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Shankar

From Regional Desk:
साउथ के सिनेमा सृजक शंकर
-और उनका हिंदी सिनेमा


साउथ के सिनेमा सृजक शंकर और उनका हिंदी सिनेमा

निर्देशक शंकर अपनी महत्वाकांक्षी फिल्म रोबोट .2 के फर्स्ट लुक के साथ हाजिर है। इस बार नायक के ही समकक्ष खलनायक की भूमिका में अक्षय कुमार दिखेंगे। पहले इस भूमिका का ऑफर आमिर खान को मिला था पर आमिर थे कि नायक और खलनायक दौनों ही बनना चाहते थे। आमिर इस प्रोजेक्ट से बाहर हुए तो अक्षय कुमार ने खल भूमिका को खुशी खुशी स्वीकार कर लिया। क्योंकि वे रजनीकांत के साथ एक फिल्म करने की चाहत रखते थे। एक बार फिर मीडिया में उनकी फिल्म की चर्चा 350 करोड़ के भव्य बजट के कारण हो रही है। साउथ के सिनेमा सृजकों में लेखक निर्देशक शंकर पिछले दो दशक से ना केवल साउथ में बल्कि बॉलीवुड में भी सक्रियता  से फिल्म निर्माण कर रहे हैं। सिनेमा में  मनोरंजन ढूंढने वाले दर्शक उन्हें मंहगी फिल्म बनाने वाले फिल्मकार के रूप में जानते हैं।  लेकिन गौर से देखा जाए तो उनके सिनेमा की सफलता भावुक कंटेट पर ही टिकी होती हैं।

Robot 2 Team

वह दर्शकों के सामने साउथ की ऐसी गृहिणी के रूप में आते हैं जो केले के पत्ते की बजाय चांदी के थाल में भोजन लेकर आती हैं। पर खाने वाले पर असर चांदी के थाल के वैभव का नहीं बल्कि सांबर में लगे छोंक का होता है।

राजेश खन्ना द्वारा निर्मित फिल्म जय जय शिवशंकर से बतौर सहायक निर्देशक अपना फिल्म करियर शुरू करने वाले शंकर के किरदारों में एक खास भोलापन व्याप्त रहता है। चाहे नायक का शिवाजी राव हो या रोबोट का चिट्टी। उनकी फिल्मों के केंद्रीय किरदार शक्तिशाली होते हुए भी दिमाग से सीधे होते हैं। मसलन नायक के शिवाजी राव का मुखयमंत्री के प्रोटोकॉल को तोड़ गांव में अपनी नायिका से छुपकर मिलने आना या रोबोट चिट्टी का प्रेम भाव में पड़कर, नायिका को काटने वाले मच्छर को पकड़ना।

साउथ में जैंटलमैन, कादलन, जींस जैसी फिल्में बनाने के बाद उन्होने बतौर निर्माता पहली बार रजनीकांत को लेकर तमिल फिल्म मुधालवन बनाई और उसी कहानी को एक बार फिर हिंदी सिने दर्शकों के समक्ष नायक के रूप में लेकर प्रस्तुत हुए । इससे पहले 1998 में हिंदी फिल्म जगत में उनकी ऐश्वर्या राय स्टारर डब्ड फिल्म जींस रिलीज हो चुकी थी, पर 2001 में नायक द्वारा हुए उनके बॉलीवुड डेब्यू ने शंकर को हिंदी सिनेमा के दर्शकों से पहली बार सही रूप में जोड़ा ।

नायक फिल्म की रिलीज से पहले उसकी चर्चा अनिल कपूर पर फिल्माए गए कीचड़ दृष्य में शकंर द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले 35 कैमरों और बेहतरीन ग्राफिक्स के कारण हुई थी।  लेकिन इस फिल्म के दृश्यों पर गौर किया जाए तो उनकी मनभावन दृष्यावली ने इस फिल्म को दर्शकों के ह्रदय में स्थान दिलवाया।

Nayak Anil Kapoor Mud
फिल्म नायक का वह कीचड़ दृष्य जो उन्होंने 35 कैमरों से बड़े सधे ढंग से शूट किया पर इस दृष्य के बाद गुंडों से खुद को बचाते हुए नायक शिवाजी राव का एक गंवई गवाले द्वारा दूध से अभिषेक किया जाना, उनकी सारी तकनीक को बौना करते हुए दर्शकों को भाव की चाशनी में लपेट लेता है । नायक शिवाजी राव का दूध से अभिषेक दृष्य रचकर वे दर्शंकों के दिल में मानो उसे नेतृत्व स्वरूप मे एक झटके में प्रस्तुत कर देते हैं।

  नायक अनिल कपूर ही नहीं खलनायक अमरीश पुरी का प्रजेंटेशन भी नायक में मिं इंडिया के मोगेंबो से कम नही है, उनके प्रजेंटेशन के लिए वो बड़े बड़े संवादों का सहारा ना लेकर उसकी क्रूरता को एक झटके में दिखा देते हैं। नायक में आप देखते हैं, जब मुखयमंत्री बने अमरीशपुरी का गांव में दौरा होता है, और इस दौरे में एक प्रशंसक उन्हें छूने के लिए दौड़ता है ,उस प्रशंसक के भावावेश में उन्हें पकड़ने के चलते अमरीश पुरी चोटिल हो जाते हैं। वह इसका गुस्सा वहां से निकलते समय उनकी कार के साथ दौड़ रहे उस व्यक्ति के हाथ को गाड़ी में से झटका देते हुए, तोड़कर निकालते हैं।

निर्देशक शंकर के किरदारों का अनगढपन भी उन्हे खास बनाता है। मुखयमंत्री के दौरे में सच बोलने वाली अल्हड़ लड़की मंजरी (रानी मुखर्जी) जिसका सच मीडियाकर्मी शिवाजी राव को इतना भाता है कि वो उस लड़की के प्यार में पग जाता है। शिवाजी मंजरी को छिपकली और मंजरी उसे कनखजूरा पुकारती है। 

बॉलीवुड में उनके अन्य अजब गजब साइंस फिक्शन ड्रीम रोबोट की बात करें तो इसकी चर्चा भी ङ्क्षहदी मीडिया में उस समय हुई जब शाहरूख को साथ लेकर शंकर ने रोबोट बनाने का फैसला लिया था पर शाहरूख की सल्तनत के सिपहसालारों ने इस जिद को लेकर बात बिगड़वा दी कि स्पेशल इफेक्ट शाहरूख की नई कंपनी मुंबई में ही तैयार करेगी जबकि शंकर अपना सारा काम चेन्नई में करते हैं।

जब शाहरुख के चक्कर में शंकर मुंबई की कई यात्राएं कर थक चुके तब इससे आहत धुन के धनी शंकर एक बार फिर चैन्नई लौटे और शाहरूख की बजाय अधेड़ और बेनूर हो चुके रजनीकांत के सामने ऐश्वर्या को खड़ा किया।  उस समय ऐसा लगा कि शंकर कहीं व्यर्थ में तो इतना बजट नहीं बहा रहे हैं पर शंकर ने सबकी सोच को साइड लाइन मार, साइंस फिक्शन रोबोट में भी भावनाओं का अंबार लगा दिया। एक मशीन के ह्दय में इंसानी मन के प्राकट्य और उससे पैदा हुई विद्रूपता को उन्होने दर्शकों के सामने पेश किया और फिर सिने रसिकों की वाहवाही पाई।

शंकर की पिछली फिल्म आई लचर पटकथा के कारण कुछ खास नहीं कर पाई। आई ने उनकी साख को हिंदी सिने दर्शकों के बीच थोड़ा कमजोर किया है।

वैसे आई का तकनीक स्तर तो उनकी पिछली फिल्मों जैसा ही था पर कथानक के सटीक प्रस्तुतिकरण में शंकर बुरी तरह मात खा गए। इस फिल्म के लिए चैन्नई में उन्हें किन्नर समाज का भारी विरोध झेलना पड़ा था। इस फिल्म के पोस्टर सड़कों पर जलाए गए। निंश्चित ही अपनी इस असफलता से शंकर काफी कुछ सीखें होंगे और शायद इसलिए उन्होंने कोई अन्य फिल्म बनाने के बजाय अपने पुराने शाहकार रोबोट का ही अगला पार्ट बनाने का निर्णय लिया हैं। लेकिन इस दौरान एस एस राजामौली ने बाहुबलि से हिंदी सिनेदर्शकों के बीच अपनी लोकप्रियता और सिने वैभव का एक नया संसार रच दिया है। इसलिए इस चुनौती से भी शंकर को निबटना होगा। रोबोट .2 में शंकर क्या पेश करने जा रहे हैं ये अभी तक पूरी तरह गोपनीय रखा गया है। अपनी अन्य फिल्मों की तरह अक्षय कुमार भी कुछ बता नहीं पा रहे हैं। लेकिन ये तो जरूर है कि 350 करोड़ के बजट को लेकर इस बार शंकर शायद एक बार फिर से भावों के सिनेमा को बढावा देंगे।

धर्मेंद्र उपाध्याय

 


-Dharmendra Upadhyay

पिछले सात साल से पिंकसिटी जयपुर के पत्रकारिता जगत के साथ रंगमंच और राजस्थानी सिनेमा में सक्रिय रहे युवा पत्रकार धर्मेंद्र उपाध्याय बतौर फिल्म पत्रकार काम करते हुए कई डॉक्यूमेंट्री फिल्मों का लेखन-निर्देशन कर चुके हैं। धर्मेंद्र उपाध्याय इन दिनों मुंबई स्क्रीन राइटर के रूप में सक्रिय हैं।

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