पानी से जुड़ी सात चौपाइयां (पानीवली) – – अमित कुमार तिवारी

सुबह नहाने को चले
चार बाल्टी दन्न*
दिन भर बूंद बूंद को तरसे
दूर भयो मति भ्रम

जल ही जीवन है
कहते बुज़ुर्ग सत्य
आज अमल हम कर रहे
कल तक समझे व्यर्थ

कतार में लगे चार लोग
अजब यह संजोग
पानी के लिये मची कोलाहल
भूले सब यारी, दोस्त

जल बिन सूनी गृहस्थी
समझो तुम श्रीमान
श्रीमती जी हुईं लालटेन
प्रभुजी करो निदान

वो भी क्या दिन थे सोच
आँख मूंद लगाई छलांग
तालाब में पानी नहीं
अस्पताल पहुँचे गुल़फाम

म्युनिसिपालिटी के नल से आवे
नित्य सर्र सर्र की आवाज
तांत्रिक करता झाड़ फूंक
किन्तु नल ना आवे बाज

जल कर# आता वक्त पर
पानी आता बेवक्त
देखके बढ़ते बिल का बोझ
ब्लडप्रेशर बढ़ता कमबख़्त ।।

*शब्दों का अर्थः  दन्न – व्यर्थ करना
#जल करः वॉटर टैक्स

अमित कुमार तिवारी
amitapkamitra@gmail.com

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