हम मिलो भटके (गीत) – धवल चोखाडिया

अन्दर भटके, बाहर भटके

दोनों ओर हम मिलो भटके
हमने सीखे सारे दांव सच – झूठ के

सख्त रहे है मगर बहुत टूट टूट के

रोये अंदर ही अंदर घुट घुट के

खुद को भी तो जानू

देख लिए रंग दुनिया के,
अन्दर भटके, बाहर भटके

दोनों ओर हम मिलो भटके

 

मैं ना मेरा हूँ और तूं ना तेरा है

मेरे अंदर चीखे, तेरे अंदर अँधेरा है

चल साथ चले दूर खड़ा सवेरा है

देख लिया है हमने

बरसो अकेले चल के,

 

अन्दर भटके, बाहर भटके

दोनों ओर हम मिलो भटके

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