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में अकेला पहाड़ तोड़ सकता हूँ (कविता) – मधुर त्यागी

मेरी इस कविता के प्रेरणा श्रोत बिहार के गहलौर गाव के दशरथ मांझी जी हैं। जो एक लक्षय मन में रखकर दिन रात लगातार २२ साल तक पहाड़ के एक एक पत्थर को तोड़ते रहे ताकि वो एक दिन उसमें से रास्ता निकाल … Continue reading

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