बेटी का बलिदान (कविता में कहानी) – अमित कुमार तिवारी

बेटी का बलिदान…

माँ जी लेखिका बनने पे उतारू है
बेटी बडी संस्कारी है
अभिनय करने की तैयारी है
प्रोड्यूसर दामाद की खोज ज़ारी है  1
डेंगू के मच्छर से ज़्यादा
मम्मी के स्कीमो की महामारी हैं
एक्टर होगा तब तक चलेगा
जब तक जेब उसकी भारी है   2
पापा पापकार्न लाने तक सीमित है
सात वचनों की E.M.I. न्यारी है
बेटी का बलिदान ज़ारी है
अब मम्मी बनी व्यापारी है  3
समझाने की कोशिशें
सौ फीसदी बेगारी हैं
श़ौक से चाहे लगे शाक
मम्मी की शान जारी है  4
भाड में जायें शोक संताप
मम्मी जपती सिर्फ स्वार्थ का जाप
डायरेक्टर को कर लिया रेडी
जो न जाने ए बी सी डी  5
कट कापी पेस्ट वाली स्क्रिप्ट पुरानी
वही घिसी पिटी घटिया कहानी
प्रशंसा में छिपी मक्कारी है  6
ट्रीटमेन्ट का गया ज़म़ाना
ऐसी मम्मी से परिवारों  को बचाना
आमदनी जीरो खर्चा डालर का डेली
क्रेडिट कार्ड्स पर कर्जबाजारी है 7
बैठो क्लाइमैक्स अभी बाकी है
दामाद जी की डिमान्ड हुई ठप
हो गया अब वह बैंकरप्ट
पापा की टीचिंग अब नहीं चलती
फ़िल्म हुई डिब्बा बन्द  8
बेटी को डिवोर्स दिलाने के बाद
मम्मी का संघर्ष ज़ारी है
80 पार कर गईं
फिर भी न लौटी समझदारी है  9
इक ही धुन वही घुन
मुई कब बनेगी फ़िल्म
कितनों पर ढाया जुल्म
नहीं है मम्मी को मालूम  10
पापा कह गये अलविदा
द़ीवार पर टंगी उनकी तस्वीर
टेक्नोलजी का कमाल है
पापा जी की स्माइल राज़दार है  11
इक दिन मम्मी ने बेटी से इच्छा जताई
बेटी को बात न रास आई
बोली, हाँ बेटी हूँ तुम्हारी
तभी तो सहती रही सब चुपचाप  12
कभी कुछ कहा हो तो तुम्ही बताओ
अब मम्मी जी आदतों से बाज आओ
उम्र मेरी ढलने वाली है
मुझपे भी कुछ तरस खाओ  13
मम्मी खुश होके बोली
बन्द करो बिटिया ठिठोली
तुम्हारी सीनियोरिटी को ध्यान में रखकर
हमने ख़ुद पर एक स्क्रिप्ट लिख डाली है।  14

बेटी का बलिदान – अमित कुमार तिवारी

This entry was posted in Members Contributions, Members' Creations. Bookmark the permalink.