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मीटती हुई आरज़ू – Stanish Gill

मीटती हुई आरज़ू ,जलता हुआ आशिया, यह है मेरी ज़िन्दगी यह है मेरी दास्ता. मंजीलें और बदती गयी, मैंने जब भी बड़ाए कदम, साँसों मे हलचल मची, अब घुट रहा है दम , जीवन के इस मोड़ पे, दिकता नहीं … Continue reading

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