तेरी बाहों में होने को जी चाहता है – शालू मिश्रा

तेरी बाँहों में होने को जी चाहता है,
फ़ना होने को जी चाहता है…

तिनका तिनका यादों का,
पिरोया एहसास के धागों में..
उन धागों से सजने को जी चाहता है,
फ़ना होने को जी चाहता है…

बाँहों का तकिया तेरा था,
उन लबों की नर्मी मेरी थी…
जब ओस की चादर ने तुझ-मुझपर चांदनी बिखेरी थी,
लम्हात वो जीने को जी चाहता है..
फ़ना होने को जी चाहता है…

मुकम्मल करता तू मेरा जहाँ,
आबाद न मेरी तन्हाई होती…
तेरे मासूम से चेहरे ने, न नज़र मेरी चुराई होती,
इस बात पे लड़ने को जी चाहता है…
फ़ना होने को जी चाहता है…

तेरी बाँहों में होने को जी चाहता है,
फ़ना होने को जी चाहता है…

Contribution from: Shalu Mishra Agarwal
Email: mishra.shalu@gmail.com
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