दो अक्षर (कविता) – शशि कान्त जुनेजा

शायर किसी की ज़िंदगी पर ,लिख दो अक्षर दो.

इक आश्कि इक मेहबूबा,बस नाम बहुत है दो.

शायर किसी की……

दो अक्षर के बीच छुपी है,पूरी ही रामायण .

दो दो अक्षर मिलकर ही तो,बनता कोई कारण.

बस रात बहुत है जीने को,चाहे दिन न हो.

शायर किसी की……

दो बुँदे अमृत की,दो उसके मीठे बोल

मिल जाये जिससे जीवन ,वो चीज़ बड़ी अनमोल

पत्थर को आवाज लगा दे बोल दे पत्थर वो.

शायर किसी की .,…

बदनाम बहुत है दुनिया में ,शायर जिसका नाम.

तलख तरीके अपने उसके , न गैरों से काम.

हर रिश्ते में इश्क़ छुपा , नाम कोई भी हो

शायर किसीकी…

सो न पाये उठ बैठे वह , ऐसे गुजरें रातें ,

बिन बोले ही कह जाये , जानी कितनी बातें

हर कोई समझे अपनी कहानी ,शायर बोल दे  तो

शायर किसी की……

भरी कहानी में भी उसका , नाम कहीं ना आता .

कौन सा अक्षर. उसकी कहानी, लिखता व  तर्पता.

जाते जाते नाम के अपने , अक्षर बोल दे दो.

शायर किसी की……

Juneja SHASHI KANT (J Sk )

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