Tag Archives: Ghazal

एक रोज़ (ग़ज़ल) – उमेश धरमराज

एक रोज़… मिल गए थे राह में वो दफ्अतन चढ गया नशा लगी उनकी लगन. वो थे आगे और हम पिछे चले देखा दुनिया ने मेरा दिवानापन. चढ गया नशा लगी उनकी लगन… देखना उनका अदा से बारहा इश्क़ का … Continue reading

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ग़ज़ले 5 – धवल चोखडिया

ग़ज़ले – धवल चोखडिया   (1)   कुछ इस तरह हम सब से अलग हो गए जैसे सुबह को आँखों से नींद चली जाती है   आखिर तक उसने गुफ्तगू की उम्मीद रखी लेकिन कुछ बातें नज़रो से भी कही … Continue reading

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