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Just One Scene
बॉबी जासूस(2014)


 

 

 

केवल एक सीन

बॉबी जासूस(2014)

लेखक- संयुक्ता चावला शेख ; निर्देशक - समर शेख

‘केवल एक सीन’ इस शृंखला में हम भारतीय फ़िल्मों के यादगार दृश्यों पर चर्चा करते हैं. हमारी कोशिश होती है कि ऐसे दृश्यों को चुना जाए जो बिल्कुल पाठ्य-पुस्तक के मुताबिक हों, जिनमें किसी अच्छे दृश्य की सारी ख़ूबियाँ हों और जो हमारे ज़हन में हमेशा के लिए बस जाएं.

मैंने वर्तमान सीन को बॉबी जासूस(2014) फ़िल्म से चुना है, जिसमें बॉबी यानी बिल्किस, तसव्वुर को उसके पिता से बात करने के लिए भेजती है ताकि उनकी होनेवाली शादी को रोका जा सके. लेकिन दर्शकों को एक मजेदार सरप्राइज़ देते हुए सीन किसी और ही मोड़ पर ख़त्म होता है.

आखिर मैंने इस सीन को क्यों चुना या मुझे ऐसा क्यों लगता है कि ये एक पाठ्य-पुस्तक वाला सीन है?

  1. इस सीन में एक मुकम्मल थ्री एक्ट स्ट्रक्चर है. इसमें एक ठोस सेट-अप है, एक मिडल और सुखद आश्चर्य भरा, संतुष्ट करने वाला रेजोल्युशन है.
  2. यह सीन एक नयी फ़िल्म से है. क्लासिक फ़िल्मों में ऐसे सीन बहुत देखने को मिलते हैं. इसी शृंखला की पहली कड़ी में हमने जॉनी मेरा नाम(1970) फ़िल्म के एक दृश्य का श्रीमान सौरभ शुक्ला द्वारा किया गया विश्लेषण पढ़ा था. जॉनी मेरा नाम का वह दृश्य कई मायनों में यादगार है. उसके बारे में आप यहाँ पढ़ सकते हैं.
    इस सीन की चर्चा इसलिए भी ख़ास है क्यूँकि वो एक हालिया रिलीज़ फ़िल्म का है और आजकल की फ़िल्मों में ऐसे दृश्य कम ही देखने को मिलते हैं.
  3. यह एक छोटा और प्रभावशाली सीन है. पाँच मिनट से भी कम लंबाई वाले इस सीन में फ़िल्म के मुख्य कलाकारों के द्वंद्वों और अपने भीतरी सच के अहसास को बखूबी उजागर किया गया है.

यह दृश्य हँसी-मज़ाक से शुरू होकर एक गंभीर नाटकीय मोड़ ले लेता है और ख़त्म होते-होते आपको एक रोमानी गुदगुदाहट से सराबोर कर देता है.

कमोबेश यह सीन फ़िल्म से स्वतंत्र है इसलिए भी इसपर बात करना बेहतर है. ऐसा बहुत कम ही होता है जो कि अध्यन के लिए एक आदर्श सीन हो जाता है, इस सीन पर चर्चा करने के लिए फ़िल्म की पूरी कहानी पर बात करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी.

सीन से पहले का सेट-अप (जिसे पहले फ़िल्म में दिखाया जा चुका है.)

तसव्वुर और बिल्किस(बॉबी) के बीच एक खट्ठा-मीठा संबंध है. एक-दूसरे को सबक सिखाने के चक्कर में दोनों की आपस ही में शादी तय हो जाती है. लेकिन दोनों का ध्यान अपने करियर पर है इसलिए वो शादी नहीं करना चाहते है और एक-दूसरे के प्रति अपनी भावनाओं को भी पहचान नहीं पाते हैं. दर्शक के तौर पर हम देख सकते हैं कि दोनों के बीच एक मधुर संबंध है और हम चाहते हैं कि दोनों एक-दूसरे के हो जाएं लेकिन वो ख़ुद इसे नज़रअंदाज करते रहते हैं और एक-दूसरे की खिचाई करने में लगे रहते हैं.

इस सीन में दोनों अपनी शादी तुडवाने की कोशिश कर रहे हैं और ...

सीन कुछ यूँ शुरू होता है -

देर शाम बिल्किस तसव्वुर के घर पर पहुँचकर उसे बाहर बुलाती है. वो घर के बाहर एक पतली गली में मिलते हैं. बाहर आकर तसव्वुर पूछता है कि उसने उसे क्यों बुलाया तो वो उसके शर्ट के बटन खोलने लगती है. वो हैरान रह जाता है और वो कुछ समझ पाए बॉबी उसकी शर्ट के अंदर एक जुगाड़ वाला वाकी-टाकी जैसा सिस्टम लगा देती है जिसमें एक माइक छुपा होता है. बॉबी इस जुगाड़ के सहारे दूर से भी तसव्वुर की बातचीत सुन सकती है और उससे बात कर सकती है. बॉबी की योजना है कि वो इस जुगाड़ के साथ तसव्वुर को उसके पिता के पास शादी तोड़ने के लिए भेजेगी और दोनों की बात सुनेगी और जब-जब तसव्वुर को ज़रूरत होगी वो उसे दूर से ही बता सकेगी कि उसे क्या-क्या बोलना है. बॉबी उसे कहती है कि वो अपने पिता से जाकर कहे कि बॉबी अच्छी लड़की नहीं है इसलिए वो शादी तोड़ना चाहता  है.

सीन का आइडिया मौलिक है और सेट-अप उम्दा. बॉबी तसव्वुर के पैर में बिना बताए एक 10वोल्ट का ज़ैपर भी लगा देती है जिससे जब वो कोई गड़बड़ करे तब वो उसे झटका दे सके. हमें यह समझ सकते हैं कि बिल्किस एक जासूस है और ऐसी चीज़ों का जुगाड़ उसके लिए आम बात है.

ये सबकुछ तसव्वुर के घर के बाहर होता है. इसके बाद वो घर के अंदर आता है. वो ज़ैपर को लेकर असहज महसूस कर रहा है और उसे निकालने की कोशिश करता है, तभी उसे पहला झटका लगता है. इसके बाद बिल्किस उसे ज़ैपर के बारे में बताती है, वो उसे फिर निकालने की कोशिश करता है कि तभी उसकी माँ आ जाती है और उसे ज़ैपर निकाले बिना ही कमरे के अंदर पड़ता है. कमरे के अंदर भी वो एक बार फिर ज़ैपर निकालने की कोशिश करता है लेकिन तभी उसके पिता आ जाते हैं. इस सब घटनाओं से जबरदस्त हास्य पैदा होता है. बिल्किस उसके कान में कहती है कि वो अपने पिता से कहे कि वो शादी जैसा अहम फैसला बहुत जल्दबाज़ी में ले रहा है और वो इस शादी से ख़ुश नहीं है.

तसव्वुर एक साथ अपने पिता और वाकी-टाकी पर बिल्किस से बात करने के कारण गड़बड़ करने लगता है. उसकी हालात से दर्शकों के लिए मजेदार कॉमेडी पैदा होती है. उसे ये सब करना बहुत बेवकूफी भरा लग रहा है और वो इन सबसे बचने की कोशिश भी करता है लेकिन....

यहाँ से कॉमेडी ख़त्म होती है, सीन में एक गंभीर नाटकीय मोड़ आ जाता है... तसव्वुर के पिता बिल्किस को बुरा-भला कहते हैं और वो उसका बचाव करने लगता है. जब आप किसी से प्यार करते हैं तो आप भले उसे लड़े-झगड़ें लेकिन उसे कोई ऊँच-नीच कहे तो आपको बर्दाश्त नहीं होता. तसव्वुर अपने पिता के ख़्यालों को रूढ़िवादी बताता है और बिल्किस की तारीफ करते हुए अनजाने में यह जाहिर करता है कि वो उसे पसंद करता है और खुद भी इस बात का हल्का एहसास करता है.

सीन का नाटकीय तनाव बढ़ता जाता है क्योंकि गली में खड़ी बिल्किस सारी बातचीत सुन रही है. उसे उस भावना का पहली बार अहसास होता है जिसे दोनों ने अब तक नज़र-अन्दाज़ कर रखा था. उसके चेहरे के भाव उसके नारीसुलभ रूप को जाहिर करते हैं जो अबतक बॉबी जासूस के तेज़-तर्रार रूप के नीचे छुपा हुआ था. ध्यान देने की बात है कि तसव्वुर के पिता ने कुछ देर पहले उसका अपमान किया था. दर्शक के तौर पर तसव्वुर के पिता द्वारा उसकी बुराई करने से हमारी सहानुभूति बिल्किस के प्रति बढ जाती है. तसव्वुर जब उसकी तारीफ करता है तो हमें बिल्किस पर गर्व होने लगता है और दोनों को उनकी भावनाओं का एहसास होता देख एक तरह का समाधान होने लगता है.

तसव्वुर के जवाब से उसके पिता हैरान रह जाते हैं और जब वो ये जानने की कोशिश करते हैं कि वो कहना क्या चाहता है तो सीन में एक बार फिर थोड़ा हल्का-फुल्का माहौल तैयार हो जाता है. सीन की शुरुआत में जिस लड़की से वो छुटकारा पाना के लिए आया था सीन के अंत तक वो उसी लड़की की तारीफों के पुल बांधने लगता है.

अपने पिता के सवाल का तसव्वुर जो जवाब देता है वो पूरे सीन को एक मुकम्मल अंत देता है.

पिता – तू बात क्या करना चारा है?

तसव्वुर – मैं थोडा कन्फ्यूज्ड हूँ..था..

(यहाँ तसव्वुर का हूँ को सही करके था कहना बहुत मानीखेज है. पहले वो बिल्किस को लेकर कन्फ्यूज्ड था लेकिन अब बिल्कुल नहीं है.)

तसव्वुर कमरे से उठकर सीधे गली में उसका इंतजार कर रही बिल्किस के पास आता है.

दोनों में अब बहुत कम बोल रहे हैं जिससे सीन की ख़ूबसूरती बढ़ जाती है. बिल्किस कह कुछ और रही है जबकि वो कहना कुछ और चाहती है. वो उससे जुगाड़ निकालने को कहती है क्योंकि उसे वो वापस करना है. ध्यान देनेवाली बात है की सीन की शुरुवात में बिल्कीस खुद अपने हाथो से जुगाड़ लगाती है लेकिन अब वो ऐसा ना करते हुए तस्सवुर से जुगाड़ निकलने को कह रही है – क्युंकी अब वो तस्सवुर को उस तरह छूने से शरमा रही है. प्यार का इज़हार करने के बाद उभरने वाली सारी भावनाएँ यहाँ पूरी तरह जाहिर हैं. अच्छे अभिनेता हों तो अच्छे दृश्य में कई मायने पैदा हो जाते हैं....

तसव्वुर का किरदार बहुत कम बोलता है इसलिए वो कमेंट करती है कि आज उसे पता चला कि उसके 'मुँह में भी ज़ुबान' है.

इस कमेंट का अंतरपाठ भी साफ़ है. बिल्किस के कमेंट का आशय है कि तसव्वुर उससे तो अपने दिल की बात नहीं कह पाता लेकिन एक ऐसा आदमी (उसके सख्त पिता) जिससे वो डरता है उसके सामने वो बोल पड़ा...

किसी भी अन्य आम लड़की की तरह बिल्किस भी ऐसे समय में असहज हो जाती है और वो तसव्वुर को बस इतना कह के चल देती है कि "कुछ और सोचिंगे."

मेरे लिहाज से किसी भी प्रेम कहानी का सबसे ख़ास पड़ाव वो होता है जब आपको प्यार को अहसास होता है और आप फिर उस लड़की को प्रपोज करते हैं. इस फ़िल्म में ये दोनों बातें बहुत ही ख़ूबसूरत और अलहदा तरीके से होती हैं. अगले ही सीन में फ़िल्म में इसे पूरी तरह स्पष्ट कर दिया जाता है. फिर इस बात में कोई संदेह नहीं रहा जाता कि दोनों को एक दूसरे से प्यार है.

सीन के फर्स्ट एक्ट में, तसव्वुर के शर्ट के बटन खोलना, जुगाड़ लगाना और झटके खाना कॉमेडी पैदा करता है...

मिडिल एक्ट में, तसव्वुर अपने सख्त पिता का सामना करता है. यहाँ एक गंभीर नाटकीयता पैदा होती है. तसव्वुर का अब तक छुपा हुआ रूप सामने आता है और वो अपनी विचार व्यक्त करता है....

लास्ट एक्ट में, अब तक दबे रहे प्यार की अभिव्यक्ति होती है और सीन एक भावुक अंत पर ख़त्म होता है. दर्शक के तौर पर हमे 'संतुष्टि' मिलती है क्योंकि हमें इस बात का इंतज़ार था कि ये दोनों आखिर कब एक-दूसरे के दिल की बात समझेंगे.

 

बॉबी जासूस का रोमांटिक ट्रैक न केवल अलग बल्कि अपनी तरह का अकेला है. ये कहानी का बहुत ही रुचिकर और उम्दा सब-प्लाट है. किसी हालिया फ़िल्म में प्रेम की इतनी सहज और सुंदर प्रस्तुति शायद ही देखने को मिली हो.

फ़िल्म के स्क्रीनप्ले में इस सीन को हूबहू पढ़ने के लिए यहाँ पर क्लिक करें. इस सीन को एक बार फिर यूट्यूब पर भी ज़रूर देखें.

बॉबी जासूस का सीन, संयुक्ता चावला शेख(बॉबी जासूस की लेखिका) से साभार.

-संजय शर्मा  ( अनुवाद- रंगनाथ सिंह)

 

 

 


-Sanjay Sharma

Critic who loves to appreciate.

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