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खामोश सा हो गया (कविता) – जुनेजा शशिकांत

खामोश सा हो गया जब रक्त अपना बह गया शब्द भी खामोश थे, दिल क्या जाने कह गया. खामोश सा हो गया, जब रक्त अपना बह गया शब्द भी तो मात दे गए , अकस्मात दे गए. आंसू भी खुश्क … Continue reading

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