Tag Archives: कविता

खामोश सा हो गया (कविता) – जुनेजा शशिकांत

खामोश सा हो गया जब रक्त अपना बह गया शब्द भी खामोश थे, दिल क्या जाने कह गया. खामोश सा हो गया, जब रक्त अपना बह गया शब्द भी तो मात दे गए , अकस्मात दे गए. आंसू भी खुश्क … Continue reading

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पानी से जुड़ी सात चौपाइयां (पानीवली) – – अमित कुमार तिवारी

सुबह नहाने को चले चार बाल्टी दन्न* दिन भर बूंद बूंद को तरसे दूर भयो मति भ्रम जल ही जीवन है कहते बुज़ुर्ग सत्य आज अमल हम कर रहे कल तक समझे व्यर्थ कतार में लगे चार लोग अजब यह … Continue reading

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तेरी कमी (कविता) – जय शंकर झा

तेरी कमी इन् हवाओ में आज एक कमी सी लगी फिर से वो मेरे बदन का पसीना पोंछकर तो गुजरा फूलो की खुशबू धुप की मासुमियत मौसम की मदमस्ती यु तो पहले ही सा था सब नजारा;   मगर आज! … Continue reading

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कुछ यादें (कविता) – अब्दुल्लाह खान

कुछ यादें ———————————————— माज़ी के दरीचे से कुछ यादें उतर आयीं  हैं मेरे ख्यालों के सेहन में तबस्‍सुम से लबरेज़ यादे  ग़म से आलूदा यादें यादें जो पुरसुकून हैं यादें जो बेचैन  हैं  मेरे वॉर्डरोब  में रखे कपड़ो की महक … Continue reading

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बात कौन करे (कविता) – जयेश मेस्त्री

बात तो करनी है, बात कौन करे पहले तुम या मैं, बात कौन करे चांद तेरे इश्क में बावला हो गया गजब है, हाय अब रात कौन करे दिल ही दिल से अगर मिलते रहे तो आपस में मुलाकात कौन करे … Continue reading

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हाय क्या चांद देखा (कविता) – जयेश मेस्त्री

पहले चांद को देखा, फिर मैने तुम्हे देखा. धरती पर मैने हाय क्या चांद देखा. बिन तुम्हारे जिंदगी कैसे होगी, ये सोचा. तब जिंदगी को मैने तनहा मायूस देखा. गिरते गिरते यू संभल जाता हूं मै. मैने अपने हाथो मे तुम्हारा … Continue reading

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जब चाँद छू रहा था बदन तेरा (कविता) – जय शंकर झा

जब चाँद छू  रहा था बदन तेरा जय शंकर झा की कविता वो इश्क़ की काली स्याही रात थी दबी-दबी सी मेरी हर जज्बात थी मै जल रहा था चांदनी से बेकल बेबस मजबूर सा खड़ा जब चाँद छू  रहा … Continue reading

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