ज़िन्दगी – उमेश धरमराज

ज़िन्दगी

तेरी ओर ही हैं ज़िन्दगी.

कुछ और भी हैं ज़िन्दगी…

 

भोर से उजली भी हैं

घनघोर भी हैं ज़िन्दगी.

खुशीयां देती हैं कभी

ग़मखोर भी हैं ज़िन्दगी.

फुलों से नाज़ुक नाज़ुक

कठोर भी हैं ज़िन्दगी.

तेरी ओर ही हैं ज़िन्दगी.

कुछ और भी हैं ज़िन्दगी…

 

मिट्टी में गुमनाम हैं

एक दौर भी हैं ज़िन्दगी.

ये कटी पतंगसी हैं

डोर भी हैं ज़िन्दगी.

गोल हैं गुमराह हैं

छोर भी हैं ज़िन्दगी.

तेरी ओर ही हैं ज़िन्दगी.

कुछ और भी हैं ज़िन्दगी…

 

शमा या की चांद हैं

चकोर भी हैं ज़िन्दगी.

दिलचस्प दिल के पास हैं

बोर भी हैं ज़िन्दगी.

बेजान कमज़ोर हैं

ज़ोर भी हैं ज़िन्दगी.

तेरी ओर ही हैं ज़िन्दगी.

कुछ और भी हैं ज़िन्दगी…

 

बेफिक्र ओ’ आज़ाद हैं

ग़ौर भी हैं ज़िन्दगी.

जां पे बनती खामोशी

शोर भी हैं ज़िन्दगी.

ये पैरों की ख़ाक हैं

सिरमौर भी हैं ज़िन्दगी.

तेरी ओर ही हैं ज़िन्दगी.

कुछ और भी हैं ज़िन्दगी…

– उमेश धरमराज.

umesh.dharamraj@gmail.com

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