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'पगड़ी' पर बवाल


निशांत भारद्वाज



श्रवण सागर

From Regional Desk:
रेगिस्तान में आंधी
-उडती 'पगड़ी' ने उड़ाई धूल


जातीय उबाल पैदा ना करदे पगड़ी

अब तक खड़ा होने के लिए लड़खड़ा रहा राजस्थानी सिनेमा अब अपने दम पर खड़ा होता दिखाई दे रहा है। अब तक हिंदी फिल्मों के राजस्थानी वर्जन बना रहे फिल्म निर्माता अब राजस्थानी सिनेमा और संस्कृति के चुनौतीपूर्ण सब्जेक्ट को राजस्थान की जनता के सामने ला रहे हैं। इस कड़ी में समाज की कुछ कड़वी हकीकतें भी जनता के सामने फिल्मों के द्वारा पहुंचती है तो समाज के ताने बाने में एक अजब हलचल पैदा होने लग जाती हैं।

इसी कड़ी में राजस्थानी सिने दर्शकों के लिए बनकर तैयार हो चुकी फिल्म पगड़ी जहां बेहतर तकनीक कौशलता के कारण दर्शकों के इंतजार का सबब बनी हुई हैं वही अपने कंटेंट को लेकर भी विभिन्न समाजों में चर्चा का विषय बनी हुई है। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही यू ट्यूब पर रिलीज हुए फिल्म के टीजर ने लोगों के जेहन में फिल्म के कंटेट को लेकर कौतूहल का माहौल रच दिया है।

राजपूत समाज की एक संस्था के पदाधिकारी के मुताबिक, “राजस्थान में जाट और राजपूतों के बीच पहले से ही एक अहम की लड़ाई है इसमें कही ये फिल्म आग में घी का काम ना कर दे। क्योंकि फिल्म के टीजर में पगड़ी उछालने को लेकर ब्राह्मण, राजपूतों का जिक्र किया गया है । लेकिन टीजर से स्थितियां अभी पूरी तरह साफ नहींं हो पाईं हैं इसलिए भी हमें टे्रलर का इतंजार है, अगर हमें फिल्म में एसा लगा जिससे समाज को क्षति पहुचे तो फिल्म के निर्माता से कहकर इसे हटवाएंगे।“

कंटेट को आउट नहीं कर रहा प्रोडक्शन हाउस

इधर अपने फिल्म के कंटेट की गोपनीयता को लेकर फिल्म की निर्माता कंपनी रूआर्यन इंटरटेनमेंट सजग है। फिल्म के कंटेंट के बारे में मीडिया को अभी तक कोई विशेष जानकारी नहीं दी गई है। फिल्म में मुखय भूमिका श्रवण सागर, रुही चतुर्वेदी, युधिष्ठिर भाटी निभा रहे हैं। फिल्म के निर्देशक हैं निशांत भारद्वाज।  

सिनेमा समाज का दर्पण- श्रवण सागर

सिनेमा मानव समाज से मुक्त होकर काम नहीं कर सकता है। क्योंकि सिनेमा समाज का का दर्पण है। राजस्थानी सिनेमा के पिछड़ने का एक प्रमुख कारण ये भी है कि हम मिट्टी से जुड़ी कहानियों से दूर हैं। अगर राजस्थानी फिल्मों में हम राजस्थान के समाज की गांवों की बात नहीं कहेंगें तो कौन सिनेमाघरों में राजस्थानी फिल्मों के देखने जाएगा।

राजस्थानी फिल्मों के अभिनेता श्रवण सागर के मुताबिक, “जब तक हम समाज की कहानी नहीं कहेंगें तब तक हमारा सिनेमा कैसे विकास करेगा। मुंबई से राजस्थान आकर लोग यहां की कहानी को विश्व पटल पर ले जाता हैं और एक हम हैं कि अपनी धरती पर बनाई गई फिल्मों को देखने के लिए दर्शक जुटाने का संघर्ष करते हैं।“

राजस्थानी सिनेमा में महारौ वीरौ घनश्याम अभिमन्यु और दंगल, जैसी फिल्मों से दर्शकों के बीच अपनी पकड़ बना चुके श्रवण सागर पगड़ी के कंटेंट पर चर्चा चलने पर कहानी को साफ करने से बचते हुए कहते हैं, “फिल्म के कंटेंट में कोई एसी बात नहीं है जिसमें किसी की छवि को खराब करने की बात हो। लेकिन हम जब राजस्थानी सिनेमा की बात करते हैं तो दर्शकों के दिल में रोमांच नजर नहीं आता हैं। और इस फिल्म से हमें आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि हम बॉक्स ऑफिस पर भी रोमांच पैदा कर पाएंगे।“


-Dharmendra Upadhyay

पिछले सात साल से पिंकसिटी जयपुर के पत्रकारिता जगत के साथ रंगमंच और राजस्थानी सिनेमा में सक्रिय रहे युवा पत्रकार धर्मेंद्र उपाध्याय बतौर फिल्म पत्रकार काम करते हुए कई डॉक्यूमेंट्री फिल्मों का लेखन-निर्देशन कर चुके हैं। धर्मेंद्र उपाध्याय इन दिनों मुंबई स्क्रीन राइटर के रूप में सक्रिय हैं।

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