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Raja Hindustani


The Vintage DANGAL


From Film Desk:
Happy Birthday Aamir
-Qayamat se Dangal Tak


आमिर खान
क़यामत से दंगल तक

जन्मदिन 14 मार्च विशेष 

              

अभिनेता आमिर खान इन दिनों फिल्मों से ज्यादा अपने एक बयान की वजह से ज्यादा चर्चा में हैं। ये बात अलग है कि वो उस बयान के लिए साफगोई के साथ कह रहे हैं कि उन्होंने ऐसा बयान कभी नहं दिया बस उनकी बात को मीडिया ने अलग तरह से पेश किया। पिछले दिनों उन्होंने इंडिया टीवी के शो आपकी अदालत में भी इसे दोहराया। कि वो सिर्फ एक पति-पत्नी के बीच की बातचीत थी जो देश के बदलते हालतों को लेकर थी।  उसे देश छोड़ने से जोड़ना बिल्कुल गलत बात है और इस बात के लिए वो उनकी बीबी से कई बार डांट खा चुके हैं कि उन्होंने इस पति-पत्नी के बीच चली बात की चर्चा सरेराह कर क्यों मुसीबत मोल ली। इस कड़ी में उन्होंने सबके सामने कहा कि उनका उद्देशय पीके के जरिए हिंदू देवी देवताओं का मजाक उड़ाना बिल्कुल नहीं था,  और अगर इससे लोगों की भावनाएं आहत हुईं हैं तो वे इसके लिए सबसे सावर्जनिक माफी मांगते हैं।

आप की अदालत में मुजरिमनुमा आमिर को देखने के बाद सचमुच बड़ा ताज्जुब हुआ कि ये वोही आमिर है जो पिछले दशक में भुवन बनकर भारतीयों को देशभक्ति और एकता के स्वर में बहा रहा था। भारतीय मैनजमेंट स्कूल उनकी लगान की पटकथा को रामचिरत मानस जैसा आदर दे रहे थे। तो कभी ये आदमी इंजीनियरिंग स्कूल में लाइफ टीचर बनकर क्लास ले रहा था।

ये उनका फिल्मी व्यक्तित्व ही था जिसमें अव्वल रहने पर वो उन बातों को भी अंजाम दे रहे थे जो उनसे निजी जिंदगी में अछूती थी।  मसलन पढाई लिखाई का ही मामला लो तो बड़ी मुश्किल से अपनी स्कूली पढाई पूरी करने वाले आमिर की कैफियत नहंीं थी कि वो किसी इंजीनियरिंग स्कूल में लेक्चर दे पाएं। लेकिन यह संभव हो पाया उनकेअपने माध्यम सिनेमा के कारण जिसे बनाने में वे खुद को झोंक देते हैं। वैसे वे इस काम को निष्खटक अपनी करियर की शुरुआती दिनों से ही करते आ रहे हैं। लेकिन जब उनकी कैफियत इतनी नहीं थी । उस समय उनकी यही पहल निर्देशक के काम में दखलंदाजी के तौर पर देखी जाती थी।

एक सृजनशील अभिनेता

 आमिर खान शुरू से ही एक मेहनती और सृजनशील अभिनेता रहे वो अपने करियर के शुरूआती सालों से ही निर्देशक से अन्य सितारों की अपेक्षा अपने किरदार बारे में लगातार पूछते रहते थे। अपने किरदार में उतरने को पूरी मेहनत करने पर उतारू रहते थे।  रंगीला के समय वो स्वयं टपोरियों के साथ रहे और उनके स्टाइल को अपनाया और ‘आती क्या खंडाला’ गाने में जान डाल दी।

 

 उन्होंने  शुरू से ही खुद को सिर्फ एक अभिनेता समझकर अपने संवाद बोल सेट से कल्टी नहीं काटी वे फिल्म को पूरी तरह अपना लेते हैं। उनकी इसी बात को लेकर उनके करियर के शुरूआती सालों में उन्हें परेशानी भी हुई जब उन्हें निर्देशक के काम मे दखलंदाजी करने वाला अभिनेता कहा गया।

सबसे पहले उनके और निर्देशक के बीच विवाद की बातें दिल है कि मानता नहींं कि समय हुई। वजह कयामत से कयामत तक के बाद आमिर की लगातार दो-तीन फिल्में बॉक्स ऑफिस पर पिट चुकी थीं । उन्हें महेश भट्ट् की इस फिल्म से बड़ी आस थी लेकिन महेश भट्ट् थे कि दिल है कि मानता नहंी के साथ दो अन्य फिल्मों का काम भी कर रहे थे । आमिर इस बात पर नाराज हो जाते थे जब कई बार निर्देशक महेश सेट से ही गायब रहते थे।  कई सालों बाद  स्वयं महेश भट्ट् ने ही एक साक्षात्कार में आमिर के काम को लेकर सनक पर ये पटाक्षेप किया। जाहिर है कि वो महेश भट्ट से प्रभावित थे और शायद उनके निर्देशन को लेकर ये टकराहट नहीं थी पर उनकी लापरवाही को लेकर ये कड़वाहट पैदा हुई थी। लेकिन मीडिया ने इसे निर्देशक के काम में टांग अड़ाना बताया। अगर एसा होता तो आमिर अपने पिता ताहिर हुसैन को बतौर निर्माता फिर से लॉच करके महेश भट्ट् को हम है राही प्यार केमें बतौर निर्देशक साइन नहीं करते जिसके लिए बाद में महेशजी को बेस्ट डायरेक्टर का फिल्म फेयर अवार्ड मिला। 

अभिनय से निर्माण की ओर

 चाहे फिल्म को निर्देशक का माध्यम कहा जाए पर फिल्म के लिए पैसा मुहैया कराने वाले निर्माता को हम उससे किसी कीमत पर कम नहीं आक सकते हैं। आमिर सितारे थे और उन्होंने कभी भी निर्माता बनने की नहीं सोची थी। क्योंकि उन्होंने अपने पिता ताहिर हुसैन को एक असफल निर्माता के रूप में देखा । निर्माता पिता की फिल्म लॉकेट की असफलता और तगादेदारों का उनके घर के इर्द-गिर्द  मंडराना,  पिता को लगातार परेशान देखना उनके बचपन का एक हिस्सा रहा । इसलिए उन्हें फिल्म निर्माण की बात सोचने से ही डर लगने लगता था।  लगान के लिए भी आमिर ने अपने दोस्त आशुतोष को एक बार तो मना कर दिया था पर छह महिने बाद सब वो एक पूरी स्क्रिप्ट के साथ आमिर से मिले तो वो उनके कंटेट से प्यार कर बैठे। और उन्होंने निर्माता बनने की ठान ली। दरअसल वो पैसा बनाने की खातिर निर्माता नहीं बने थे उनका लक्ष्य सिर्फ  एक अच्छे कंटेट को लोगों तक पहुंचाना था।  वो इसके लिए ना केवल आगे आए बल्कि उनकी इस मेहनत ने उन्हें बॉलीवुड के सफल निर्माताओं की कतार में खडा कर दिया। 

एक साधक निर्देशक आमिर 

सितारा अभिनेता और निर्माता बनने के बाद आमिर का निर्देशक बनना भी उनके लिए एक चुनौती थी। तारे जमीं पर (2007) से वे फिल्म निर्देशक बने पर इसके लिए उनकी कोई पहले से प्लानिगं नहीं थी। पहले ये कहानी अमोल गुप्ते डायरेक्ट करने वाले थे और फिल्म पर काफी काम हो चुका था। इस फिल्म की स्क्रिप्टको लेकर भी अमोल से सृजनात्मक मतभेद ज्यादा नहीं था। इसके लिए सबसे बड़ी बजह थी अमोल मुख्य बाल कलाकार के रूप में अपने बेटे पार्थो को कास्ट करना चाहते थे। जबकि आमिर तब तक दर्शील सफारी से मिल चुके थे और दर्शील की टेडे मेढ़े खरगोशनुमा दांतों वाले चेहरे में उन्हें अपनी दुनियां में खोए रहने वाले वो बच्चा मिल गया जो इस फिल्म का नायक होना था।   अमोल आमिर से अलग हुए तो इंडस्ट्री और मीडिया ने आमिर को खूब आड़े हाथों लिया आमिर बिल्कुल अकेले पड़ चुके थे। लेकिनि आमिर ने दर्शील को फोकस में रखकर पूरी फिल्म को बतौर निर्देशक पूरा किया और पहली फिल्म से ही फिल्म फेयर का बेस्ट डायरेक्टर अवार्ड पाया। अमोल गुप्ते चाहे फिल्म से अलग हो गए थे पर फिल्म का संपादन उनकी धर्मपत्नी दीपा भाटिया से कराया।   

 चुनौतियां और आमिर का वर्तमान

आमिर का शाब्दिक अर्थ होता है- नायक अथवा नेतृत्व करने वाला।  आमिर ने सत्यमेव जयते के जरिए अपने नाम के अनुरूप अपने चरित्र को गढने की

कोशिशि की जो काफी हद तक सही थी लेकिन इसके काफी सारे साइड इफेक्ट हुए। सबसे पहले तो वे एक सिनेकर्मी से सीधे मीडियाकर्मी बन बैठे। इससे जाहिर है कि मीडिया का एक धड़ा ही उनका विरोधी हो गया। इसके साथ ही उनके बनाए सत्ययमेव जयते के विशेष एपीसोड्स पर ही संगठनों ने उंगलियां उठानी शुरू कर दी।  वो अपनी बूढी वालिदा के साथ हज पर क्या गए लोगों ने सोश्यल साइट्स पर उनके कुछ कथित फोटो (कांटछांटकर) लगाए जिनमें कहा गया कि आमिर खान सत्ययमेव जयते के जरिए फंड जुटाकर आतंकवादी संगठनों की मदद कर रहे हैं।  

फूंक फूंक दे देकर आमिर के खिलाफ भड़काई जा रही इस आग में घी का काम किया राजकुमार हीरानी और अभिजात जोशी लिखित पी के की स्क्रिप्ट ने। फिल्म का विरोध हुआ, फिर भी सिनेपे्रमियों ने इस फिल्म को जबर्दस्त व्यवसाय दिया। लेकिन इसके बाद भी वो अपने देश के एक वैचारिक धड़े पैनी निगाहों का शिकार रहे।  उनके देश छोड़कर जाने की बयान को लेकर पूरे देश में उनकी भर्तस्ना हुई है और फिलहाल आलम ये है कि उनकी हर एक्टिविटी को देश के खिलाफ देखा जा रहा है।  इसके लिए उन्होंने कई बार सफाई देते हुए अपने भावुक स्वभाव के कारण आंखें भी गीली कर ली हैं। 

लेकिन ये कहना गलत ना होगा कि आमिर जब जब अकेले पड़ते हैं तो वे ज्यादा दमदार होकर उभरते हैं। चाहे उनका पत्नी रीना से अलगाव के बाद तीन साल फिल्मी करियर का बांझ होना हो , या अमोल गुप्ते का उन्हें तारे जमीं पर के समय छोड़कर जाना हो। सब प्रकरणों में आमिर ने जबर्दस्त वापसी कर  खुद को सिद्ध किया है। इन दिनों एक बार फिर वे अपनी  फिल्म दंगल को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। वे हर फिल्म में खुद को खूब खर्च करते हैं और इसका असर उनकी फिल्मों में भी दिखता है। पहली बार हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का चॉकलेटी चेहरा सफेद दाढी में पर्दे पर नजर आने वाला। दंगल में वे दो बेटियों के बाप पहलवान महावीर फोगाट के किरदार में नजर आएंगे। फिल्म को लेकर मीडिया में हुई शुरूआती चर्चाओं में ये आमिर की फिल्म है, लेकिन हो सकता है ये फिल्म सितारा आमिर की फिल्म से ज्यादा देश की कुश्ती , पारिवारिक रिश्तों और नारी शक्ति को बयां करने वाली फिल्म साबित हो और  देश की जनता के बीच खोया हुआ आमिर का आदर उन्हें वापिस लौटाए आमीन ...

यौमे पैदाइश मुबारक हो आमिर साहब

 

धर्मेंद्र उपाध्याय

पिछले सात साल से पिंकसिटी जयपुर के पत्रकारिता जगत के साथ रंगमंच और राजस्थानी सिनेमा में सक्रिय रहे युवा पत्रकार धर्मेंद्र उपाध्याय बतौर फिल्म पत्रकार काम करते हुए कई डॉक्यूमेंट्री फिल्मों का लेखन-निर्देशन कर चुके हैं। धर्मेंद्र उपाध्याय इन दिनों मुंबई स्क्रीन राइटर के रूप में सक्रिय हैं। . 

  


-Dharmendra Upadhyay

पिछले सात साल से पिंकसिटी जयपुर के पत्रकारिता जगत के साथ रंगमंच और राजस्थानी सिनेमा में सक्रिय रहे युवा पत्रकार धर्मेंद्र उपाध्याय बतौर फिल्म पत्रकार काम करते हुए कई डॉक्यूमेंट्री फिल्मों का लेखन-निर्देशन कर चुके हैं। धर्मेंद्र उपाध्याय इन दिनों मुंबई स्क्रीन राइटर के रूप में सक्रिय हैं।

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