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मेरी माँ (कविता) – जय शंकर झा

मेरी माँ  मुश्कान तेरी मुझको दुनिया से प्यारी माँ आँचल में तेरे है सबकुछ ओ मेरी माँ ये है मजबूरी मेरी कि  कुछ कर नहीं पाता चुपचाप तेरी गोदी में यूं ही सो जाता मेरी माँ, ओ मेरी माँ ,प्यारी माँ,न्यारी माँ। … Continue reading

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