रावण का आत्मदाह (Kahani) – आशुतोष तिवारी

रावण का आत्मदाह

हर साल की तरह, इस साल भी रावण का पुतला बनाया गया! रावन दहन से 2 दिन पहले, तय समय पर भरे बाज़ार में रावण को रस्सियों से बाँध कर लटका दिया गया! 2 दिन और 2 रात, बेचारा अकेला रावण! खैर, रात में रावण, ठंढ की वजह से ठिठुर रहा था, ठीक उसी समय शर्मा जी का बेटा वहाँ से गुजरा, हाथ में अभी भी बोतल पड़ी थी! गाना गाते-गाते, रावण को देखकर अचानक रुक गया! फिर ऐसा जोरदार ठहाका लगाया, की रावण के बीस कान सकते में आ गए! रावण डर गया! शर्मा जी के बेटे को आज घर जाने की इक्षा नहीं हुई, गाली ही तो देनी है! बीबी से बड़ा राक्षस सामने खड़ा है, और इसको गाली देने पर पोलिस अन्दर भी नहीं ले जायेगी, “फुल प्रूफ लीगल हरासमेंट”!!

बड़े इत्मिनान से बोतल लेकर शर्मा जी, वहीँ रावण के चरणों में बैठ गए! पहले से डरा रावण, अपने चरणों में शर्मा जी को देखकर भूलवश लक्ष्मण समझ बैठा! और अनहोनी के डर से खुद ही झुककर उनके सामने बैठ गया! रावण ने बोतल देखी, उसे लगा संजीविनी बूटी पीस कर हनुमान जी ने दे दी होगी! जब कही प्रॉब्लम आये दो घूंट पी लीजिएगा! बहुत देर तक सर झुकाए रावण को देखकर, शर्मा जी के बेटे ने ही बात आगे बढाई!

शर्मा जी: क्यों बे रावण? साले, औकात पता चल गई? आज यहाँ खड़ा है, दो दिन बाद तुझे जला दिया जायेगा, और तू कुछ नहीं कर सकता, हा हा हा! सारी हेकड़ी निकल गई! कहाँ गई तेरी ताक़त?

रावण: लेकिन लक्ष्मण, मैंने तो 10 लाख साल पहले अपराध किया था! उसकी सजा आज क्यों मिल रही रही है!

शर्मा जी: चुप, अपराध, अपराध होता है और ये हमारे कलयुग का पर्सनल मैटर है! हम 10 दिन में जस्टिस करें या 10 लाख साल में! तू चुपचाप बंधा रह!

हिम्मत कर के रावण ने दूसरा सवाल पूछा!

रावण: लेकिन, पिछले साल भी तो जलाया था! कितनी बार जलाओगे एक ही इंसान को!

शर्मा जी के बेटे ने बोतल मुंह से लगा कर, एक लम्बी सीप मारी और  गुस्से में चिल्लाया!

शर्मा जी: शट-अप, इंसान नहीं राक्षस! हम इंसान हैं तुम राक्षस हो! और, हमारी मर्जी, हम हर साल केस reopen करेंगे! तुम्हे क्या?

रावण का सारा ज्ञान धरा रह गया, संजीवनी पिए हुए शर्मा जी के बेटे से कैसे जीतता! दशमी तक रोज शर्मा जी के सुपुत्र आते और रावण को गाली दे कर चले जाते! उधर शर्मा जी के घरवाले भी खुश है, नवरात्री में माता ने सुन लिया है, अब बेटा घर पर आकर बीबी को गाली नहीं देता, मारता नहीं!!

खैर रावण-दहन के ठीक पहले, सारे लोग जमा हो गए! बच्चे, बुड्डे, औरतें सब रावण की तरफ देख रहे हैं! एक साथ इतनी नज़रों को घूरते देख रावण शरमा गया! लोग हंसने लगे! फिर अचानक किसी ने रावण के अन्दर प्राण प्रतिष्ठा कर दी, रावण गायब!

एक कमरे में राम-लक्ष्मण का पार्ट करने वाले, दो बच्चों का मेकअप हो रहा है! आवाज़ वहाँ भी पहुची-रावण गायब! लक्ष्मण बने लड़के ने देख लिया, की रावण तकिये के पीछे छिपकर कुछ इशारा कर रहा है!

लक्ष्मण ने फटाफट कमरे का दरवाज़ा बंद कर लिया और तकिया के पीछे छुपे रावण को पकड़ कर बाहर निकाला! रावण उदास था, बच्चे ने उससे उदासी का कारण पूछा!

रावण: मुझे असली राम के हाथो मरना है!

लक्ष्मण: लेकिन तुम तो नकली हो!

रावण: नहीं, मैं नकली नहीं हूँ, मै असली हूँ!

रावण जिद पर अड़ गया की उसे राम ही मार सकतें हैं! आसपास हडकंप मच गई की “रावण राम की डिमांड कर रहा है और वो भी ओरिजिनल”! ज्ञानी का ज्ञान फेल, करें तो क्या करें! किसी ने सलाह दी, “रावण, असली नहीं बल्कि बुराई का प्रतिक है” इसलिए “राम, अच्छाई के प्रतिक होंगे”!

अब पूरा शहर अच्छे इंसान की तलाश में निकल गया! घर-घर ढूँढा गया, लेकिन अच्छा इंसान? बड़ी मुश्किल से 4 लोगों को पकड़ कर रावण के सामने लाया गया! कलयुग के लोकतंत्र की बात थी, रावण के मूलभूत अधिकारों की बात थी, इसलिए उसे स्वेक्षा से राम चुनने का अवसर दिया गया!

एक बुजुर्ग ने रावण से चारो का परिचय करवाया!

बुजुर्ग: ये पंडित ज्ञानोदय शास्त्री, संस्कृत और हिंदी से PHD हैं!

रावण: इनसे पूछिये, की इनका बेटा क्या करता है? क्या उसका, किसी पराई स्त्री से कोई सम्बन्ध है?

ज्ञानोदय जी सकते में आ गए, कहाँ अच्छाई का प्रतिक बन कर आये थे, और यहाँ उनकी इज्ज़त उतारी जाने लगी! गुस्से में बोले!

ज्ञानोदय: लेकिन मेरे बेटे के कर्मो से मेरी अच्छाई कैसे कम हो गई?

रावण: लेकिन, मेरे राम ने तो अपने पिता के वचन के लिए 14 साल वनवास काट दिए थे!

समय बीता जा रहा था, रावण-दहन का शुभ मुहूर्त निकला जा रहा था, लोग बेचैन हो रहे थे! बुजुर्ग ने फटाफट अगला परिचय करवाया!

बुजुर्ग: अच्छा ठीक है, इनसे मिलिए हमारे दुसरे राम, श्री बालकृष्ण गुप्ता! इनकी शादी नहीं हुई, बचपन से ब्रह्मचारी है!

रावण: लेकिन इन्होने तो अपने भाभी का अपमान किया है! पुरे मोहल्ले के सामने, लोग इनकी भाभी को गाली दे रहे थे और ये चुपचाप तमाशा देख रहे थे! मेरे राम तो इतने कमज़ोर नहीं थे?

सारे लोग परेशान, रावण के पास सबके प्रश्नों का जवाब था! चारो के चारो कलयुगी राम फेल हो गए है! पहली बार एक राक्षस के सामने कलयुग के इंसान ठंढे पड़ गए है! बाहर शोर बढ़ता जा रहा है! “रावण को लाओ रावण को लाओ” लेकिन रावण जाने को तैयार नहीं!

सारे लोग मुह लटका कर चले गए! राम-लक्ष्मण बने बच्चे मायूसी से कमरे में अपने-अपने ड्रेस उतारने लगे! 6 साल के लक्ष्मण की आँखों से आंसू आ गए, उसने बड़ी जिद करके अपनी माँ से लक्ष्मण की ड्रेस सिलवाई थी!

लक्ष्मण: हर साल दुसरे के हाथ से मर जाते हो, आज हमारी बारी आई तो नाटक कर दिया?

एक बच्चे की, आंसू की वजह से रावण लज्जित हो गया! उसने सोचा “हर साल तो जलता ही हूँ, एक साल और  सही’! रावण ने सहमती में गर्दन हिला दी!! उसे समझ आ गया है, की वो बच्चो को रोमांचित करने वाला, महज एक कठपुतली है!

निराश भीड़ में एकबार फिर उर्जा भर गई, लोग चिल्ला रहे हैं “रावण मरने के लिए रेडी हो गया है”! बच्चे-बुड्डे सब रावण के इंतज़ार में हैं! अचानक रावण अपनी जगह पर बंधा हुआ दिखा! सर लटकाए हुए! लेकिन आँखों में छल-गुस्सा-अहंकार नहीं बल्कि आंसू लिए हुए!

राम ने तीर चलाई, धू-धू करके रावण जल गया!! लोगों में उल्लास भर गया! “रावण मारा गया, रावण मारा गया”! निश्चिंत होकर मै भी घर लौट आया! अगली सुबह “राम-राज्य” में होगी, इसी आशा के साथ मै सो गया!

अभी भी सो रहा हूँ, रामराज्य आ जाये तो जगा दीजिएगा!

Ashutosh Tiwari <ashu774@gmail.com>

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