निर्दोष (कविता) – मदनलाल गोयल

निर्दोष

चोर को चोर कैसे पकड़ पायेगा,

एक दूसरे को जानता है कैसे हाथ आएगा ।

फिर कोई निर्दोष चोर बता कर पकड़ा जायेगा,

चलेगा उस पर मुक्कदमा पूरा महकमा जुट जायेगा ।

आया है अब पकड़ में बहुत राज़ खुलवाने है,

ढूंढने है इसके कहाँ कहाँ लूट के ख़ज़ाने है ।

टाडा, मीसा नाकाफी है कोई नई धारा लगानी है,

यह देश का है दुश्मन, इसे सजा सख्त दिलानी है ।

इन्साफ के इंतजार में गरीब तड़प तड़प कर मर जायेगा,

कानून के रखवाले को बहादुरी के नाम पर अलंकार मिल जायेगा ।

 

मदन लाल गोयल

Panchkula

goyal.haryau@gmail.com

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