Tag Archives: जय शंकर झा

तेरी कमी (कविता) – जय शंकर झा

तेरी कमी इन् हवाओ में आज एक कमी सी लगी फिर से वो मेरे बदन का पसीना पोंछकर तो गुजरा फूलो की खुशबू धुप की मासुमियत मौसम की मदमस्ती यु तो पहले ही सा था सब नजारा;   मगर आज! … Continue reading

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जब चाँद छू रहा था बदन तेरा (कविता) – जय शंकर झा

जब चाँद छू  रहा था बदन तेरा जय शंकर झा की कविता वो इश्क़ की काली स्याही रात थी दबी-दबी सी मेरी हर जज्बात थी मै जल रहा था चांदनी से बेकल बेबस मजबूर सा खड़ा जब चाँद छू  रहा … Continue reading

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मेरी माँ (कविता) – जय शंकर झा

मेरी माँ  मुश्कान तेरी मुझको दुनिया से प्यारी माँ आँचल में तेरे है सबकुछ ओ मेरी माँ ये है मजबूरी मेरी कि  कुछ कर नहीं पाता चुपचाप तेरी गोदी में यूं ही सो जाता मेरी माँ, ओ मेरी माँ ,प्यारी माँ,न्यारी माँ। … Continue reading

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