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From Regional Desk:
राजमंदिर में राजस्थानी सिनेमा!
-रीजनल सिनेमा का अच्छा दौर


रीजनल सिनेमा का अच्छा दौर है। भोजपुरी, मराठी सिनेमा जहां बॉक्स ऑफिस पर अपने लिए हिंदी फिल्मों से स्वतंत्र दर्शक जुटा चुके हैं, वहीं राजस्थानी सिनेमा बॉक्स ऑफिस पर दर्शक जुटाने के लिए मचल रहा है। इस अकुलाहट के साथ ये बात दीगर है कि राजस्थानी सिनेमा से जुटे लोग राजस्थानी सिनेमा के लिए हमेशा कुछ ना कुछ नया देने की कोशिश करते हैं। इसी कड़ी में एशिया के जाने माने सिनेमाघर राजमंदिर में मुद्दत बाद  राजस्थानी फिल्म मां बड़े पैमाने पर रिलीज हुई है । राजस्थानी सिनेमा के वर्तमान हालात और फिल्म को लेकर प्रस्तुत है धर्मेंद्र उपाध्याय की एक रिपोर्ट -  

यूं तो राजस्थानी सिनेमा पिछले दो दशक से अपनी मुकम्मल पहचान के लिए संघर्ष कर रहा हैं पर फिर भी निर्माताओं में इतना जोश है कि वे राजस्थानी सिनेमा को किसी भी कीमत पर खड़ा करने के लिए जी जान से जुटे हैं। इस कड़ी में गौरतलब है कि नयी राजस्थानी फिल्म मां जयपुर के राजमंदिर सिनेमा में बड़े स्तर पर रिलीज हुई है। मिली जानकारी के मुताबिक, फिल्म को देखने के लिए भारी संख्या में दर्शकों का हूजूम तो नहींं उमड़ा है, पर निश्चिंत रूप से राजस्थानी सिनेमा के खस्ताहाल दौर में एशिया के जाने माने सिनेमाघर राजमंदिर में किसी राजस्थानी फिल्म का एक सप्ताह के लिए चारों शो में प्रदर्शन होना वाकई गौरव की बात है।  

बाहर तक पहुंच रही राजस्थानी संस्कृति

राजस्थानी सिनेमा के जाने माने निर्देशक लखविंदर सिंह के मुताबिक, राजमंदिर में किसी राजस्थानी फिल्म के प्रदर्शन से राजस्थानी संस्कृति की खुशबू दूर दूर तक फैलेगी। इसकी प्रमुख वजह है कि राजमंदिर सिनेमाघर का पर्यटक प्लेस होना। जयपुर घूमने आए बहुत से पर्यटकों के विचार में जयपुर आते ही फिल्मों के नाम पर राजमंदिर देखना ही पहला लक्ष्य होता है। इसका फायदा फिल्म को जरूर मिलेगा।

एक सप्ताह से आगे भी 

फिल्म को राजस्थान भर में रिलीज करने वाले वितरक शत्रुघ्न पारीक के मुताबिक, हमारे लिए ऐसे दौर में किसी राजस्थानी फिल्म को राजमंदिर में रिलीज करना एक चुनौती थी। लेकिन हमने इस चुनौती का सामना किया। यूं तो इससे पहले भी राजस्थानी फिल्मों के प्रीमियर राजमंदिर में हुए हैं लेकिन ये पहली फिल्म है जो एक सप्ताह तक राजमंदिर में चार शो में चल रही है। अगर दर्शकों का रेस्पांस मिलता है तो हम इसे एक सप्ताह से आगे भी जारी रखेंगे।

सरकार नहीं दे रही सिनेमाघर

राजस्थानी सिनेमा को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार ने यूं तो राजस्थानी सिनेमा में यू सर्टिफिकेट फिल्म के 10 लाख अनुदान राशि देने का नियम बनाया है। गौरतलब है कि राजस्थानी सिनेमा के निर्माण से जुड़े लोगों ने मल्टीप्लैक्स संचालकों को साल में 56 शो राजस्थनी फिल्मों के प्रदर्शन के लिखे रिजर्व रखने की बात कही थी। सरकार ने इसे स्वीकारा भी पर इस नियम को सरकार अब तक लागू नहीं कर पाई। हालांकि निर्माता अपने दम पर मल्टीप्लैक्स में भी फिल्मों का प्रदर्शन करवा रहे हैं। 

मां-बेटे की कहानी

विश्वकर्मा इंटरटेनमेंट के बैनर तले बनी फिल्म मां, मां- बेटे की कहानी के लेकर हैं जिसमें मां के त्याग को बयां किया गया है। फिल्म में प्रमुख भूमिका भानी सिंह, राज जांगिड़, दीपक मीणा, युधिष्ठिर भाटी, क्षितिज कुमार ने निभाई है। फिल्म देखकर आए दर्शक प्रमोद आर्य के मुताबिक, फिल्म की कहानी भावुक कर देने वाली है। फिल्म दर्शकों को पसंद आ रही है। पारिवारिक फिल्म होने के कारण स्कूल के छात्र छात्राएं भी फिल्म देखने आ रहे हैं। 

कहानी अच्छी पर कमज़ोर कास्टिंग

राजस्थानी सिनेमा से जुड़े एक अभिनेता के मुताबिक, फिल्म की कहानी तो अच्छी है पर कास्टिंग ने फिल्म की कहानी को कमजोर कर दिया है। फिल्म में मां की शीर्षक भूमिका अदा कर रही कलाकर भानी सिंह किसी भी एंगल से बेटे का रोल कर रहे अभिनेता राज जांगिड़ की मां नजर नहीं आ रही हैं।     

 

 धर्मेन्द्र उपाध्याय

पिछले सात साल से पिंकसिटी जयपुर के पत्रकारिता जगत के साथ रंगमंच और राजस्थानी सिनेमा में सक्रिय रहे युवा पत्रकार धर्मेंद्र उपाध्याय बतौर फिल्म पत्रकार काम करते हुए कई डॉक्यूमेंट्री फिल्मों का लेखन-निर्देशन कर चुके हैं.

 

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