Monthly Archives: September 2015

क्या मैं तुम्हे याद आ रहा हूँ? – Prakash H. Patil

तुमसे दूर- एक अंजान शहर जा रहा हूँ… मैं तो तुम्हे याद कर रहा हूँ- क्या मैं तुम्हे याद आ रहा हूँ?   यहाँ भी कुछ दोस्त मिले- न जाने क्यूं मैं उन्हें भा रहा हूँ… मैं तो तुम्हे याद … Continue reading

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चिड़िया कैसे बाज़ हुई – प्रशांत टंडन

टकराया फिर दिल से दिल , दिल की ना आवाज़ हुई | कल तक जो इक चिड़िया थी , आज वो कैसे बाज़ हुई ||१|| ये कैसी है दास्ताँ , मशहूर हुई फिर राज़ हुई | हम तो कल-कल कहते … Continue reading

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Mentorship Opportunity for 100 Story Tellers

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The Sufi – A Sufi Song by Pradeep Chaturvedi

Sabarmati   Parwardigar-e-jindagi Sabarmati Sabarmati Parwardigar-e-jindagi de dard ka nuskha Kalma tere dar pe likha ho  naam ho uska Tu waste ho jaye mere Raste khul jaye mere Sanson mein Sabarmati Bahon mein bekhudi Saiyaron mein marhabaa Parwardigar-e-jindagi de dard … Continue reading

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नयना खो लो साँवरे – सशांत चतुर्वेदी का गीत

जब से जागी है  सुबह प्यारी खड़ी है तेरे लिए जब से जागी है  सुबह प्यारी खड़ी है तेरे लिए नयना खो लो साँवरे   देखे कोई चेहरा मेरा मै न आउंगी कल इतनी बेबस प्यार में घर से आयी … Continue reading

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सांवरिया – सशांत चतुर्वेदी का गीत

ओढ़ ले दिल की चादर सांवरिया महके तन-मन सरफ़रोशी अंधियारे हैं कजरा रे तेरे नैना हैं मनमौजी …..   दे दे मुझको सुबह सिंदूरी शाम झूमर सी जल जाये देख लूँ दुनिया एक ही नजर में चेहरे का तेरे आईना … Continue reading

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Joint Family – Ruma Paul

JOINT FAMILY By – Ruma Paul                        Do Joint Families still exist in India? If we ask this question to a mere child of today he/she would say No. Joint Family concept is dying fast today, though it had been … Continue reading

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मेरी चंद और ग़ज़ले २ – धवल

(5) हो सके तो आज एक गुस्ताखी कर दो सब को मुंह पे तुम सच सच कह दो क्यूँ अंदर ही अंदर अलाव जलाये रखे अपने घर को छोड़के पूरा शहर जला दो बहरी ख्वाइशो को कुछ करतब देखने है … Continue reading

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कहां खडी है हिंदी ? – रूद्रभानु प्रताप सिंह

कहां खडी है हिंदी? लेखक – रुद्रभानु प्रताप सिंह ‘हिंदी को डरने की जरूरत नहीं है, अंग्रेज़ी के बाद पूरे विश्व में यह सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। यह स्पेनिश और चीनी भाषा से आगे निकल गई है। … Continue reading

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MAASUMON KA JANAZA – Kumar Rajiv Ranjan

Har harf me ho raha dard ye wo manzar hai… Nanhe jism ko bhi berahmi se chir daale ye kaisa khanjar hai Sharmsaar hua insaan… ye kin ke paapon ka khamiaza hai Nazar utha ke dekho ye MAASUMON KA JANAZA … Continue reading

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