ज़फ़र गोरखपुरी (श्रद्धांजलि)

 

Zafar Gorakhpuri

ज़फ़र गोरखपुरी (5 मई 1935 – 29 जुलाई 2017)

(श्रद्धांजलि)

ज़फ़र गोरखपुरी

जन्म: बैदौली बासगांव, गोरखपुर | निधन: मुम्बई, अंधेरी (पश्चिम

गुज़रे ज़माने के वरिष्ठ शायर ज़फ़र गोरखपुरी का शनिवार 29 जुलाई 2017 को निधन हो गया। वे अपने पीछे पुत्र अयाज गोरखपुरी और इंतेयाज गोरखपुरी को छोड़ गए हैं।

ज़फ़र साहब ने हिंदी फ़िल्मों के लिए भी कई यादगार गीत लिखें, जैसे “किताबें बहुत सी पढ़ी होंगी तुमने” (बाज़ीगर 1996)। उनके अन्य लोकप्रिय गीतों के बारे में जानने के लिए इस लिंक पर जाएँ।

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ज़फ़र गोरखपुरी बासगांव तहसील के बेदौली बाबू गांव में 5 मई 1935 को जन्मे। प्रारंभिक शिक्षा गांव में प्राप्त करने के बाद उन्होंने मुंबई को अपना कर्मक्षेत्र बनाया। बताया जाता है कि मुम्बई वे मजदूरी करने गए थें। सन 1952 में उन्होंने शायरी की शुरूआत की थी। उन्हें अपने ज़माने में एक से एक आला शायरों का साथ मिला। वे फ़िराक़ गोरखपुरी,जोश मलीहाबादी, मजाज़ लखनवी और जिगर मुरादाबादी सरीखे शायरों को सुनते और उन्हें भी अपनी शायरी सुनाते। उनके पास न केवल विशिष्ट और आधुनिक अंदाज़े बयां था, बल्कि उन्होंने उर्दू गजल के क्लासिकल मूड को भी नया आयाम दिया। आवाम से जुड़ाव की ताज़गी ने उनकी ग़ज़लों को आम आदमी के बीच लोकप्रिय बनाया। ज़फ़र प्रगतिशील लेखक संघ से भी जुड़े थे।

ज़फ़र गोरखपुरी का पहला संकलन तेशा (1962) दूसरा वादिए-संग (1975) तीसरा गोखरु के फूल (1986) चौथा चिराग़े-चश्मे-तर (1987) पांचवां संकलन हलकी ठंडी ताज़ा हवा(2009) प्रकाशित हुआ।  हिंदी में उनकी ग़ज़लों का संकलन आर-पार का मंज़र 1997 में प्रकाशित हुआ। उन्होंने बाल साहित्य में भी योगदान दिया। उनकी रचनाएं महराष्ट्र के शैक्षिक पाठ्यक्रम में पहली से लेकर स्नातक तक के कोर्स में पढाई जाती हैं। बच्चों के लिए उनकी दो किताबें कविता संग्रह ‘नाच री गुड़िया’ 1978 में प्रकाशित हुआ जबकि कहानियों का संग्रह ‘सच्चाइयां’ 1979 में आया।

रचनात्मक उपलब्धियों के लिए ज़फ़र गोरखपुरी को महाराष्ट्र उर्दू आकादमी का राज्य पुरस्कार (1993), इम्तियाज़े मीर अवार्ड (लखनऊ) और युवा-चेतना सम्मान समिति गोरखपुर द्वारा फ़िराक़ सम्मान (1996) में मिला। 1997 में संयुक्त राज्य अमेरिका की यात्रा कर कई मुशायरों में हिंदुस्तान का प्रतिनिधित्व किया।

स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन उनके निधन पर गहन शोक व्यक्त करते हुए परमात्मा से उनकी आत्मा की परम शांति की प्रार्थना करती है।

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