दिल लगाने के बाद (कविता) – विजय कुमार देवनाथ

दिल लगाने के बाद

कवि – विजय कुमार देवनाथ
vijaydevnath@gmail.com

 

तू इस कदर उदास तो ना थी ज़िन्दगी

क्या हुआ है तुझे दिल लगानेके बाद

क्यूँ उम्मीद ए वफ़ा रखता है जमाने से

यहा कौन किसका हुआ है

वक्त निकल जाने के बाद
रहने दे अभी बाकी तेरी यादो का सुकून

कि ना बाकी कुछ रह जाता है

तेरी यादो से गुजर आने के बाद

बड़े हसीन होते है ये लम्हे तेरे तस्सवुर के

पर बीत जाते है एक पल मे

दिल मे कसक जगाने के बाद
बेख़बर मैं भी नही बेख़बर तू भी नही

इन अश्कों से

चले आते है जो पलको पे

मुस्कुराने के बाद

अब के बिछड़े हम कभी मिले ना मिले

कौन भला लौट के आता है

इतनी दरू चले जाने के बाद
पल दो पल जो है बाकी

जी ले उसे एक उम्र की तरह

कि हो जाएँगी ख़त्म बाते सभी

अगले ही पल मौत के आने के बाद

इतना आसान नहीं होता

किसी को यू ही भुला देना

हम साया जुदा होता है

सिर्फ जिस्म के जल जाने के बाद

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