महेन्दर मिसिर पर संगीत भरा कार्यक्रम

mahendar misirफिल्म रायटर्स एसोसिएशन भोजपुरी स्क्रीन रायटर्स की दिशा और दशा को बेहतर बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है. इसी प्रयास की अगली कड़ी है भोजपुरी लोकगीत-संगीत के सबसे महान रचनाकार महेन्दर मिसिर के व्यक्तित्व और कृतित्व पर एक संगीतमय कार्यक्रम. इस कार्यक्रम का आयोजन आगामी 17 जनवरी, शनिवार को दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक फिल्म रायटर्स एसोसिएशन के कार्यालय के सभागृह में किया जा रहा है. सभी सदस्य लेखक मित्रों से निवेदन है कि कार्यक्रम में पधारें और लाभांवित हों. फिल्म रायटर्स इससे पहले भिखारी ठाकुर पर इसी तरह का एक कार्यक्रम कर चुका है. इसके अलावा एक लेखन कार्यशाला भी आयोजित की जा चुकी है, जिसमें मशहूर फिल्म लेखक श्री कमलेश पांडे और अंजुम रजबली ने स्क्रिप्ट लेखन में तकनीक और विचार को लेकर बातें बताई थीं.

महेन्दर मिसिर! भोजपुरी समाज के अदभुत और विलक्षण रचनाकार थे. उन्होंने न सिर्फ सैकड़ों गीत लिखे, बल्कि स्वयं उनकी धुनें बनाई और वह पुरबी संगीत के जनक के तौर पर जाने गए. कलकत्ता से लेकर बनारस तक की तवायफों की महफिलें तो उनके गीतों से गुलजार रहती ही थीं, मन्दिरों, धार्मिक आयोजनों और अध्यात्म की ओर बढ़ चले प्रोढ़ों के बीच भी उनके गीत उतने ही लोकप्रिय थे. आम गृहस्थ स्त्रीहृदय की वेदना और चाहत को भी उन्होंने इतना वास्तविक और सुन्दर स्वर दिया कि घर-घर में उनके गीत गाए-गुनगुनाए गए. उनके देहावसान के आज 68 साल बाद भी महेन्दर मिसिर भोजपुरी जनमानस में वैसे ही किंवदंती बने हैं, जैसे अपने जीवन में थे. उनके गीतों के बगैर भोजपुरी गीत-संगीत की महफिल बेरौनक है. भोजपुरी फिल्मों के अनेकानेक गीत उनके गीत-संगीत की कॉपी करके बनाए गए हैं. लोकगायक-गायिकाएँ उनके गीतों को गाकर सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ रहे हैं. महेन्दर मिसिर बेजोड़ थे और भोजपुरी में आजतक उनके मुकाबले का कोई रचनाकार नहीं हुआ. ऎसे महान व्यक्तित्व महेन्दर मिसिर पर फिल्म रायटर्स एसोसिएशन आगामी 17 जनवरी को अपने कार्यालय के सभागार में एक सांगीतिक कार्यक्रम कर रहा है, ताकि हमारी भोजपुरी फिल्मों के गीतकार उनसे प्रेरणा ले सकें और भोजपुरी फिल्म गीतों को फूहड़ता के दलदल से निकालने में उन्हें मदद मिले.

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