Category Archives: Members’ Creations

Here we publish the original creative materials submitted by our Members.

दो किनारों की दास्ताँ (कविता) – आशुतोष तिवारी

दो किनारों की दास्ताँ सुनो, तुम्हे दो किनारो की, एक दास्ताँ सुनाता हूँ। उम्र से पहले जो ढल गया, किस्सों से भी आगे निकल गया तेज ख़ामोशी का दरिया, जिन दो किनारों को निगल गया। एक किनारा, आज नदी के … Continue reading

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मंथन (कविता) – चन्दन कुमार मिश्रा

(मंथन) दर दर मैं यूँ फिरता हूँ गिरके फिर सम्भलता हूँ किसी के उठाने की मैं क्यों आस करूँ समझ में नहीं आता किस पे विश्वास करूँ। कोई कहता हम हिन्दू हैं कोई कहता है हम मुस्लिम हैं समझ नहीं … Continue reading

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पहचान … (ग़ज़ल) – UE विजय शर्मा

पहचान …                 खुदायी सा प्यारा साथ है यह साथ हमारा तुम्हारा बन मुस्कान साथ चलता है यह साथ हमारा तुम्हारा किसी मंज़िल की तलाश नही है मेरे मन को हमारी राह-ए-ज़िन्दगी पर … Continue reading

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No ‘Re-Take’ Actor (कहानी) – Rajkumar Arya

No “Re-Take” Actor यह कहानी एक ऐसे “एक्टर” की है जो सिर्फ फिल्मो का ही नहीं बल्कि अपनी वास्तविक जिंदगी का भी एक्टर था। जिसने फिल्मो के साथ साथ कभी अपनी जिंदगी में भी दोबारा कोई “रि-टेक” नहीं लिया। वह … Continue reading

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खामोश सा हो गया (कविता) – जुनेजा शशिकांत

खामोश सा हो गया जब रक्त अपना बह गया शब्द भी खामोश थे, दिल क्या जाने कह गया. खामोश सा हो गया, जब रक्त अपना बह गया शब्द भी तो मात दे गए , अकस्मात दे गए. आंसू भी खुश्क … Continue reading

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हर रोज़ दीवाली हर रोज़ दशहरा (कविता) – शशिकांत जुनेजा

हर रोज़ दिवाली होती है, हर रोज़ दशहरा  होता है. हर रोज़ अच्छाई का, गर दिल पर पहरा होता है. हर रोज़ दिवाली……. दिल में राम है, दिल में ही तो रावण है. दिल में ही पतझड़, दिल में ही … Continue reading

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रावण का आत्मदाह (Kahani) – आशुतोष तिवारी

रावण का आत्मदाह हर साल की तरह, इस साल भी रावण का पुतला बनाया गया! रावन दहन से 2 दिन पहले, तय समय पर भरे बाज़ार में रावण को रस्सियों से बाँध कर लटका दिया गया! 2 दिन और 2 … Continue reading

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एक रोज़ (ग़ज़ल) – उमेश धरमराज

एक रोज़… मिल गए थे राह में वो दफ्अतन चढ गया नशा लगी उनकी लगन. वो थे आगे और हम पिछे चले देखा दुनिया ने मेरा दिवानापन. चढ गया नशा लगी उनकी लगन… देखना उनका अदा से बारहा इश्क़ का … Continue reading

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प्यास का मौसम (कविता) – उमेश धरमराज

प्यास का मौसम यादें जगा रहा हैं बरसात का मौसम आया हैं लौट के फीर प्यास का मौसम. ए काश के मुझको अभी होश ना होता या फिर तक़दिर में दोष ना होता. अमृत क्यों ना बरसे रातों में तेरे … Continue reading

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हुआ तेरे हक़ में फैसला – ग़ज़ल – उमेश धरमराज

हुआ तेरे हक़ में फैसला   तुझसे पहले कितने मिले तुझसा पहले नहीं मिला. हर शै तुझसे हार गयी हुआ तेरे हक़ में फैसला.   सबब ये हैं दिदार हो ये हैं चर्चे तेरे ही नूर के. हद-ए-नज़र तक कारवां … Continue reading

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