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Just One Scene
जॉनी मेरा नाम (1970)


 

 

 

जस्ट वन सीन

जॉनी मेरा नाम (1970)

-सौरभ शुक्ला

(अनुवाद- रंगनाथ सिंह)

निर्देशन, स्क्रीनप्ले, डॉयलॉग, - विजय आनन्द, कहानी - केए नारायण

किसी एक फ़िल्म से किसी एक सीन को चुनना काफ़ी कठिन है क्योंकि ऐसी बहुत सी फ़िल्में हैं जिन्हें मैं बहुत पसंद करता हूँ लेकिन इनमें जॉनी मेरा नाम का क्लामेक्स सीन हिन्दी सिनेमा के उन सीन में है जिनका ज़िक्र मैं ज़रूर करना चाहूँगा. मुझे लगता है इस फ़िल्म का क्लाइमेक्स शानदार है जिसे आसानी से मास्टरपीस कहा जा सकता है. यह सीन एक बहुत लंबे सीक्वेंस के बाद आता है. स्क्रीनप्ले के किताबों में सीन लिखने के बारे मे कई बातें कही जाती हैं, जैसे कोई सीन चार पेज से ज़्यादा लम्बा नहीं होना चाहिए और ऐसी ही दूसरी बहुत सी बातें. ये एक आम धारणा है कि सीन यथासंभव छोटे होने चाहिए. अगर यह क्लाइमेक्स का सीन है तो उसमें लोकेशन वगैरह बदल देना चाहिए.  

जॉनी मेरा नाम का क्लाइमेक्स क़रीब 20-22 मिनट लम्बा है. इसमें स्क्रिप्ट राइटिंग के कई परंपराओं को तोड़कर कुछ जादुई प्रभाव पैदा किय गया है. यह सीन कुछ यूँ हैः

मोनू(मोहन) और सोनू(सोहन) दो भाई हैं. उनके पुलिस इंस्पेक्टर पिता की हत्या हो जाती है. एक भाई, सोहन(देव आनन्द) बड़ा होकर एक अंडरकवर पुलिस अफ़सर बन जाता है और दूसरा भाई मोहन(प्राण) एक अपराधी बन जाता है और उसी आदमी, रंजीत(प्रेम नाथ) के लिए काम करता है जिसने उसके पिता की हत्या करवायी थी.

सोहन एक छोटे-मोटे चोर जॉनी का भेष धरकर जेल में बंद कुख्यात स्मगलर हीरालाल(जीवन) से दोस्ती कर लेता है. हीरालाल उसे रेखा (हेमा मालिनी) से मिलने को कहता है. जॉनी रेखा से मिलता है और इस गैंग में घुस जाता है. गैंग का सरगना मोहन(मोती) है. जॉनी को पता चलता है कि रेखा के पिता राय साहब भूपिंदर सिंह रंजीत के क़ैद में हैं. इसी बीच हीरा को जॉनी की असलियत का पता चल जाता है और वो मोती के जेल से बाहर आते ही उसे यह बात बता देता है.

इसका बाद शुरू होती है मिलने-बिछड़ने वाली, उतार-चढ़ाव भरी और फरेब के अंदर छुपे फरेब की दास्तान. 'बिछड़े भाइयों के वापस मिलने'  के महान सीन से क्लाइमेक्ट का टोन सेट होता है जिसमें विजय आनन्द ने अंतिम क्षण तक एक्शन और ड्रामा बनाए रखा है.

क्लामेक्स शुरू होता है रंजीत द्वारा की जा रही एक नीलामी से. उधर जॉनी ने पुलिस कमिश्नर के साथ मिलकर एक प्लान बनाया है जिसमें मोती भी शामिल है. मोती हीरा के पास जाकर उसे रंजीत(नकली राय साहब) से मिलने के लिए उकसाता है. जॉनी और पुलिस कमिश्नर रंजीत के ठिकाने के बाहर सही वक़्त का इंतज़ार करते हैं. वो तब तक कोई एक्शन नहीं ले सकते जब तक जॉनी की माँ हीरा की क़ैद से आज़ाद नहीं हो जातीं. मोती और हीरा रंजीत के ठिकाने पर पहुँचते हैं. मोती हीरा के कोट में एक माइक्रोफ़ोन छिपा देता है जिसकी आवाज़ कमिश्नर मेहता के टेप रिकॉर्डर में सुनायी देती है. जब हीरा रंजीत से मिलता है तो वो उसे बता देता है कि जॉनी और मोती गद्दार हैं.  स्टोरी में इतने घुमाव आते हैं कि रंजीत समझ नहीं पाता कि वो किसकी बात पर यकीन करे और किसकी बात पर न करे.

यह पूरा सीक्वेंस बहुत ही कमाल का लिखा गया है जिसमें आईएस जौहर की तिहरी भूमिका(पहला राम, दूसरा राम, तीसरा राम) को बखूबी पिरोया गया है.  सभी कालाकारों ने बहुत उम्दा काम किया है. मुझे इस  सीक्वेंस की एक बात और बहुत पसंद है कि इसे बहुत ही सरल तरीके से शूट किया गया है. इसके दृश्य बहुत सुंदर है लेकिन पूरे सीक्वेंस में दृश्यों की बाज़ीगरी दिखाने की कोई कोशिश नहीं की गयी है. यह विजय आनन्द के अंदर का जीनियस फ़िल्मकार ही था जो इस सीक्वेंस के अंदर के असल ड्रामे को उभार पाया. इतनी सरलता से इस सीक्वेंस को शूट करने के लिए बहुत आत्मविश्वास की ज़रूरत होती है क्योंकि ज़्यादातर फ़िल्मकार क्लाइमेक्स शूट करने में अतिवाद के शिकार हो जाते हैं. फ़िल्म के क्लाइमेक्स को लेकर वो थोड़ सशंकित रहते हैं और उन्हें लगता था कि ये फ़िल्म का बहुत की ख़ास क्षण है इसलिए इसके लिए एक शाहकार रचना होगा. आमतौर पर आदमी ऐसे मौक़ों में बहक जाता है और ढेर सारे जोड़तोड़ करता है. लेकिन जॉनी मेरा नाम के क्लाइमेक्स में आप देखेंगे कि विजय आनन्द ने सीन के अंदर छिपे ड्रामा को बनाए रखा है.

क्लाइमेक्स शुरू होने से पहले के आखिरी सीन में हीरा जॉनी की माँ को अग़वा कर लेता है और उसे यह भी पता चल गया है कि जॉनी और मोती मिले हुए हैं और वो दोनों पुलिस कमिश्नर मेहता से मिलने वाले हैं. दोनों भाई कमिश्नर से मिलते हैं, थोड़ी बातचीत के बाद कमिश्नर उन्हें बताते है कि उनके पास एक प्लान है. उसके बाद कुछ यूँ होता हैः

इन्टीरियर, रंजीत का ठिकाना, रात

नीलामी शुरू होती है. ख़रीदारों में कई विदेशी भी हैं. रंजीत व्हीलचेयर पर बैठे भूपिंदर सिंह के साथ आता है.

रंजीत

(भूपिंदर से) जो सिखाया गया है उससे एक लफ़्ज़ भी इधर-उधर कहा भूपिंदर तो एक सेकेण्ड में तुम्हारी बेटी का सर धड़ से अलग कर दिया जाएगा. समझ गए?

भूपिंदर

हाँ समझ गया.

रंजीत

(ताली बजाता है) अटेंशन लेडीज़, जेटिंलमैन. मीट द फैबुलस ओनर ऑफ फैबुलस कलेक्शन ऑफ़ जूल्स, माई मास्टर रायसाहब भूपिंदर सिंह...रायसाहब इजाज़त हो तो नीलामी शुरू करूँ?

भूपिंदर

इजाज़त है.

रंजीत

जेटिंलमैन...शैल वी प्रोसीड विथ दी ऑक्शन नाओ? नाओ दिस आइटम नंबर वन हीयर इज़ द मोस्ट फैबुलस ऑफ़ ऑर कलेक्शन, इट इज़ द क्राउन ऑफ़ लार्ड कृष्ण?

कट टूः

एक्सटीरियर, कोई बाहरी झाड़ी, रात

जॉनी और कमिश्नर मेहता एक टेप और रस्सी के साथ इंतज़ार कर रहे हैं.

कमिश्नर मेहता

पहला राम कहाँ है?

जॉनी

अपने दोनों भाइयों को लेने गया है.

कमिश्नर मेहता

हम्म, काम आएंगे.

जॉनी

नीलामी ख़त्म हो चुकी है.

नोट - विजय आनन्द यहाँ बिल्कुल समय नहीं गंवाते. वो हमें नीलामी का सीन नहीं दिखाते जो हम दर्जनों फ़िल्मों में देख चुके हैं. वो पूरी नीलामी को देव आनन्द के एक डॉयलॉग में समेट लेते हैं और इतनी ख़ूबसूरती से टाइम-लैप्स करते हैं कि हमारे ज़हन में यह सवाल भी नहीं उठता कि नीलामी कैसे हुई? क्या सारा सामान बिका? दरअसल, ये सारी जानकारी अगले सीन में दी गयी है.)

कट टूः

एक्सटीरियर, रंजीत का ठिकाना, रात

नीलामी ख़त्म हो चुकी है. ख़रीदार जा रहे हैं.

रंजीत

(हंसते हुए) राय साहब, राय साहब...आपका बहुत बहुत शुक्रिया है राय साहब. ख़ादिम ने आज आपके नाम पर दो करोड़ रुपये कमा लिए, दो करोड़! ये हे कोई है? कम हीयर! राय साहब को पाँच-सात दिन के लिए राजमहल ले जाओ.

कट टूः

एक्सटीरियर, रंजीत का ठिकाना, रात

नीलामी से वापस लौट रहा कारों का एक काफिला. जॉनी और कमिश्नर उन्हें आते हुए देखते हैं और जॉनी सीटी बजाता है. कुछ ही देर में पुलिस कारों को रोक लेती है और स्मग्लरों को पकड़ लेती है.

(नोटः एक बार फिर, जरा भी समय नहीं बर्बाद किया गया. एडिटर ने कारों के रुकते ही सीन को काट दिया और पुलिस के जवान झाड़ियों से बाहर आ जाते हैं. जिस किसी को भी स्क्रीनप्ले में किफ़ायत का अभ्यास करना है उसके लिए ये अच्छा उदाहरण है.)

कट टूः

इन्टीरियर, एक शराब बार, रात

हीरा बार में बैठकर शराब पी रहा है. मोती उससे मिलने आता है.

हीरा

क्या हुआ मोती?

मोती

तुम रायसाहब से मिलना चाहते ते न हीरा? चलो, लेकिन एक शर्त है.

(ये कमिश्नर मेहता के प्लान का पहला हिस्सा है. मोती शर्त रखकर हीरा को बेवकूफ बना रहा है. एक बार फिर किफायत दिखायी गयी है. पूरा सीन एक शॉट में बिना किसी कट के पूरा हो जाता है.)

हीरा

क्या शर्त है?

मोती

तुम राय साहब को नहीं बताओगे कि मैंने जॉनी के बारे में कितना बड़ा धोखा खाया है.

हीरा

मंज़ूर है

मोती

...और वैसे भी जॉनी अब ज़िंदा नहीं है. आओ मेरे साथ.

मोती चला जाता है. हीरा अपने आदमी से फुसफुसा कर बात करता है जो पहले चोरी से दोनों की बात सुन रहा होता है.

हीरा

हमारे पीछे-पीछे आओ

(नोटः हीरा ने अपनी योजना बना रखी है. मोती और हीरा दोनों एक-दूसरे को बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रहे हैं.)

कट-टू

इन्टीरियर, रंजीत का ठिकाना, रात

मोती

गफूर, राय साहब से कह दो कि मोती आया है...(तो हीरा) देखो हीरा, मैंने अपना वादा पूरा कर दिया अब तुम अपने वादे का ख़्याल रखना.

(नोट- मोती हीरा को फिर से उकसाता है और उसे याद दिलाता है कि वो अपना वादा पूरा नहीं कर रहा है, जो कि मोती चाहता है.)

हीरा

घबराओ नहीं, आज तक ऐसा हुआ है कि हीरा ने अपना वादा ना निभाया हो?

हीरा के ऐसा कहते ही मोती उसकी कोट की जेब में चोरी से माइक्रोफ़ोन डाल देता है.

(नोट- योजना का दूसरा हिस्सा- हीरा के कोट में डाले गए माइक्रोफ़ोन की बाद की घटनाओं में नाटकीय भूमिका होगी. यहाँ आगे के सीन में शानदार साउंड कनेक्ट भी देखने लायक होगा.)

कट-टू

एक्सटीरियर, झाडियाँ, रात

जॉनी और पुलिस कमिश्नर हीरा की बातचीत माइक्रोफ़ोन के सहारे सुनते हैं.

कमिश्नर मेहता

(जॉनी से) तो अगर ये हीरा दगाबाज़ ना निकला तो हमारा सारा प्लान फेल हो जाएगा. ये रंजीत सिंह को ज़रूर बताएगा कि इसने तुम्हारी माँ को कहाँ छुपा रखा है.

(नोट- यहाँ कमिश्नर मेहता की योजना जाहिर होती है. वो चाहते हैं कि हीरा उनके योजना के अनुसार रंजीत को सबकुछ बता दे)

कट-टू

इन्टीरियर, रंजीत का ठिकाना, रात

हीरा कई बंदूकधारियों को देखकर डर जाता है.

हीरा

मोती, ये क्या है?

मोती

इसका मतबल है राय साहब किसी नये आदमी से मिलने वाले हैं. ये उनके बॉडीगार्डस हैं.

रंजीत सीढ़ियों से नीचे उतरता है.

रंजीत

मोती, तुम आज ऑक्शन में क्यों नहीं आये, क्या बात है? और इतनी देर से कैसे आये?

ये कौन है?

मोती

राय साहब

ये हमारा बहुत ही पुराना और वफादार आदमी है...

रंजीत

हाँ, हाँ मैं पहचानता हूँ इसे, हीरा इसका नाम है लेकिन इसे यहाँ कैसे लाये?

मोती

आज से ये जॉनी की जगह यहाँ आया करेगा.

रंजीत

जॉनी की जगह क्यों?

मोती

राय साहब जॉनी का मुझे ख़ून करना पड़ गया.

रंजीत

ख़ून?

(नोट- रंजीत के लिए पहला सरप्राइज, उसे जल्द ही और सरप्राइज मिलने वाले हैं.)

मोती

जी हाँ उसकी वफादारी पर मुझे शक हो गया था?

रंजीत

जॉनी की वफादारी पर शक? बात मुझे कुछ समझ नहीं आ रही है.

हीरा

बात एकदम सीधी है राय साहब आप कहें तो मैं दो लफ़्जों में समझा दूँ...

मोती

(ऊँची आवाज़ में) तुम बोलो जब तुम्हें बोलने के लिए कहा जाए?

(नोट- प्राण की शानदार प्रतिक्रिया. दरअसल, यह पूरा सीक्वेंस सभी अभिनेताओं के संवाद अदायगी पर निर्भर है, जो बेहद उम्दा है.)

रंजीत

ये मामला क्या है? बोलने दो उसे

हीरा

राय साहब...

मोती

हीरा!

हीरा

मोती, अगर तुम्हें सुनने में तकलीफ होती है तो मैंने राय साहब के कान में कह देता हूँ.

हीरा रंजीत को किनारे ले जाकर उसके कान में फुसफुसाता है.

(मोती जानबूझकर हीरा को ऐसा करने देता है.)

हीरा

आप आस्तीन में साँप पाल रहे हैं राय साहब. मोती दगाबाज़ है. पुलिस को इस अड्डे की ख़बर हो चुकी है. अगर मैं ना होता तो इस वक़्त तक यहाँ घेरा पड़ चुका होता.

(नोट- हीरा ने मोती को धोखा देकर पाला बदल लिया.)

रंजीत

अगर यह बात ग़लत निकली तो मैं तुम्हारी ज़बान काट डालूँगा.

हीरा

ज़रूर...जॉनी ख़ुफ़िया पुलिस का इंस्पेक्टर है. मोती उसका ख़ून करने निकला तो था लेकिन मैंने अपनी आँखों से उन दोनों को गले मिलते देखा है.

(नोट- हीरा ने लॉन्ग शॉट में दोनों भाइयों को देखा था. स्क्रीनप्ले में ये बात अभी छुपाकर रखी गयी है, हीरा को अब भी नहीं पता की जॉनी और मोती भाई हैं.)

रंजीत

जॉनी इस वक़्त कहां है?

हीरा

बंबई का कमिश्नर भी इसी सिलसिले में काठमांडू आया हुआ है. जॉनी उसके पास बैठा हुआ अपनी किस्मत को रो रहा होगा. क्यूँकि मेरी इजाज़त के बग़ैर वो एक कदम भी नहीं उठा सकता, उसकी माँ मेरे क़ब्ज़े में है.

(नोट- हीरा हकलाता है. उसे नहीं पता कि जॉनी उससे बस चंद कदम दूर हो सकता है.)

रंजीत

कहाँ है?

हीरा

जहाँ किसी को शक भी नहीं हो सकता.

रंजीत

बताओ मुझे, मैं तुम्हें मुँह-माँगा इनाम दूँगा.

हीरा

पहले आप मोती का इलाज कीजिए.

(नोट- अगर हीरा रंजीत को जॉनी की माँ का पता बता देता तो कमिश्नर मेहता की योजना सफल हो जाती. लेकिन विजय आनन्द नहीं चाहते कि ये इतनी आसानी से हो जाए. अब उन्हें नई जुगत लगानी होगी.)

रंजीत

कोई है? मोती को गिरफ़्तार कर लो!

कट-टू

एक्सटीरियर, झाड़ियाँ, रात

जॉनी और पुलिस कमिश्नर सारी बातचीत को टेप रिकॉर्डर पर रिकॉर्ड कर रहे होते हैं.

जॉनी

अब?

कमिश्नर मेहता

प्लान नंबर टू...पहला राम!

पहला राम

यस सर

(नोट- प्लान नंबर टू का मतलब है कि कमिश्नर मेहता के दिमाग़ में कुछ और योजना है जिसके बारे में जॉनी को नहीं पता.)

कट-टू

इन्टीरियर, रंजीत का ठिकाना, रात

रंजीत मोती से पूछताछ करता है, हीरा भी वहाँ खड़ा है. उनके चारों तरफ़ हथियारबंद लोग हैं.

रंजीत

हीरा ने मुझे जो कुछ भी बताया वो सब कहाँ तक सच है मोती?

मोती

जाने इस गद्दार ने आपको क्या बताया है राय साहब. इस मक्कार की बातों में ना आएँ.

रंजीत

अगर ये गद्दार है तो तुम इसे यहां क्यूँ लेकर आये? रेखा को यहाँ तक का रास्ता किसने बताया? कोई मेरी पीठ में छुरा भोंकने की कोशिश कर रहा है. कौन है वो?

मोती

राय साहब!

रंजीत

(ऊँची आवाज़ में) राय साहब के बच्चे जॉनी के साथ मिलकर क्या साज़िश की है तुमने मेरे ख़िलाफ़? बोलो! नहीं तो तुम्हारे जिस्म की बोटी-बोटी करके चील-कौवों को खिला दूँगा मैं.

जॉनी पहला राम और कमिश्नर मेहता के साथ अंदर आता है. कमिश्नर के हाथ पीछे बंधे हुए हैं. कमिश्नर के हाथ में टेप रिकॉर्डर भी है.

(नोट - मोड! जॉनी रंजीत के अड्डे में घुसने की हिम्मत करता है! दर्शकों को नहीं पता कि वो क्या करने वाला है. अब हम फ़िल्म की अगले दृश्यों का अनुमान लगाना भूलकर पूरी तरह सीन में खो चुके हैं.)

जॉनी

रुक जाइए राय साहब रुक जाइए. साज़िश की है मोती ने जॉनी के साथ मिलकर लेकिन आपके ख़िलाफ़ नहीं दुश्मनों के भंडा फोड़ के लिए!

पहला राम

अरे चल

जॉनी

चल

जॉनी

हीरा ने आपसे ज़रूर कहा होगा कि मैं ख़ुफ़िया पुलिस का आदमी हूँ. लेकिन पुलिस का आदमी कौन है आपको इस से मालूम हो जाएगा.

रंजीत

ये कौन है?

जॉनी

हीरा से पूछिए ये कौन है?

रंजीत

कौन है ये?

हीरा

बंबई का कमिश्नर

रंजीत

पुलिस कमिश्नर?

जॉनी

यहाँ क्या कर रहा है?

हीरा

मुझसे क्या पूछते हो?

जॉनी

(ऊँची आवाज़ में) और किस से पूछें?

(नोट- इस पूरे सीक्वेंस के केंद्र में देव आनन्द हैं. सीन में वो जिस तरह आते हैं उससे वो रंजीत के ऊपर हावी हो जाते हैं. उनमें भरपूर आत्मविश्वास है, पूरी तरह से उत्तेजित हैं और तेज़ आवाज़ में बात करते हैं ताकि रंजीत केवल वही सुने जो वो कहना चाहते हैं. जॉनी जैसा वाचाल आदमी या तो दुनिया का सबसा ईमानदार आदमी होगा या दुनिया का सबसे शातिर बदमाश. है ना? देव आनन्द ने पूरे सीन को कैसे निभाया है यह देखने लायक है.)

रंजीत

इसी से पूछो

जॉनी

नहीं राय साहब मुझसे पूछिए...ये कमिश्नर झाड़ियों में छुप के ये रेडियो सुन रहा था.

रंजीत

हुह, रेडियो?

जॉनी

(अभिनय करते हुए) रेडियो सीलोन नहीं, रेडिय विविध भारती नहीं, इस कमरे में जो हो रहा है वो नाटक सुन रहा था.

रंजीत

ये कैसे हो सकता है?

जॉनी

क्यूँ नहीं हो सकता? (कमिश्नर मेहता से)..क्या है इस रेडियो का राज़?

कमिश्नर मेहता

कुछ नहीं

जॉनी कमिश्नर को मारने का अभिनय करता है.

जॉनी

क्या है इस रेडियो का राज़? हुह?

कमिश्नर मेहता

एक...एक...एक छोटा सा माइक्रोफ़ोन

रंजीत

माइक्रोफ़ोन

रंजीत

कहाँ है वो माइक्रोफ़ोन?

कमिश्नर मेहता

हीरा की जेब में!

हीरा

(झटका खाते हुए) मेरी जेब में? क्या बकते हो?

जॉनी

(ग़ुस्से में) बकते हो? बकते हो, बकते हो? तलाशी लो इसकी!

रंजीत

लो, तलाशी लो इसकी गफ़ूर!

जॉनी

(रंजीत के आदमियों से) छोड़ दो मोती को...(चिल्लाते हुए) छोड़ दो मोती को!

पहला राम

अय, तलाशी एक्सपर्ट हम हैं. ओह, सॉरी, आह! पकड़ा गया!.....ये क्या है? ओह, फ्रेंची माइक्रोफ़ोन? (रंजीत को दिखाता है) फ्रेंची माइक्रोफ़ोन!

(नोट- निर्देशक ने आईएस जौहर की अनदेखी नहीं की और उन्हें बिल्कुल सही समय पर सक्रिय भूमिका में ले आए. इसकी वजह से चल रहे सीन में संतुलन आया. विजय आनन्द सभी चरित्रों को एक साथ बरतते हैं और उन्हें कुछ न कुछ करने के लिए देते हैं.)

जॉनी माइक्रोफ़ोन ले लेता है और कमिश्नर से पूछताछ करता है.

जॉनी

क्या इसी के ज़रिए आवाज़ पहुँचती है रेडियो तक?

हीरा

आह! (परेशान होकर) मैं नहीं जानता कि माइक्रोफ़ोन मेरी जेब में कैसे आया.

रंजीत

तुम एक लफ़्ज़ भी बोले तो भेजा उड़ा के बाहर कर दूँगा...कोई इसमें दूर जाके बात करे हम सुनेंगे.

पहला राम

ऐ सरकार बातों का काम सब ग़ुलाम करता है.

रंजीत

तुम कैसिनो बार के मैन हो ना?

पहला राम

सिर्फ़ एक बटा तीन सर.

रंजीत

एक बटा तीन?

पहला राम

हाँ एक दो तीन में से एक.

रंजीत

इस वेवकूफ़ को कौन यहाँ लाया?

पहला राम

(जॉनी की तरफ़ दिखाकर) ये लाया सर.

जॉनी

राय साहब, जब मैं कमिश्नर को मोती और हीरा का पीछा करते हुए देखा तो इसका पीछा करने के लिए मेरे पास गाड़ी नहीं थी.

पहला राम

बाक़ी दास्तान आप इस माइक्रोफ़ोन में सुनिए. मैं इसमें बोलता हूँ. आप रेडियो ऑन करिए. दो बटा तीन नंबर. सुनिए.

पहरा राम माइक्रोफ़ोन लेकर दूर जाता है. रंजीत टेप रिकॉर्डर में आवाज़ सुनता है.

पहरा राम

ये ऑल इंडिया रेडियो है अब आप मोहम्मद रफ़ी को सुनिए महेंद्र कपूर की आवाज़ में इस गीत को कल्याण जी आनन्द जी के सुर में शंकर जयकिशन ने तैयार किया है...

(नोट- आईएस जौहर के सहारे विजय आनन्द इतने गंभीर क्लाइमेक्स में भी हास्य का पुट भरने में कामयाब रहे हैं.)

रंजीत

शट अप!

हीरा

मुझ पर यकीन कीजिए राय साहब, इन दो पुलिस वालों ने मिलकर चाल चली है मोती को ख़रीद लिया है और उसी के हाथों से माइक्रोफ़ोन मेरी जेब में डाल दिया है.

रंजीत

तुम फिर बोले?

हीरा

जॉनी ख़ुफ़िया पुलिस का आदमी है. आपको मेरे मुँह से ये बात झूठ लगती है तो एक ऐसी औरत के मुँह से सुन लीजिए जो अपने बेटे की ख़ातिर कभी झूठ नहीं बोलेगी.

रंजीत

इस बहाने यहाँ से खिसकना चाहते हो?

हीरा

नहीं नहीं नहीं! मैं यहीं रहूँगा! आप अपने आदमियों को भेजिए...जंगल में कहीं हॉस्पिटल की वैन खड़ी होगी...उस वैन में इस जॉनी की माँ बंद है. ये ना भूलिए कि उसी औरत की वजह से आज हम और आप यहाँ ज़िंदा सलामत खड़े हैं और पुलिस से अगर कोई सौदा हो सकता है तो उस औरत की जान का!

(नोट- फिर एक मोड़. हीरा ने पूरा खेल बिगाड़ दिया है इसलिए अब नए चरित्र को लाने का वक़्त आ गया है.)

कट-टू

एक्सटीरियर, कहीं बाहर, रात

कुछ लोग जॉनी की माँ को वैन से बाहर निकालते हैं.

इन्टीरियर, रंजीत का ठिकाना, रात

जॉनी की माँ को अंदर लाया जाता है. हीरा उछल कर आगे आता है.

हीरा

हट जाओ, हट जाओ तुम दोनों...बहन सब ठीक हो जाएगा घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है...तुम्हारे इंस्पेक्टर बेटे ने सब बदमाशों को गिरफ़्तार कर लिया है, तुम्हें लेने के लिए ही आया है. जाओ, जाओ उसके पास जाओ...

(नोट- देव आनन्द और सुलोचना की आँखें मिलती हैं. सुलोचना देव आनन्द के चेहरे के भाव से सारा मामला समझ जाती हैं.)

माँ

(हीरा से) किसे पहचानना है?

रंजीत

(टोकते हुए) क्या? अपने बेटे को नहीं पहचानती तुम?

माँ

पहचानती हूँ ना, अभी पहचानती हूँ...मुझे थोड़ा बखत दीजिए...आप मेरे साथ रहिएगा.

रंजीत

आँखों से कम दिखायी देता है क्या?

माँ

क्या बात करते हैं हुज़ूर. रात को आसमान के सारे के सारे तारे गिन सकती हूँ.

रंजीत

तो तुम्हें तुम्हारा बेटा नज़र नहीं आता?

हीरा

सब नज़र आता है राय साहब ये भी बन रही है!

माँ

हुज़ूर इसने मुझे बहुत मारा सरकार मुझे बहुत मारा...मेरे पीठ पर नील पड़ गये हैं.

हीरा

ऐ बुढ़िया अगर तुझे अपनी ख़ैर...

कट-टू

माँ

मैं अभी पहचानती हूँ, अभी पहचानती हूँ अपने बेटे को...(वो मोती की तरफ़ इशारा करती है) ये है मेरा बेटा!

रंजीत

हम्मम

माँ

मुझे भगवान की सौगंध हुज़ूर यही है मेरा बेटा...(हीरा से) नहीं, मैंने कोई भूल की?

जॉनी

बुढ़िया! उस से क्या पूछती है बार-बार...इधर देखकर बात कर.

(नोट- जॉनी जानबूझकर दिखावटी ढंग से बरताव करता है. वो इस जालसाज़ी को असल रूप देने के लिए पूरी कोशिश करता है.)

माँ

इतनी बदतमीज़ी से ना बोल बेटे ये बुढ़िया भी एक बेटे की माँ है.

जॉनी

एक क्या, हो सकता है दो बेटो की माँ हो. ये आदमी तुम्हें कहाँ से लाया?

माँ

नहीं, मैं बताऊँगी तो यह मेरी जान ले लेगा...

रंजीत

कोई तुम्हारी जान नहीं लेगा, जो तुम्हें कहना है सच-सच बोलो...

माँ

हुज़ूर, मैं एक ग़रीब औरत हूँ...मेरा कोई दोष नहीं. इस आदमी ने मुझे हज़ार रुपये का लालच दिया और कहा जिस आदमी कि तरफ़ इशारा करूँ उसे अपना बेटा कह देना.

हीरा

(चिल्लाकर) बदजात औरत कितना झूठ बोल....

रंजीत

ले जाओ इस हरामज़ादे को

(नोट- एक और मोड़, रंजीत को एक बार फिर से धोखा होता है.)

हीरा को रंजीत के आदमी ले जाते हैं.

रंजीत(कॉन्टिन्यूड..)

लेकिन अभी-अभी तो तुम कह रही थी कि तुम्हें मा-मार के यहाँ लाया है?

माँ

लेकिन लेकिन हुज़ूर मुझे क्या पता था ये मुझे इतनी दूर ले आएगा. जब मुझे पता चला तो मैंने कहा मुझे रुपया नहीं चाहिए मुझे छोड़ दो...लेकिन इसने मुझे बहुत मारा हुज़ूर बहुत मारा और मेरी जान लेने की धमकी दी.

रंजीत

(हीरा से) अब तुम्हें क्या कहना है नवाबज़ादे?

हीरा

राय साहब ये औरत एक पुलिस इंस्पेक्टर की माँ है...इसका खाविंद भी एक पुलिस इंस्पेक्टर था. बड़ी पक्की है ये इसे तोड़ने का यही तरीका है कि मुझे छोड़ दीजिए. हमारा सारे गिरोह की ज़िंदगी का दारोमदार इसी फ़ैसले पर है कि जॉनी ख़ुफ़िया पुलिस का आदमी है या नहीं...ये झूठ निकला तो मुझे गोली से उड़ा दीजिएगा लेकिन मुझे एक मौका दीजिए.

रंजीत

मौका दिया. छोड़ दे इसे.

हीरा आज़ाद हो जाता है.

(नोट- पासा एक बार फिर पलट गया. समय बदल गया और अब हीरा की बारी है.)

हीरा

जॉनी इस औरत की कसम खा के एक बात बोल की ये मेरी माँ नहीं है.

जॉनी कितनी बार बोलूँ?

हीरा

एक बार...(माँ को थप्पड़ मारता है.)

जॉनी

ये मेरी माँ नहीं है...

जॉनी

औरत पर हाथ उठाके तू साबित क्या करना चाहता है?

हीरा

अब भी नहीं समझा? फिर से देख इसे! (फिर से थप्पड़ मारता है.)

जॉनी

(नकली हँसी हँसता है...)इस तरीके से तू कुछ साबित नहीं कर सकता.

हीरा

नहीं? (माँ को थप्पड़ मारता है.)

जॉनी

नहीं!

हीरा

नहीं? (माँ को थप्पड़ मारता है.)

जॉनी

नहीं!

मोती ये सब देख रहा था. वो बर्दाश्त नहीं कर पाता और हीरा पर कूद पड़ता है.

(नोट- विशुद्ध ड्रामा! मोती जो अपनी माँ को बरसों बाद देख रहा था आखिर कब तक उसे पिटते हुए देख सकता था?)

मोती

हीरा!!! कुत्ते कमीने!

जॉनी

मोती!

मोती

माँ...

माँ

मोहन?

मोती

माँ...

माँ

मोहन!

मोती अपनी माँ को गले लगा लेता है. जॉनी अपनी भावनाएँ छुपाने की कोशिश करता है.

माँ

मोहन, मोहन...

(नोट- नाटकीय क्लाइमेक्स के बीचों-बीच बेहद भावुक दृश्य)

रंजीत

(समझ नहीं पाता कि क्या चल रहा है) बास्टर्डस! ये सब साला मामला क्या है?

(नोट- रंजीत के लिए सबसे ज़्यादा चौंका देने वाली बात है यह)

हीरा

(भ्रमित होकर) मोती की माँ?

जॉनी

हाँ, मोती की माँ! जैसे तुम जानते नहीं थे...सारी बात अब मेरे सामने खुल गयी है राय साहब...हीरा जब पहली बार मोती से मिला तो मोती ने मार-मार कर इसके मुँह से ख़ून निकाल दिया ता उसके बाद भी मोती इस कमीने को आपके पास लाने के लिए मज़बूर हो गया भला क्यूँ? क्यूँ?

(नोट- जिस आत्मविश्वास के साथ जॉनी बदली हुई परिस्थिति के साथ सामंजस्य बैठाता है उससे किसी तरह के शक की गुंजाइश ख़त्म हो जाती है.)

मोती

(फौरन बात बनाते हुए) राय साहब हीरा ने मुझे कहा कि उसे जॉनी की जगह मिलनी चाहिए. मैंने कहा ये नामुमकिन है. राय साहब जॉनी को बहुत पसंद करते हैं...तो इसने जलकर मुझसे कहा कि इसके पास ऐसी चाल है कि राय साहब ख़ुद अपने हाथों से जॉनी की जान ले लेंगे...

हीरा

मैंने कहा?

रंजीत

शट अप!!

मोती

जब मैंने इस से कहा कि इसके पास राय साहब तक पहुँचने का तरीका क्या है...तो इसने पलट कर मुझसे कहा कि मोती 15 साल से एक विधवा औरत अपने खोये हुए बेटे को ढूँढ रही है. पहले वो बेटा मोहन था और अब मोती है. अगर तुम अपनी माँ की जान बचाना चाहते हो तो...

(नोट- मोती ने बातों-बातों में ही क्या शानदार कहानी गढ़ ली!)

हीरा

ये सब झूठ है!!!

रंजीत

ज़लील कुत्ते! बांध दो इसका मुँह!

दो आदमी हीरा को एक तरफ़ लेकर जाते हैं. पहला राम फिर से दिखायी देता है.

पहला राम

ठहरो! मुँह बांधने के एक्सपर्ट हम हैं! आह, थैंक यू.

पहला राम हीरा के मुँह पर टेप चिपका देता है.

 

मोती

राय साहब मैंने आपका नमक खाया है. आपकी कसम मुझे नहीं मालूम था कि ये हीरा पुलिस का साथ मिल गया है वरना माँ की जान की क्या कीमत...मैं इस गद्दार को कभी आप तक नहीं पहुँचने देता...

रंजीत

शाबास मोती शाबास!

(नोट- रंजीत को अब पूरा यकीन हो गया है और वो अब हीरा पर कभी भरोसा नहीं करेगा. केवल कोई बाहरी आदमी ही उसका ख़्याल बदल सकता है.)

हीरा

(कुछ बोलने में असमर्थ है) हम्ममफ!

पहला राम

(उसका मज़ाक उड़ाता है)  च्चच च्चच

जॉनी

आपको क्या कहना है इस मामले में?

कमिश्नर मेहता

मुझे कुछ नहीं कहना

जॉनी

आपने हीरा को इस शर्त पर छोड़ा कि वो आपको राय साहब तक पहुँचा दे?

कमिश्नर मेहता

हीरा ख़ुद नहीं जानता था कि...

जॉनी

(अभिनय करते हुए) आह! हीरा ख़ुद नहीं जानता था कि राय सहाब कौन हैं, कहाँ रहते हैं, सिर्फ़ मोती जानता था और इसलिए मोती की माँ को उठा लेने की ज़रूरत पड़ी, हैं?....काठमाण्डु के पुलिस स्टेशन पर आप क्या ऑर्डर छोड़ कर आए हैं?

कमिश्नर मेहता

ऑर्डर सीक्रेट हैं....मेरी ज़बान भी कट जाए तो मैं....

जॉनी

(चिल्लाकर) आप बताएंगे!

कमिश्नर

कभी नहीं!

जॉनी

अगर आप पुलिस वाले हैं तो हम भी कुछ कम नहीं. नहीं बोलोगे तो तुम्हारी कसम मार-मार के कीमा बना दूँगा तुम्हारा.

जॉनी कमिश्नर को मारने का नाटक करता है.

कमिश्नर मेहता

बताता हूँ!

जॉनी

सुनिए राय साहब सुनिए

कमिश्नर मेहता

मैं यह कहके आया था कि रात होते-होते ही अगर मैं भूपिंदर सिंह को गिरफ़्तार करके नहीं लौटा तो वाली सड़की पे मेरी तलाशी शुरू हो जानी चाहिए यह काम बॉर्डर पुलिस के सुपुर्द किया जाएगा और वो इस जगह का चप्पा-चप्पा छान मारेंगे तुम लोगों के बचने की कोई उम्म्मीद नहीं.

जॉनी

और तुम्हें उम्मीद थी कि भूपेंद्र सिंह को अकेले पकड़ के ले जाओगे!

(नोट- जॉनी इस डायलॉग से रंजीत के अहंकार को जगा रहा है)

कमिश्नर मेहता

हीरा मेरे साथ था!

रंजीत

(हीरा से) सकी सज़ा तुम भुगतोगे हीरा...मोती!

मोती

जी

रंजीत

एक काग़ज़ और और एक पेन लाओ. चलो कमिश्नर इस वक़्त तुमारी ज़िंदगी है या मेरी ज़िंदगी है...काठमाण्डु के पुलिस कमिश्नर को ख़त लिखो. लिखो कि तुमने भूपिंदर सिंह को गिरफ़्तार कर लिया है और उसे लेकर तुम काठमाण्डु की तरफ़ रवाना हो रहे हो और जब तक तुम वहाँ नहीं पहुँचते सारी कार्रवाई रोक दी जाए समझे...

कमिश्नर मेहता

मैं यह हर्गिज़ नहीं लिखूँगा.

जॉनी

कैसे नहीं लिखोगे! लिखो ये ख़त

रंजीत

मेरे पास वक़्त पहुत कम है और तुमने ज़रा भी आनाकानी की तो मेरे सिपाही तुम्हें ज़िंदा भून देंगे!!...भगतराम! क़ैदी और उसकी बेटी को ले आओ...मोती, जॉनी! ख़त लिखवाओ.

कमिश्नर ख़त लिखता है. रंजीत उसे अपने हाथ में लेकर अपने एक आदमी को आदेश देता है.

(नोट- ध्यान दें, ख़त लिखने में ज़रा भी वक़्त नहीं ज़ाया किया गया. पलक झपकते ही वो पूरा हो गया.)

रंजीत

गफ़ूर!!....ये चिट्ठी रात की रात में काठमाण्डु के कमिश्नर तक पहुँच जानी चाहिए...कहना बंबई के कमिश्नर ने भेजा है बंबई के कमिश्नर, फौरन रवाना हो जाओ.

आदमी

यस सर!

आदमी चला जाता है. भूपिंदर सिंह को अंदर लाया जाता है.

रंजीत

राय साहब ऐसा लगता है कि आप हमारे राजमहल से कुछ उकता से गए हैं तो आपको कुछ बाहरी की सैर करनी चाहिए...मोती! इस कमिश्नर को यहाँ लाओ...इस कमिश्नर का हाथ क़ैदी के हाथ के साथ बांध दो.

पहला राम

राय साहब बांधने के एक्सपर्ट हम हैं...

रंजीत

कैसे बांधोगे?

पहला राम

जैसे कि आपको बांधना मांगता है

रंजीत

वेरी गुड चलो बांधो...इधर आओ

जॉनी रेखा को आँख मारता है और पहला राम की तरफ़ यह बताने के लिए इशारा करता है कि वो उसका आदमी है.

पहला राम

बांध दिया राय साहब

रंजीत

क्या इस कमिश्नर की कोई गाड़ी है?

पहला राम

हाँ एक फटीचर पुलिस की जीप है

रंजीत

तीनों को उसमें बैठा दो...

रंजीत अपने एक आदमी जो गाड़ी चलाने वाला है, को किनारे ले जाकर उसके कान में कुछ फुसफुसाता है. जॉनी और मोती उसकी बात सुनने की कोशिश करते हैं.

आदमी

जी

रंजीत

और तीनों में से एक भी ज़िंदा ना बचे

आदमी

जी

रंजीत

एकदम एक्सीडेंट लगे

आदमी

बिल्कुल एक्सीडेंट लगेगा

रंजीत

कैरी ऑन

आदमी चला जाता है और उसके साथ कमिश्नर, पहला राम, भूपिंदर सिंह और रेखा भी चले जाते हैं. रंजीत जॉनी और मोती के पास आता है.

रंजीत

(मोती से) तुम पूछा करते थे ना कि भूपिंदर सिंह को मैंने क्यों क़ैद कर रखा है?

मोती

जी

रंजीत

इस दिन के लिए...जिस भूपिंदर सिंह को पुलिस को तलाश थी, बेटी समेत उसकी लाश उनको मिल जाएगी. (हीरालाल से) कहिए हीरालाल साहब आपकी क्या ख़ातिर की जाए.

शेर सिंह अंदर आता है.

शेर सिंह

(रंजीत के आदमियों को चेतावनी देते हुए) रुक जाओ वरना गोली मार दूँगा...राय साहब!

(नोट- बाहरी कैरेक्टर आ गया. शेर सिंह स्क्रीनप्ले का ऐसा औजार है जिसे विजय आनन्द इसलिए लाए हैं ताकि वो रंजीत को जॉनी के बारे में नई जानकारी दे सके. यह फ़िल्म का आख़िरी उद्घाटन भी होगा.)

रंजीत

शेर सिंह! तुम यहाँ?

शेर सिंह

जानबूझ कर मौत के मुँह में आया हूँ तो कोई वजह होगी.

रंजीत

आई सी. क्या वजह है?

शेर सिंह

माना कि हम आज एक दूसरे के दुश्मन हैं रंजीत लेकिन ज़िंदगी में बहुत बार एक दूसरे का साथ दिया है. आज तुम्हारी जान ख़तरे में है और मुझे रुपयों की ज़रूरत है. बोलो? होता है सौदा?

रंजीत

मेरी जान ख़तरे में?

शेर सिंह

(समय बर्बाद किए बिना) मुझे एक करोड़ रुपये चाहिए!

रंजीत

अगर वाकई मेरी जान ख़तरे में है और तुम उसे बचा सकते हो तो एक करोड़ क्या दस करोड़ मांगोगे तो दस करोड़ मिलेगा.

वो हाथ मिलाते हैं. शेर सिंह रंजीत को किनारे ले जकर उसके कान में फुसफुसाता है. जॉनी और मोती अपनी माँ के साथ खड़े हैं. वो थोड़ी दूर हैं इसलिए उन दोनों की बात नहीं सुन सकते.

शेर सिंह

पंद्रह साल हुए तुमने एक इंस्पेक्टर का ख़ून करवाया था याद है?

रंजीत

हम्म

शेर सिंह

(जॉनी और मोती की तरफ़ दिखाकर) उसका बड़ा लड़का मोहन तुम्हारी कार की डिक्की में छिप गया था...मोती. उसका छोटा लड़का सोहन आज ख़ुफ़िया पुलिस का बहुत बड़ा अफ़सर है..जॉनी. इन दोनों भाइयों के बीच में जो औरत खड़ी है वो उनकी माँ है.)

रंजीत

तुम्हें कैसे मालूम?

शेर सिंह

मैं कई दिनों से जॉनी का पीछा कर रहा हूँ. ये दोनों लड़के अपने बाप के ख़ून का बदला लेने आए हैं. उस वक़्त भी मैं तुम्हारे साथ था आज भी साथ हूँ.

रंजीत

थैंक यू

शेर सिंह चला जाता है. रंजीत वापस आता है.

(नोट- ध्यान दें कि शेर सिंह काम ख़त्म होते ही चला गया.)

रंजीत

मोती! जॉनी! कम हियर....फ़ास्टर! डोन्ट वेस्ट टाइम! साथियों! अगर ये दोनो अपनी जगह से हिलें तो उस औरत को गोली से उड़ा दो. और तुम सुनो...अगर ये औरत अपनी जगह से हिले तो इन दोनों को गोली से भून दो.

मोती

राय साहब

रंजीत

शट अप! (हीरा से) तुमने तरीका ज़रा ग़लत इस्तेमाल किया हीरा. अगर माँ को मारने की बजाय उसके बेटे को मारते ना तो जो तुम मुझे समझाना चाहते थे वो मैं ज़रा जल्दी समझ जाता...ख़ैर अब भी कुछ नहीं बिगड़ा, ये लो हंटर और उधर जाकर इन दोनों की चमड़ी उधेड़ दो.

(नोट- स्थिति और जटिल हो गयी. ख़तरा और बढ़ गया. इस तरह की फ़िल्मों में अंत में होने वाले लड़ाई-झगड़े के लिए पूरा माहौल तैयार है.)

कट टूः

एक्सटीरियर, रंजीत का ठिकाना, रात

दो आदमी कमिश्नर, भूपिंदर सिंह और रेखा को ले जाते हैं. पहला राम उनके साथ है जो कुछ देखकर उछल पड़ता है. उसके दोनों भाई भूत के वेष में हैं. एक ने सफ़ेद पोशाक पहन रखी है और दूसरे ने काली. रंजीत के आदमी डर जाते हैं.

पहला राम

(डरने का अभिनय करते हुए) कौन है? कौन है? कौन है?

दूसरा राम

मुझे नहीं पहचानते? मैं तुम्हारा भूत हूँ

पहला राम

तुम मेरे भूत हो चलो ठीक है लेकिन ये कौन है?

तीसरा राम

मैं इसका भूत हूँ!

पहला राम

(हास्यजनक रूप से) भूत का भूत! ये क्या मामला है? क्या चाहिए तुम्हें?

दूसरा राम और तीसरा राम

(रंजीत के आदमियों पर छलांग लगाते हुए) तुम!!

रंजीत के आदमी भाग खड़े होते हैं और कमिश्नर मेहता रस्सी खोलने की कोशिश करते हैं.

कमिश्नर मेहता

पहला राम...जल्दी! जल्दी! जल्दी!

पहला राम

(उनकी मदद करते हुए) यस सर, फर्स्ट प्रमोशन सर....

कमिश्नर मेहता

यस, यर, आल राइट

सभी बंधक आज़ाद हो जाते हैं.

कमिश्नर मेहता(कॉन्टिन्यूड)

(भूपिंदर सिंह से) राय साहब भूपिंदर सिंह, अब आप आज़ाद हैं.

भूपिंदर सिंह रेखा की तरफ़ देखते हैं, उनकी बेटी के लिए यह एक स्वीट सरप्राइज़ है. वो ख़ुशी में एक दूसरे से गले मिलते हैं.

रेखा

पिता जी!!!

भूपिंदर सिंह

बेटी!!

(नोट- ध्यान दें कि ये सीन कितना जल्दी पूरा हो गया.)

इन्टीरियर, रंजीत का ठिकाना, रात

 हीरा मोती और जॉनी को हंटर से बुरी तरह पीटता है. वो अपनी जगह पर खड़े रहकर दर्द सहते हैं. उनके शरीर पर घाव के गहरे निशान दिखने लगे हैं. उनकी माँ अपनी जगह खड़ी होकर असहाय रो रही हैं.

माँ

(गिड़गिड़ाते हुए) भगवान के लिए बस करो...बस करो बस करो...भगवान के लिए बस करो...

यह कुछ देर तक यही चलता है. अचानक दोनों भाई टेबल पलट देते हैं और क्लामेक्स सीन की ज़रूरी मारपीट शुरू हो जाती है. दोनों ने अपने दुश्मनों को रस्सी में लपटे लिया है और एक-एक सिरा पकड़ कर कोशिश करते हैं कि वो लोग भाग न पाएँ.

मोती

सोहन!!!

जॉनी

छोड़ना नहीं मोहन छोड़ना नहीं

मोती

अब कौन छोड़ेगा सोहन!

दूसरी तरफ़ दुश्मन छूट जाते हैं और लड़ाई शुरू हो जाती है. रंजीत मोती को पटक देता है और उसके सीने पर बैठ जाता है. जॉनी रंजीत की गर्दन पकड़ लेता है.

रंजीत

(ग़ुस्से) मोती के बच्चे तुमझे पाल-पोस कर इस काबिल बनाया?

जॉनी

(रंजीत को नीचे गिराने की कोशिश करता है) किस क़ाबिल बनाया? किसी क़ाबिल नहीं बनाया...

रंजीत(कॉन्टिन्यूड)

...नहीं तो अनाथों की तरह पलता

कट टूः

लेकिन इसे अनाथ बनाया किसने?

रंजीत जॉनी को भी पकड़ लेता है. वो दोनों भाइयों की गर्दन अपने दोनों हाथों में पकड़कर बैठा है.

रंजीत

अब पता चला किसने?

दोनों भाई रंजीत को धकेल कर ख़ुद को छुड़ा लेते हैं. वो दोनों रंजीत को एक कोने में ले जाकर मुक्के मारते हैं.

जॉनी

(घूंसा मारते हुए) ये आया लेफ्ट

मोती

(रंजीत को घूंसा मारते हुए) ये आया राइट...

कट टूः

(नोट- रंजीत को आख़िरी मुक्का लगते ही सीन बदल जाता है और जेल का सीन शुरू हो जाता है. लंबा चला क्लाइमेक्स यहाँ मंजिल तक पहुँच जाता है. विजय आनन्द ने रेजोल्युशन को केवल डेढ़ मिनट में समेट दिया. उन्होंने दोनों भाइयों के कमिश्नर मेहता के साथ अपने पिता की तस्वीर के सामने खड़ा दिखाने, दोनों भाइयों के उनकी माँ से मिलने और अंततोगत्वा जॉनी और रेखा की शादी कराने में ज़्यादा समय बर्बाद नहीं किया.)

 

 


-Saurabh Shukla

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