके सामने जाने का मौका मिलेगा। उन्हें कल्पना करने दीजिए कि उनके आस-पास कितने शानदार आइडियाज़ और स्क्रिप्ट मौजूद हैं। क्योंकि बहुत-सी ऐसी बाते हैं जिसके बारे में सामने वाला नहीं जानता है। खास करके एक्टर...इतने आइडियाज़ और स्क्रिप्ट होने के बावजूद वे कहते हैं कि स्क्रिप्ट कहां है? मुझे लगता है कि उन्हें बुलाकर दिखाना चाहिए कि ये हैं स्क्रिप्टस ...।        

प्रश्न 22 –टीवी के लिए पिच करना और फिल्मों के लिए पिच करने में क्या कोई अंतर है?

श्रीधर: - मैं ऐसा नहीं सोचता। मैंने दस साल टेलीविजन किया है और यही देखा है कि हर किसी को अच्छी कहानियों की हमेशा तलाश रही है  फ़िल्म हो या टीवी। अगर आपके पास दिलचस्प मोड़ वाली कोई अच्छी कहानी है निश्चित रूप से आप सामने वाला का मन जीत सकते हैं। अगर आपको किसी चैनल को पिच करने के लिए 10 मिनट का समय मिलता है तो आप वैसेही कीजिए जैसा हमने फ़िल्म के विषय में कहा है। यानि आप उन्हें कोई रोचक कहानी सुनाइये। कहानी ऐतिहासिक हो या फिर धार्मिक इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। सबसे महत्वपूर्ण है कि यह रोमांचक होनी चाहिए। इतनी रोमांचक की वे आपको फिर से मिलने के लिए बुलाएं और कहें कि और कुछ बताइये इसके बारे में। इसलिए आप उनको ऐसी कहानी सुनाइये जिसमें एक नई दुनिया हो। कहानी के किरदार इतने दिलचस्प हों कि हमें उनके साथ लगाव हो जाए और हम उनकी कहानी देखने के लिए बेचैन हो उठें। मेरे कहने का मतलब है हर माध्यम के लिए कहानी सुनाने का तरीका एक ही होता है, चाहें वो टीवी के लिए हो, फिल्म के लिए हो, वीडियो गेम के लिए हो या फिर किसी किताब के लिए हो। वीडियो गेम के बारे में तो मैं ज्यादा नहीं जनता। लेकिन मैं फिर ये बात कहूँगा कि आपकी कहानी और किरदार ही आपके लिए ट्रिक का काम कर सकते हैं। अब आप घायल का उदाहरण लीजिए। इसका हीरो एक खतरनाक मिशन पर है। इसकी कहानी किसी वीडियो गेम के लिए बिलकुल परफेक्ट है। यह सिर्फ इसलिए है क्योंकि मुझे वह किरदार बहुत पसंद है।                  

प्रश्न 23 -  यदि वे मेरी कहानी पसंद कर लेते हैं तो इसके आगे क्या होगा? क्या वे हमसे स्क्रिप्ट सुनाने के लिए कहेंगे?

श्रीधर- यदि कोई आपकी पिच में दिलचस्पी लेता है तब भी आप सीधे उसे स्क्रिप्ट मत सुनाइये| मेरे हिसाब से आपको अब उन्हें विस्तार से कहानी सुनानी चाहिए। लेकिन यहाँ भी कोशिश कीजिए कि आप ज्यादा से ज्यादा 10 से 12 मिनट में अपनी बात खत्म कर लें। इस बात को समझना बहुत जरूरी है कि किसी भी व्यवसाय में समय बहुत महत्वपूर्ण होता है इसलिए कहानी को सुनाने में बहुत कम समय लीजिए।  कोई जरूरत नहीं है कि पूरी स्क्रिप्ट पढ़ें और 3 घंटा 25 मिनट का समय लें। कहानी को पढ़ने की बजाय आप कहानी सुनाने की कोशिश करें। आपकी पिच ऐसी होनी चाहिए कि हर मीटिंग के दौरान कहानी में उनकी दिलचस्पी बनी रहे। उनसे मिलने पर आप कहानी की अवधारणा को ज्यादा से ज्यादा स्पष्ट करने की कोशिश करें। आपकी पिचिंग ऐसी होनी चाहिए कि वे आपसे अगली मीटिंग करने के लिए उत्सुक रहें। उन्हें आपका जोश, आपकी मेहनत और आपके विचार की साफ झकल दिखनी चाहिए क्योंकि हो सकता है उन्हें आपकी मौजूदा कहानी पसंद ना आयी हो पर वे आपको कुछ और लिखने के लिए दे दें।             

कमलेश :- बड़े प्रोडक्शन हाउस में पिचिंग का अनुभव एक सामने जाने के  अवसर की तरह होता है। हो सकता है आप अपने आइडिया को नहीं बेच पाएं, अगली बार आप एक अच्छे पिचर जरूर बन सकते हैं। हो सकता है उनको आपकी स्क्रिप्ट पसंद नहीं आए पर आप उन्हें स्क्रिप्ट राइटर के रूप में पसंद आ जाएं। कौन जनता है आपको कोई दूसरा असाइनमेंट मिल जाए या कोई नौकरी ही मिल जाए। आपको अपने आप को भी बेचना है न की सिर्फ अपनी स्क्रिप्ट को। 

श्रीधर- और हाँ प्लीज अपने हावभाव को बेहद संयमित रखें और आलोचना के लिए तैयार रहें।   ऐसा न हो कि अगर आप हाथ बांध कर खड़े हो जाएं और ऐसे देखें जैसे आप उससे कह रहे हों कि मुझे कोई चिंता नहीं, आप मेरे बारे में क्या सोचते हैं? और सामने वाला से सोंचने लगे कि आप ही उसे जज कर रहे हैं। यह करने कि बजाय आप विनम्रता से सामने वाला का फीडबैक लेने की कोशिश कीजिए। अगर वे आपको कोई सुझाव देते हैं तो आप इस तरह जवाब दीजिए ‘ओके सर मैं आपकी बात समझ गया। मुझे नहीं लगता इसमें कोई समस्या है। अगर आप मुझे थोड़ा समय दें तो मैं इसे ठीक करने की कोशिश करूंगा। हो सकता है जब अगली बार मैं आपसे मिलने के लिए आऊं तो यह समस्या नहीं आए।’ ये चीज आपके लिए काफी मददगार साबित हो सकती। लोग इसलिए आपको सुनने का मौका देते हैं ताकि उनको कुछ नया सुनने को मिले। आप इस बात का सम्मान करें। वे भी आपकी और हमारी तरह ही हैं। एक दिन में बहुत से आइडियाज़ सुनने की वजह से हो सकता है वे थोड़े रूखे हो सकते हैं पर आप इस बात पर ध्यान मत दीजिए। पिचिंग रूम में किसी भी तरह की नकारात्मक्ता फैलाने की कोशिश मत कीजिए। यह संभव है कि आपने जो लिखा है वो उनके काम का नहीं हो। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। आप वहाँ जाइए अनुभव लीजिए कि काम करने कि पूरी प्रक्रिया कैसी है।   

कमलेश: मैं कहानी का उदाहरण दे कर आपको समझता हूं। मान लीजिए कि आप अपनी कहानी के नायक हैं और आपका उदेश्य है कि किसी भी तरह आपको अपनी स्क्रिप्ट बेचनी ही है। इसलिए जब आप पिचिंग के लिए जाएं तो अपने कहानी का हीरो बन कर जाइए और सामने वाले को 10 मिनट की एक ऐसी शॉर्ट फिल्म दिखाइए जिसमें इमोशन हो, एक्स्प्रेशन हो और  कहानी के किरदार की झलक हो। आपकी कहानी सामने वाले की आंखों के सामने एक लाइव फिल्म की तरह चलनी चाहिए।             

श्रीधर: इसके अलावा और महत्वपूर्ण बात अगर सामने वाले से बात करते समय यदि आपका आत्मविश्वास कमजोर पड़ने लगे या आपको किसी तरह की परेशानी महसूस हो रही हो तो यह भूल जाइये की आपके सामने कौन बैठा है। यह मान कर उससे बात कीजिए वह बिलकुल आपके के ही जैसा एक समान्य आदमी है।      

 

प्रश्न 24-यदि सामने वाले की दिलचस्पी हमारे पिच में नहीं है तो क्या हम अपना विषय बदल सकते हैं?

श्रीधर - यदि आप ऐसा कर सकते हैं तो यह बहुत अच्छी बात है। जब मैं पिच करता हूं, तो हमेशा सामने वाले का हावभाव देखता रहता हूँ यही नहीं मैं अपनी पिच भी रिएक्शन के अनुसार बदलता हूं। कहने का मतलब ये हैं आप यह समझने कि कोशिश कीजिये कि वह क्या चाहते हैं। फिर उसी के अनुसार उसे पूरा कीजिये। 

 

प्रश्न 25- मैं राम सर से निवेदन करता हूं कि वे हमें यह बताएं पिकिंग के दौरान क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए?

राम- सबसे जरूरी है आत्मविश्वास। पिचिंग के समय ऐसा लगना चाहिए कि अपनी कहानी पर आपको शत प्रतिशत भरोसा है। जब कोई यह कहता है वह 10 मिनट में 3 आइडिया पिच कर लेगा तो मैं महसूस करता हूं कि वह सही नहीं कर रहा है। मैं कभी भी आपकी ऐसा करने की सलाह नहीं दूंगा। मैं हमेशा यह पसंद करूंगा कि एक मजबूत और प्रभावी आइडिया या ज्यादा से ज्यादा दो आइडिया ही एक बार में पिच किया जाय। इससे ज्यादा तो बिलकुल भी नहीं। क्योंकि आप वहां एक फिल्म के लिए जा रहे हैं कोई बिजनेस प्रपोज़ल बनाने के लिए नहीं। इसलिए एक प्रभावी आइडिया जिस पर आपकी पकड़ हो, काफी है। इसके अलावा मैं ये भी कहूँगा कि हमें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए कि रूम में कितने लोग हैं।          

प्रश्न 26- शुरूआत कैसे किया जाना चाहिए?

राम मिरचंदानी- शुरुआत अपने काम से कीजिए। बहुत संक्षेप में आप अपनी किस शॉर्ट फिल्म, फिल्म स्क्रिप्ट या फिर टीवी स्क्रिप्ट के बारे में बता सकते हैं। लेकिन सिर्फ यह बताने के लिए बहुत समय खर्च करने की जरूरत नहीं कि मैंने ये भी किया है मैंने वो भी किया है। जितना संक्षिप्त में हो सकता है उतने कम समय में इसे खत्म कीजिए और अपने लॉगलाइन के बारे में बताना शुरू कीजिये। पूरे आत्मविश्वास और सौम्यता के साथ पिचिंग कीजिए।      

प्रश्न 27-  किसी स्टूडियो को फेस करने पहले से क्या खास तैयारी करनी चाहिए?

श्रीधर:- जिस स्टूडियो के पास आप पिचिंग के लिए जा रहे हैं उसके बारे में पूरी जानकारी ले लीजिए कि वह किस तरह की फिल्में बनती है। उदाहरण के लिए यदि आप डिज़्नी के पास अपनी कहानी पिच करने लिए जा रहे हैं तो आप उनसे कहेंगे कि मैं जो कहानी आपको सुना रहा हूं वह खास तौर पर डिज़्नी के लिए ही है। क्योंकि यह बिलकुल उसी तरह की कहानी है जिस आइडिया पर डिज़्नी काम करती है। इसे कहते हैं एक खास स्टूडियो के लिए खास पिचिंग। स्टूडियो यह देख कर खुश होगा किजिस तरह की फिल्में वे बनाते हैं या जिस तरह के कहानी की उन्हें तलाश है, आपने उस पर काम किया है। यदि उन्हें किसी नए आइडिया की तलाश है और आपकी कहानी इसमें फिट बैठती है तो आप जरूरत के अनुसार उन्हें पिच कर सकते हैं। हो सकता है आपका आइडिया उन्हें कुछ करने या कोई नया चैनल खोलने में उनकी मदद करे।  

प्रश्न 28 - राम सर पैनल किस तरह का रहता हैं? क्या इसमें मार्केटिंग के लोग भी रहते हैं?

राम मिरचंदानी:- हां हो सकते हैं। एक समान्यतः पैनल में 4-5 लोग होते हैं जबकि बड़े स्टूडियो के पैनल में 7-8 लोग। इसमें मार्केटिंग, रिसर्च और क्रिएटिव टीम के अलावा दूसरे लोग भी हो सकते हैं जो बिजनेस और फिल्म से जुड़ी हर पहलू के बारे में सोंचते समझते और फिर अपना विचार देते हैं। फिर इन लोगों के विचारों के आधार पर निर्णय लिया जाता है जिसमें इन सभी विशेषज्ञों की राय होती है।  

प्रश्न 29- प्रपोज़ल का मतलब क्या होता है। 

श्रीधर- प्रपोज़ल का मतलब - फिल्म फला फलांबजट में बनेगी -अर्जुन कपूर ऐसे ही विषय की तलाश में है – प्रियंका चोप्रा हीरोइन के तौर पर आ सकती है, कटरीना भी इस रोल के लिए तत्पर होगी – हमने फिल्म फेयर अवार्ड्स के की की भी प्लानिंग कर रखी है – फ़िल्म अगले छः महीनों में फ्लोर पर जा सकती है| लेकिन सुननेवाला यह देख कर हैरान हो जाता है कि मुझे कहानी के बारे में कुछ भी पता नहीं है और आप फिल्म का सारा प्रपोज़ल दे रहे हैं। इसका गलत असर हो सकता है| इसलिए आप कहानी पर ध्यान दीजिए और एक्टर की बजाय अपनी आइडिया से सामने वाले को प्रभावित करने की कोशिश कीजिये।   

 

प्रश्न 30 – सर ‘WhoDunIt’ को कैसे pitch करेगे? क्या आप को ये बताना चाहिए की खुनी कौन है या असली गुनहगार कौन है?

श्रीधर- यदि आप अपनी कहानी पिच करते हैं और वे इसमें दिलचस्पी दिखाते हैं तो यह आपके ऊपर निर्भर करता है कि आप ये बताना चाहते है या नहीं? वैसे मैंने कभी भी ऐसी कहानी पिच नहीं कि जिसमें मुझे यह बताना पड़ा हो कि खूनी कौन है? मैं कभी भी उस तरह से पिच नहीं करूंगा। लेकिन यह व्यक्तिगत राय है।      

राम मिरचंदानी- बिजॉयजब डेविड को पिच कर रहे थे, उसके पहले वे 6-7 स्टूडियो में जा चुके थे। वह अपनी कहानी सुनते पर अंतिम का 15 मिनट छोड़ देते। इसके बाद वह कहते कि यदि आप को मेरा आइडिया पसंद आया तो मेरे साथ एक एमओयू साइन कीजिये कि आप यह फिल्म करेंगे या फिर एक एक एनडीए साइन कीजिये तब मैं आपको अंतिम 12 मिनट की कहानी सुनाऊंगा। तो अगर आपकी कहानी का मूल जुर्म किसने किया इसी आधार पर है तो आप ऐसे भी कर सकते है कि उसका खुलासा बाद में करें|

प्रश्न31- सर आपने हमें हमारे बॉडी लैंग्वेज के बारे में बताया लेकिन सुनने वाले के बॉडी लैंग्वेज पर हम कैसे गौर करें? हमें यह कैसे पता चलेगा कि वह हमारी बात में दिलचस्पी ले रहे है या बोर हो रहे है।  

श्रीधर- यह कोई ऐसी बात नहीं है जिसके लिए आपको ट्रेनिंग लेने की जरूरत है। आपको इस बात को महसूस करना होता है। यदि उन्हें आपकी बाते पसंद नहीं आ रही है तो हो सकता है कि आपकी बातों को सुनने के बजाय वे जंभाई लेने लगें या फिर एसएमएस करने लगें। उस समय आपको यही कोशिश करनी चाहिए कि किसी भी तरह सामने वाले की दिलचस्पी आपकी बातों में बनी रहे। कई बार पिच करने वाले की भटकाऊ बातें सुनकर या आवाज स्पष्ट नहीं होने के कारण सुनने वाला की रुचि खत्म हो जाती है। वह एक दो बार आपसे आपकी बात को दोहराने के लिए कहता है फिर आपकी बात में दिलचस्पी लेना बंद कर देता है। आपको भी किसी बात से विचलित होकर अपना ध्यान भंग नहीं करना चाहिए। आगर आपका ध्यान भंग होगा तो स्वाभाविक है सुनने वाले को भी दिक्कत होगी। उदाहरण के लिए मान लीजिए कि आप हैरी और सैली की कहानी सुना रहे हैं लेकिन आप सैली के किरदार का वर्णन में खो गए है उसकी सुन्दरता और मिलनसार स्वाभाव को बयान करने में मुख्य कहानी से भटक जाते है तो सामनेवाला उलझ जायेगा और जल्द बोर होने लगेगा।  अपने पसंदीदा सीन या किरदार के बारे में ज्यादा से ज्यादा बताने के चक्कर में अपनी पिचिंग को मत प्रभावित कीजिये। 

 यदि आपको मन में किसी बात को लेकर कोई शंका है तो सामने वाले से पूछ सकते हैं। जैसी ‘क्या मैं ज्यादा आगे आ गया या कहीं मैं ज्यादा तेज तो नहीं बोल रहा, इतना ठीक रहेगा, क्या मैं इस प्वाइंट के बारे में बताऊं। यह बिल्कुल समान्य-सी बात है। आप ऐसे बात कीजिए जैसे आप अपने किसी जानने वाले से बात करते हैं। ये तो बिल्कुल भी मत सोचिए कि आप कोई टेस्ट दे रहे हैं या फिर आपको किसी को इंप्रेस करना है। जितना हो सके उतना आराम से आप अपनी बात कहिए।  

प्रश्न 32 -जब मुझसे पहले कोई मेरे आइडिया से मिलती जुलती कहानी सुनकर गया तो ऐसे में सामने वाले को अपनी कहानी की दुनिया में ले जाना मुश्किल नहीं होगा?

उत्तर- यही आपकी पिचिंग स्किल्स काम आती है। आपको किसी भी तरह उन्हें अपनी दुनिया के बारे में बताना है। अगर आपने पहले भी इसका अभ्यास किया है तो यह मुश्किल नहीं है। जरूरत पड़े तो अपनी बात को बताने के लिए आप उदाहरणों का सहारा ले सकते हैं।   यदि कोई आपसे पहले आप जैसा ही आइडिया पिच कर चुका है तब सवाल उठता है कि आपके कहानी की यूएसपी / विशेषता क्या है। अगर इतनी आसानी से एक आईडिया पर दो लोग कम कर रहे है तो सुनाने वाले को उसमे ज्यादा रूचि नहीं रह जाती| इस स्थिति में सामने वाले को वही आइडिया फिर से सुननाभी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में उसे अपनी कहानी की दुनिया में ले जाने की बात तो आप भूल ही जाइये।   

Compiled By - Sanjay Sharma
Video Editor - Jitendra Kuche 
Shot By - Sumant Prajapati

हिंदी अनुवाद  -

रुद्रभानु प्रताप सिंह

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