जवानी वतन के नाम लिखता है (गीत) – अमित कुमार शर्मा

     जवानी वतन के नाम लिखता है

ज़ज्बे के पन्नों पर इरादों की कलम से,

सहादत का कलाम लिखता है।

हर जवान अपनी जवानी वतन के नाम लिखता है।

हमनें तो महबूबा मुल्क़ को समझा है

बस इसी से मोहब्बत की है।

हमें इसी तिरंगे में रहीम, इसी में राम दिखता है।

हर जवान अपनी जवानी वतन के नाम लिखता है।

जब तलक जिस्म में बाक़ी लहू का इक भी क़तरा होगा

यकीं मानों इस मुल्क पर न कोई ख़तरा होगा

हम वो चट्टानें हैं जिनके आगे

न कोई तूफ़ान टिकता है।

हर जवान अपनी जवानी वतन के नाम लिखता है।

जो छायें कभी दहशतगर्दी के बादल उनको हटा देंगें हम

दुश्मन-ए-हिन्द जो डालें नापाक निगाहें उनकों मिटा देंगें हम

फ़र्ज़ की लकीरों से मुल्क़ की मिट्टी पर,

आज़ादी का पैग़ाम लिखता है।

हर जवान अपनी जवानी वतन के नाम लिखता है।

 

AMIT KUMAR SHARMA

amitabh9950@gmail.com

Mob:- 8500627580

 

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