धवल चोखाडिया की चार ताज़ा गज़ले

(1)

ये कल भी हुआ था और ये आज भी होगा

तमाशा ईस दुनिया का तेरे बाद भी होगा

 

झूठ बोलने की अदाकारी से थक जाओ अगर

चुप रहके देखो ख़ामोशी में सच भी होगा

 

तालियाँ बजानेवाले हाथ पत्थर भी फेंकते है

तमाशबीनों में कोई तुमसे नाराज़ भी होगा

 

कहानी इतनी आसाँ नहीं तूं अगर समजे तो

अंजाम से पहले कहानी में एक मोड़ भी होगा

 

(2)

बहुत फुर्सत से मिले है मसरूफ लोग

आज बदले हुए से लगते है अपने लोग

 

तुम्हारा गम यहाँ कोई नहीं सुनता है

अपनी ही कहानी सुनाते है तन्हा लोग

 

तक़दीर का लिखा हुआ कहाँ मिटता है

फिर भी तक़दीर से लड़ते है पागल लोग

 

जो प्यार और वफ़ा की बाते करते थे

आज रोज़गार ढूँढ रहे है वही दीवाने लोग

 

बड़ी देर तक जली थी कल रात बस्ती

कल जो थे आज धुआँ हो गए वो लोग

 

(3)

एक बार अपनी सोच पर यकीन कर के देख

आसमां को पाना है तो ज़मीन छोड़ के देख

 

तूफानों में तेरी कश्ती पार हो जायेगी देखना

बस, शर्त यही है की तूं साहिल छोड़ के देख

 

सभी दोस्त है यहाँ, कोई दुश्मन नहीं है तेरा

ज़बान थोड़ी मीठी कर और गुरुर छोड़ के देख

 

इतनी आसानी से ख़ुदा किसी को नहीं मिलता

वो कहेगा मेरे लिए तूं सब कुछ छोड़ के देख

 

(4)

तूं जहां ले जाएगा चलूँगा मैं ख़ुदा

पर कभी हार ना मानूंगा मैं ख़ुदा

 

तेरी फितरत अच्छे से जानता हूँ

तेरी चाल समजने में कच्चा हूँ खुदा

 

जब कभी भी होगा दीदार तेरा

तब अपनी झोली फेला दूंगा ख़ुदा

 

हो सके तो तूं मेरे एब गिना मुझे (एब – दोष)

और बेहतर होता जाऊँगा मैं ख़ुदा

धवल चोखाडिया

शायर और लेखक

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