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ग़ज़ले 5 – धवल चोखडिया

ग़ज़ले – धवल चोखडिया   (1)   कुछ इस तरह हम सब से अलग हो गए जैसे सुबह को आँखों से नींद चली जाती है   आखिर तक उसने गुफ्तगू की उम्मीद रखी लेकिन कुछ बातें नज़रो से भी कही … Continue reading

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