होली गीत – अमित कुमार तिवारी

होली आई होली आई (होली गीत)

गलियों का सन्नाटा टूटा
देने को हर कोई बधाई
होली आई होली आई
हुल्लासों की टोली आई 1
खिडकी से झांके गोरी
बरसे रंग अबीर गुलाल
मस्त मगन हो नाचै कबीरा
फाग गावै मिलके सब आज   2
घर में बैठी दुबकी मुनिया
तभी सखी ने कुण्डी खटकाई
दरवाजे का खटका खोला
अंजुरी में रंग भर लाई     3
मजनू की अब बारी आई
छत से लैला ने पिचकारी चलाई
भींगा तन और अकुलायो मन
सुखद प्रणय का वह हर क्षण  4
ठण्डाई पीके डूबी दोपहरिया
गुलाल में गुलाबी होई गवो मौसम
धानी चुनर में सिमटे सात रंग
दादू भी नाचै बचवा के संग 5
कल तक दुराभाव था जिनमें
ताने रहते थे जो भौंहें
भूले सारे बैर भाव को
गले मिले ना देर लगाई  6
होली आई होली आई
हुल्लासों की टोली आई  ।।
amitapkamitra@gmail.com

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