Tag Archives: ग़ज़ल

एक रोज़ (ग़ज़ल) – उमेश धरमराज

एक रोज़… मिल गए थे राह में वो दफ्अतन चढ गया नशा लगी उनकी लगन. वो थे आगे और हम पिछे चले देखा दुनिया ने मेरा दिवानापन. चढ गया नशा लगी उनकी लगन… देखना उनका अदा से बारहा इश्क़ का … Continue reading

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ग़ज़ले 5 – धवल चोखडिया

ग़ज़ले – धवल चोखडिया   (1)   कुछ इस तरह हम सब से अलग हो गए जैसे सुबह को आँखों से नींद चली जाती है   आखिर तक उसने गुफ्तगू की उम्मीद रखी लेकिन कुछ बातें नज़रो से भी कही … Continue reading

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हुआ तेरे हक़ में फैसला – ग़ज़ल – उमेश धरमराज

हुआ तेरे हक़ में फैसला   तुझसे पहले कितने मिले तुझसा पहले नहीं मिला. हर शै तुझसे हार गयी हुआ तेरे हक़ में फैसला.   सबब ये हैं दिदार हो ये हैं चर्चे तेरे ही नूर के. हद-ए-नज़र तक कारवां … Continue reading

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तज़करा तेरी जुदाई का मगर होता है (ग़ज़ल) – सय्यद निसार अहमद

ग़ज़ल तज़करा तेरी जुदाई का मगर होता है ********************************* जब कभी मेरे तख़य्युल का सफ़र होता है ! ऐसा क्यों है तेरे कूचे से गुज़र होता है !! जब तेरा रूप मेरे पेश-ए-नज़र होता है ! मेरे अश्कों में मेरा … Continue reading

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