Category Archives: Members’ Creations

Here we publish the original creative materials submitted by our Members.

तज़करा तेरी जुदाई का मगर होता है (ग़ज़ल) – सय्यद निसार अहमद

ग़ज़ल तज़करा तेरी जुदाई का मगर होता है ********************************* जब कभी मेरे तख़य्युल का सफ़र होता है ! ऐसा क्यों है तेरे कूचे से गुज़र होता है !! जब तेरा रूप मेरे पेश-ए-नज़र होता है ! मेरे अश्कों में मेरा … Continue reading

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जवानी वतन के नाम लिखता है (गीत) – अमित कुमार शर्मा

     जवानी वतन के नाम लिखता है। ज़ज्बे के पन्नों पर इरादों की कलम से, सहादत का कलाम लिखता है। हर जवान अपनी जवानी वतन के नाम लिखता है। हमनें तो महबूबा मुल्क़ को समझा है बस इसी से मोहब्बत … Continue reading

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में अकेला पहाड़ तोड़ सकता हूँ (कविता) – मधुर त्यागी

मेरी इस कविता के प्रेरणा श्रोत बिहार के गहलौर गाव के दशरथ मांझी जी हैं। जो एक लक्षय मन में रखकर दिन रात लगातार २२ साल तक पहाड़ के एक एक पत्थर को तोड़ते रहे ताकि वो एक दिन उसमें से रास्ता निकाल … Continue reading

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किलकारियाँ (कविता) – अमित कुमार तिवारी

कविता :   किलकारियां कवि : अमित कुमार तिवारी वह घुटनों के बल मेरा फिसलना बात बात में शरारत करना कभी तुम्हारे पैरों के सहारे पांवों पर खडे होने की कोशिश करना कहीं भी गिरूं तो मां मां पुकारना मेरा तुम्हारा वह रसोई … Continue reading

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भारत माता (कविता) – मदनलाल गोयल

भारत माता यहाँ देव लोक की वाणी है, कुदरत की लिखी कहानी है । यहाँ साधू संतो का साया है, जिन्हे शांति पाठ पढ़ाया है । माँ गंगा ऊपर से आई है, अमृत जल की धारा लाई है । है … Continue reading

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निर्दोष (कविता) – मदनलाल गोयल

निर्दोष चोर को चोर कैसे पकड़ पायेगा, एक दूसरे को जानता है कैसे हाथ आएगा । फिर कोई निर्दोष चोर बता कर पकड़ा जायेगा, चलेगा उस पर मुक्कदमा पूरा महकमा जुट जायेगा । आया है अब पकड़ में बहुत राज़ … Continue reading

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ज़िन्दगी – उमेश धरमराज

ज़िन्दगी तेरी ओर ही हैं ज़िन्दगी. कुछ और भी हैं ज़िन्दगी…   भोर से उजली भी हैं घनघोर भी हैं ज़िन्दगी. खुशीयां देती हैं कभी ग़मखोर भी हैं ज़िन्दगी. फुलों से नाज़ुक नाज़ुक कठोर भी हैं ज़िन्दगी. तेरी ओर ही … Continue reading

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रब की मर्ज़ी में मैं होता (गीत) – सुशांत

 रब की मर्ज़ी में मैं होता तेरी किस्मत खुद मै लिखता हो जाते एक दूजे के हम एक दूजे पर जीता मरता ये सारे जज़्बात बदल दो  जिसमें हूँ  मै बात बदल दो इश्क़ बदल दो प्यार बदल दो अपने … Continue reading

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“सूखे गुलाब की महक” – मनोजकुमार मिश्रा

भागलपुर स्टेशन पे झटके से इंटरसिटी ट्रेन आकर रूकी तो प्रिया की आंखें अचानक से खुल गयी। अलसायी नज़रो से बाहर देखा तो कुछ एक लोग ही नज़र आ रहे थे। गाड़ी पकड़ने के जल्दबाजी ने प्रिया को थका दिया … Continue reading

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महाराष्ट्र के दो रत्न – लताजी और सचिन को समर्पित कविता – अमित कुमार

गीतकार – अमित कुमार तिवारी सुर सम्राज्ञी लता जी ताई * युग युग जियें आप हमारी बधाई सचिन सर जी के रिकार्ड अनोखे भारत रत्न ऐसे ही होते ” ज्योति कलश छलके ” गीत सुनकर आज भी घरों में सुबह … Continue reading

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