Tag Archives: Shashi Kant Juneja

हर रोज़ दीवाली हर रोज़ दशहरा (कविता) – शशिकांत जुनेजा

हर रोज़ दिवाली होती है, हर रोज़ दशहरा  होता है. हर रोज़ अच्छाई का, गर दिल पर पहरा होता है. हर रोज़ दिवाली……. दिल में राम है, दिल में ही तो रावण है. दिल में ही पतझड़, दिल में ही … Continue reading

Posted in Members Contributions, Members' Creations | Tagged | Comments Off on हर रोज़ दीवाली हर रोज़ दशहरा (कविता) – शशिकांत जुनेजा

चेहरे की चंद लकीरों ने (कविता) – शशि कान्त जुनेजा

चेहरे की चंद लकीरों ने ,लिख डाली नई कहानी. पहले तो खोया बचपन , अब खो गई जवानी . न कोई शिकन थी चेहरे पर ना ज़िक्र कोई, कर डाला जो कर डाला, पर न फ़िक्र कोई. रोज सुनाया करते … Continue reading

Posted in Members Contributions, Members' Creations | Tagged , | Comments Off on चेहरे की चंद लकीरों ने (कविता) – शशि कान्त जुनेजा

आओ आओ ग़ज़ल सी बात करें (कविता) – शशि कान्त जुनेजा

आओ आओ ग़ज़ल सी बात करें,पूरी आधी रात करें . चाँद सितारों की महफ़िल में खुद को आत्मसात करें. आओ ग़ज़ल सी बात ………. यह चाँद भी बोले गा, हर तारा बोले गा, काली रात का साया भी, हर लम्हा … Continue reading

Posted in Members Contributions, Members' Creations | Tagged , | Comments Off on आओ आओ ग़ज़ल सी बात करें (कविता) – शशि कान्त जुनेजा