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तज़करा तेरी जुदाई का मगर होता है (ग़ज़ल) – सय्यद निसार अहमद

ग़ज़ल तज़करा तेरी जुदाई का मगर होता है ********************************* जब कभी मेरे तख़य्युल का सफ़र होता है ! ऐसा क्यों है तेरे कूचे से गुज़र होता है !! जब तेरा रूप मेरे पेश-ए-नज़र होता है ! मेरे अश्कों में मेरा … Continue reading

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