मेरी चंद ग़ज़ले 1 – धवल

(1)

तूफानों में लहरों के रूप बदल जाते है
थोडा सच कहो तो अपने बदल जाते है

मैंने कई बार सोचा की सच ना कहू
दिल में तल्खी हो तो लफ्ज़ बदल जाते है (तल्खी – कडवाहट)

भीड़ में रहकर भी हम सब थक गए है
तन्हाई में हमको सन्नाटे निगल जाते है

अपनी सोच पर एतमाद करना सीखो
तक़दीर के मौसम पल में बदल जाते है (एतमाद – विश्वास)

(2)

थोडा ठहर जा तूं, ये वक्त भी चला जायेगा
धीरे धीरे हर दर्द कम होता चला जायेगा

इस दर्द की दवा तो किसीने ढूंढी नहीं
ये दर्द ही तेरा दोस्त बन जायेगा

इस दर्द की मय में नशा लाजवाब है
जो इसे पियेगा वो झूमता चला जायेगा

किसी से मत कहना की दर्द में जवाब छुपे है
वर्ना हर कोई सवाल पूछता जायेगा

चीख कर रो ले तूं, घर में कोई नहीं है
घर का सन्नाटा भी थोडा दूर हो जायेगा

(3)

ना इसकी, ना उसकी, ना तेरी, ना मेरी
यहाँ जो बाते हो रही है सब बेमानी है

दर्द के छालो से हर कोई चीख उठता है
गोर से देखो तो सब की आँखों में पानी है

इस अदाकारी में किरदार खुद से नाराज़ है
उपरवाले ने लिखी ये कैसी कहानी है

हँसना हो तो रोता हूँ, रोना हो तो हँसता हूँ
दुनियादारी के नाम पर सीखी बेईमानी है

(4)

यहाँ पर अपने ही लोग अजनबी निकले
नियत के मेले थे सब मतलबी निकले

जज्बातों को मैं अल्फ़ाज़ में तराशता हूँ
लोग कहते है मेरे शौक नवाबी निकले

कल शब ख्वाब में छुआ था उसने
सुबह देखा तो मेरे होठ गुलाबी निकले

दुश्मन को भी रास्ता दिखाता हूँ मैं
ढूँढो,अगर मुझ में कोई खराबी निकले

आंसुओ का दरिया बहा के चल दिए
देखो मयखाने से कुछ शराबी निकले

dhaval.chokhadia@gmail.com

(Mo) – 9979739104

 

 

 

 

 

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