महाराष्ट्र के दो रत्न – लताजी और सचिन को समर्पित कविता – अमित कुमार

गीतकार – अमित कुमार तिवारी

सुर सम्राज्ञी लता जी ताई *
युग युग जियें आप हमारी बधाई
सचिन सर जी के रिकार्ड अनोखे
भारत रत्न ऐसे ही होते
” ज्योति कलश छलके ” गीत सुनकर
आज भी घरों में सुबह होती
”ऐ मेरे वतन के लोगों ” सुनके
आँखें अश्कों से पलकें भिगोतीं
सोणे सचिन सर जी का सरल स्वभाव
कभी न हुआ किसी से उलझाव
कॉमिडी के नाम पे यारों
फूहड़ता के ना शूल बिखेरो
आत्मसम्मानों पर न आँच आवे
ऐसा कुछ करतब दिखलाओ
पैसा कमाने के खातिर
अभद्रता का न पथ अपनाओ
सस्ती पब्लिसिटी की आजादी
अभिव्यक्ति कहती मैनू बचाओ
ना दोषारोपण ना भाषणबाजी
धूप खिली है बाहर आओ
कुम्हलाये जो फूल मन के
उनमें बिखेरो प्रभात की घूंटी
जैसी संगत वैसी रंगत
सच है कड़वी नींम की बूटी
बाकी सब माया है झूठी
खुल के हँसना सीखो मेरे भाई ।।

*Meaning –   हमारे महाराष्ट्र में ”ताई ” शब्द आदर सूचक ”बड़ी बहन (दीदी) ” के
लिये प्रयोग किया जाता है

** विनम्र आग्रह – यह गीत लिखने में लेखक का तात्पर्य न तो किसी की
भावनाओं को आहत करना है और न ही किसी व्यक्ति / सामुहिक जन भावनाओं को
उकसाना है धन्यवाद.

WRITTEN BY AMIT KUMAR TIWARI
EMAIL –amitapkamitra@gmail.com

This entry was posted in Members Contributions, Members' Creations. Bookmark the permalink.