ख़ता बख्श दे गर ख़ता हो गई (गीत) – अमित कुमार तिवारी

ख़ता बख्श दे गर ख़ता हो गई
सुना है कि तू बेवफा हो गई
जन्नते इश्क के सैलाब में
खुशनुमा ज़िन्दगी फ़ना हो गई
ख़ता बख्श दे गर ख़ता हो गई…

 

इबादत का है सच्चा उसूल
तू मुझको कबूल मैं तुझे कबूल
कहदे, खामोशियों की चिलमन हटा
बेवफाई तेरी अफवाह हो गई
ख़ता बख्श दे गर ख़ता हो गई….

 

पायल तेरी खनके आज भी
चेहरे की रंगते पंखुडी गुलाब सी
लुटने को बेकरार धडकने मेरी
सोचता मैं रहा तू दफ़ा हो गई
ख़ता बख्श दे गर ख़ता हो गई….

तेरे जाने के बाद पहले से ज़्यादा
मुझको तेरी परवाह हो गई
सुबह से शामें गुजरती रहीं
खुली खिइकी तेरी गवाह हो गई
ख़ता बख्श दे गर ख़ता हो गई

 

सुना है कि तू बेवफा हो गई
जन्नते इश्क के सैलाब में
खुशनुमा ज़िन्दगी फ़ना हो गई ।।

गीतकार अमित कुमार तिवारी

amitapkamitra@gmail.com

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