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तेरी कमी (कविता) – जय शंकर झा

तेरी कमी इन् हवाओ में आज एक कमी सी लगी फिर से वो मेरे बदन का पसीना पोंछकर तो गुजरा फूलो की खुशबू धुप की मासुमियत मौसम की मदमस्ती यु तो पहले ही सा था सब नजारा;   मगर आज! … Continue reading

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