ज्योति कलश छलके (गीत समीक्षा) – अमित कुमार तिवारी

गीत ज्योति कलश छलके का एक दृश्य जिसमें मास्टर अज़ीज के साथ अभिनेत्री
मीना कुमारी जी हैं
गीत की दृष्टि से रचना का अवलोकन-
गीत में नरेन्द्र शर्मा जी ने विशुद्ध हिन्दी शब्दों का प्रयोग सुन्दरता
के साथ किया है. कुमकुम, बिरवा, बिन्दु, तुहिन, पात पात जैसे शब्दों से
काव्य को सजाया गया है, गीत प्रमुखतयः से प्रातः काल के सौन्दर्य और
मानसिक सात्विकता का बोध कराता है।
गायन की दृष्टि से अवलोकन –
लताजी ने श्रेष्ठ पार्श्व गायन किया है , गीत सुनने के उपरान्त
शब्दकोश सूची में कोई भी शब्द कम ही मालूम पड़ता है
संगीत की दृष्टि से अवलोकन –
सुधीर फड़के जी ने संगीत की रचना में पारम्परिक संगीत यन्त्रों का प्रयोग
किया है साथ ही उनका संगीत निर्देशन गीत को अविस्मरणीय आयाम प्रदान करता है।

गीत इस प्रकार है –
आअआआ
ज्योति कलश छलके – ४
हुए गुलाबी, लाल सुनहरे
रंग दल बादल के
ज्योति कलश छलके
घर आंगन वन उपवन उपवन*
करती ज्योति अमृत के सींचन
मंगल घट* ढलके* – २
ज्योति कलश छलके
अम्बर कुमकुम कण बरसाये
फूल पँखुड़ियों पर मुस्काये
बिन्दु तुहिन* जल के – २
ज्योति कलश छलके
ज्योति कलश छलके एएएए – २
पात पात बिरवा* हरियाला
धरती का मुख हुआ उजाला
सच सपने कल के – २
ज्योति कलश छलके
ऊषा* ने आँचल फैलाया
फैली सुख की शीतल छाया
नीचे आँचल के – २
ज्योति कलश छलके
ज्योति कलश छलके एएए
ज्योति कलश छलके
ज्योति यशोदा धरती गइयां
नील गगन गोपाल कन्हैया  (दो पंक्तियों में दोहराव)
श्यामल छवि झलके एएएए – २
ज्योति कलश छलके
ज्योति कलश छलके एएएए
ज्योति कलश छलके
(*गीत शब्दार्थः  उपवन – घर , ऊषा – प्रकाश की किरण , बिरवा – पौधा ,
तुहिन – ओस, घट – स्थान अथवा जगह, ढलके – करना)

मास्टर अज़ीज और मीना कुमारी जी का गीत में अभिनय दिलों को छू लेता है
आज भी गीत नित्य सुबह अनेक घरों में सुना जाता है और मन मानस को
प्रसन्नता का आभास कराता है।
गीत समीक्षक – अमित कुमार तिवारी
(गीत की समीक्षा स्वतन्त्र गीत समीक्षक के रूप में की गई है)
amitapkamitra@gmail.com

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