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जब चाँद छू रहा था बदन तेरा (कविता) – जय शंकर झा

जब चाँद छू  रहा था बदन तेरा जय शंकर झा की कविता वो इश्क़ की काली स्याही रात थी दबी-दबी सी मेरी हर जज्बात थी मै जल रहा था चांदनी से बेकल बेबस मजबूर सा खड़ा जब चाँद छू  रहा … Continue reading

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