हाय क्या चांद देखा (कविता) – जयेश मेस्त्री

पहले चांद को देखा,
फिर मैने तुम्हे देखा.
धरती पर मैने
हाय क्या चांद देखा.

बिन तुम्हारे जिंदगी
कैसे होगी, ये सोचा.
तब जिंदगी को मैने
तनहा मायूस देखा.

गिरते गिरते यू
संभल जाता हूं मै.
मैने अपने हाथो मे
तुम्हारा हाथ देखा.

दुनिया जन्नत सी
लगने लगी है मुझे.
दुनिया को मैने
तुम्हारी नजरो से देखा.

ये गीत जब मैने
तुम पर लिखा.
चांद को मैने
हाय रोते हुंए देखा.

जयेश शत्रुघ्न मेस्त्री

Advisory Panel Member – Censor Board (CBFC), Copywriter at ‘Agencydigi’, Sub-Editor at Sahitya Upekshitanche AND Translator, Lyricist, Poet, Screenwriter. Public Speaker, Columnist, Analyst, Director, Theatre Artist.. 

जयेश मेस्त्री

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